Mutual Fund को स्पॉन्सर करने की PE Funds को अनुमति देने के लिए बदलावों की सिफारिश के लिए SEBI ने किया वर्किंग ग्रुप का गठन

The News Air: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने एक वर्किंग ग्रुप (कार्य समूह) का गठन किया है जो मौजूदा नियमों को परखेगा और अलग पात्रता मानदंड की सिफारिश करेगा। सेबी के वर्किंग ग्रुप द्वारा सुझाये गये पात्रता मानदंड (eligibility criteria) के मुताबिक प्राइवेट इक्विटी (PE) फंड और अन्य गैर-पात्र संस्थाओं को फंड हाउस को स्पॉन्सर करने की अनुमति मिलेगी।

सेबी ने कहा कि वर्किंग ग्रुप की भूमिका “हितों के टकराव को दूर करने के लिए मेकेनिजम (कार्यप्रणाली) की सिफारिश करने के लिए होगी। पूल्ड इन्वेस्टमेंट वेहिकल /प्राइवेट इक्विटी के प्रायोजक के रूप में कार्य करने पर हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही ये वर्किंग ग्रुप एसेट मैनेजमेंट कंपनी में स्पॉन्सर की मौजूदा न्यूनतम 40 प्रतिशत हिस्सेदारी को कम करने की जरूरत की जांच करेंगे और इस संबंध में अपनाये जाने वाले विकल्प की तलाश करेंगे।”

मौजूदा नियमों के मुताबिक म्युचुअल फंड में 40 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी रखने वाली किसी भी संस्था को स्पॉन्सर माना जाता है और उन्हें पात्रता मानदंडों को पूरा करने की आवश्यकता होती है।

IDFC म्युचुअल फंड (IDFC Mutual Fund) के बंधन फाइनेंशियल होल्डिंग (Bandhan Financial Holding) के नेतृत्व वाले निवेशकों के समूह द्वारा अधिग्रहित किए जाने बाद नियामक ने ये कदम उठाया है। अधिग्रहण करने वाले निवेशकों के समूह में सिंगापुर सॉवरेन वेल्थ फंड जीआईसी (Singapore Sovereign Wealth Fund GIC) और प्राइवेट इक्विटी फंड क्रिसकैपिटल (ChrysCapital) भी शामिल हैं।

निजी इक्विटी फंडों ने 37 लाख करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड उद्योग में प्रवेश करने में दिलचस्पी दिखाई है। इससे पहले वैश्विक PE खिलाड़ी ब्लैकस्टोन और अन्य PE फर्म एलएंडटी म्युचुअल फंड को खरीदने की दौड़ में शामिल थे। हालांकि एचएसबीसी म्युचुअल ने इसे खरीद लिया।

सेबी ने कहा, “म्युचुअल फंड को स्पॉन्सर करने के लिए मौजूदा पात्रता जरूरतों के अलावा नये मानदंडों की आवश्यकता महसूस की गई है। इसके तहत नए खिलाड़ियों को स्पाॉन्सर के रूप में कार्य करने के लिए पात्रता मानदंड का एक वैकल्पिक सेट पेश किया जा सकता है। इससे न केवल म्युचुअल फंड उद्योग में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि विलय और अधिग्रहण के माध्यम से उद्योग में कंसोलिडेशन की सुविधा भी मिलेगी। इससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

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