Russia India Oil Import News: भारत (India) और रूस (Russia) की दोस्ती दशकों पुरानी है और यह रिश्ता सिर्फ तेल और हथियारों तक सीमित नहीं है। यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) बार-बार दावा कर रहे हैं कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, लेकिन रूस को उनकी बातों पर जरा भी यकीन नहीं है। दुनिया चाहे कुछ भी कहे, मॉस्को को अपने पुराने दोस्त पर पूरा भरोसा है। अब रूस के विदेश मंत्रालय ने ऐसा बयान दे दिया है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी और बढ़ना तय है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को साफ कहा कि उसके पास यह मानने की कोई वजह नहीं है कि भारत ने रूसी तेल खरीदने पर अपना रुख बदल दिया है। रूस की यह टिप्पणी अमेरिका के उस दावे की पृष्ठभूमि में आई है जिसमें कहा गया था कि भारत रूसी कच्चे तेल का आयात बंद करने पर सहमत हो गया है।
रूस ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा (Maria Zakharova) ने अपनी प्रेस वार्ता में कहा, “हमारे पास यह मानने की कोई वजह नहीं है कि भारत ने रूसी हाइड्रोकार्बन (तेल) खरीदने पर अपना रुख बदल लिया है। भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने से दोनों देशों को फायदा होता है और इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।”
ज़खारोवा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) के दावों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिका ने स्वतंत्र देशों पर हुक्म चलाने का अधिकार जबरन ले लिया है।
अमेरिका ने क्या दावा किया था?
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर मात्र 18% कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया था कि यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कथित तौर पर रूसी तेल के बजाय अमेरिकी या वेनेजुएला का तेल खरीदने पर सहमति जताई। हालांकि, भारतीय पक्ष की ओर से अब तक इन दावों की न तो पुष्टि की गई है और न ही खंडन। भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा द्वारा निर्देशित होती है, न कि किसी बाहरी दबाव से।
तेल आयात के आंकड़े क्या कहते हैं?
आंकड़ों की मानें तो जनवरी 2026 में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन (11 लाख बैरल प्रतिदिन) रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अमेरिकी दबाव और नए व्यापार ढांचे का प्रभाव हो सकती है। भले ही वाशिंगटन कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ छूट के जरिए भारत को रूस से दूर करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मॉस्को को अपनी साझेदारी पर पूरा भरोसा है।
रूस का भरोसा और भारत की मजबूरी?
रूस का मानना है कि जब तक भारत को रियायती दरों पर ऊर्जा की जरूरत है, वह पूरी तरह से रूसी आपूर्ति बंद नहीं करेगा। रूस का यह लगातार बयान अमेरिका की टेंशन को बढ़ाता जा रहा है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि भारत ने तेल खरीद बंद कर दी है। अब सबकी निगाहें सिर्फ और सिर्फ भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि भारत सरकार रूसी तेल पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह अमेरिकी दबाव के आगे झुकती है या अपनी पुरानी मित्रता और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देती है।
विश्लेषण: भारत की चुनौती और रणनीति
यह पूरा मामला भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती पेश करता है। एक तरफ उसका पुराना मित्र रूस है, जो रियायती दरों पर तेल दे रहा है और रक्षा क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा साझेदार है। दूसरी तरफ अमेरिका है, जिसके साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और जो टैरिफ और व्यापार समझौतों का लालच देकर भारत को रूस से दूर करना चाहता है। भारत की रणनीति हमेशा से ‘राष्ट्रीय हित’ को सबसे ऊपर रखने की रही है। ऐसे में, भारत अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण (diversification) तो करेगा, लेकिन रियायती तेल का स्रोत छोड़ना उसके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं होगा। रूस के इस ताजा बयान ने अमेरिका के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक ऐसे देश के रूप में पेश किया है जो दबाव में निर्णय नहीं लेता।
मुख्य बातें (Key Points)
रूस (Russia) ने कहा कि उसके पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत (India) ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है।
रूस की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उस दावे के बाद आई है कि भारत ने रूसी तेल का आयात बंद करने पर सहमति जताई है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा (Maria Zakharova) ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों को फायदा होता है।
आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2026 में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम है।
भारत सरकार की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।








