Rural Tourism Development India – केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय रणनीति की घोषणा की। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के तहत आदिवासी क्षेत्रों में 1000 होमस्टे विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक घरेलू इकाई को नए कमरों के निर्माण के लिए अधिकतम ₹5 लाख और मौजूदा कमरों के नवीनीकरण के लिए ₹3 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह पहल जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने और आदिवासी समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक जीवनशैली इन क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाती है। पर्यटन मंत्रालय की नई रणनीति इन संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने का प्रयास है।
आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे विकास: प्रमुख विशेषताएं
पर्यटन मंत्रालय ने ‘आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे का विकास’ के लिए व्यापक दिशानिर्देश और टेम्पलेट जारी किए हैं। यह पहल स्वदेश दर्शन योजना की उप-योजना के रूप में संचालित की जा रही है।
मुख्य उद्देश्य:
1. जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा: आदिवासी क्षेत्रों में टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन मॉडल विकसित करना जो स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण और समुदायों का सम्मान करे।
2. आजीविका के अवसर: स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए पर्यटन के माध्यम से आय के नए स्रोत उत्पन्न करना।
3. सांस्कृतिक संरक्षण: आदिवासी संस्कृति, कला, शिल्प और परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करना।
4. कौशल विकास: होमस्टे मालिकों को तकनीकी कौशल और आतिथ्य प्रशिक्षण प्रदान करना।
वित्तीय सहायता का विवरण
सरकार ने आदिवासी होमस्टे विकास के लिए उदार वित्तीय सहायता की व्यवस्था की है:
1. ग्राम समुदाय के लिए:
- अधिकतम राशि: ₹5 लाख
- उद्देश्य: सामुदायिक आवश्यकताएं जैसे सामान्य सुविधाएं, सूचना केंद्र, स्वागत कक्ष आदि
2. नए कमरों का निर्माण:
- अधिकतम राशि: ₹5 लाख प्रति घरेलू इकाई
- उद्देश्य: प्रत्येक होमस्टे में दो नए आधुनिक कमरों का निर्माण
- मानक: पर्यटकों के लिए आरामदायक और स्वच्छ आवास सुविधाएं
3. मौजूदा कमरों का नवीनीकरण:
- अधिकतम राशि: ₹3 लाख प्रति घरेलू इकाई
- उद्देश्य: पुराने कमरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना
- शामिल: मरम्मत, रंगाई, फर्नीचर और बुनियादी सुविधाएं
कुल लक्ष्य: देशभर में 1000 होमस्टे विकसित करना
PM-JUGA: प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान
यह पहल प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के व्यापक ढांचे के अंतर्गत आती है। PM-JUGA का उद्देश्य आदिवासी गांवों का समग्र विकास करना है जिसमें:
- बुनियादी ढांचे का विकास
- आजीविका के अवसर
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं
- सांस्कृतिक संरक्षण
- आर्थिक सशक्तीकरण
होमस्टे विकास इस अभियान का महत्वपूर्ण घटक है जो आदिवासी परिवारों को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाता है।
कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम
सफल होमस्टे संचालन के लिए केवल भौतिक अवसंरचना ही पर्याप्त नहीं है। पर्यटन मंत्रालय ने होमस्टे मालिकों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की व्यवस्था की है:
प्रशिक्षण के क्षेत्र:
1. आतिथ्य कौशल:
- अतिथि स्वागत और संवाद
- ग्राहक सेवा
- सांस्कृतिक संवेदनशीलता
2. तकनीकी कौशल:
- ऑनलाइन बुकिंग प्रबंधन
- डिजिटल भुगतान
- सोशल मीडिया उपयोग
3. स्वच्छता और सुरक्षा:
- स्वच्छता मानक
- खाद्य सुरक्षा
- पर्यटक सुरक्षा
4. व्यवसाय प्रबंधन:
- लेखा-जोखा
- मूल्य निर्धारण
- मार्केटिंग
5. पर्यावरण संरक्षण:
- इको-फ्रेंडली प्रथाएं
- अपशिष्ट प्रबंधन
- जल और ऊर्जा संरक्षण
स्वदेश दर्शन 2.0: चुनौती आधारित गंतव्य विकास
पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ के लिए नए दिशानिर्देश तैयार किए हैं। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
1. पर्यटक अनुभव में सुधार: पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करना।
2. टिकाऊ गंतव्य: पर्यटन स्थलों को पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ गंतव्यों में परिवर्तित करना।
3. जिम्मेदार पर्यटन: स्थानीय समुदायों और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित करना।
4. चुनौती समाधान: विशिष्ट स्थानीय चुनौतियों के आधार पर अनुकूलित समाधान विकसित करना।
यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक पर्यटन स्थल की अनूठी आवश्यकताओं और संभावनाओं को ध्यान में रखा जाए।
इको-पर्यटन और टिकाऊ पर्यटन के लिए राष्ट्रीय रणनीतियां
पर्यटन मंत्रालय ने हरित और इको-पर्यटन के विकास के लिए व्यापक राष्ट्रीय रणनीतियां तैयार की हैं। इनमें शामिल हैं:
इको-पर्यटन रणनीति:
- प्राकृतिक क्षेत्रों का जिम्मेदार दोहन
- जैव विविधता का संरक्षण
- पर्यावरणीय जागरूकता
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी
टिकाऊ पर्यटन रणनीति:
- दीर्घकालिक पर्यावरणीय संरक्षण
- सामाजिक-आर्थिक लाभ
- सांस्कृतिक संरक्षण
- संसाधन प्रबंधन
ये रणनीतियां सुनिश्चित करती हैं कि पर्यटन विकास पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की कीमत पर न हो।
Travel for LiFE: जीवनशैली के लिए पर्यावरण
केंद्र सरकार के LiFE (Lifestyle for Environment) अभियान के अनुरूप, पर्यटन मंत्रालय ने Travel for LiFE कार्यक्रम शुरू किया है।
कार्यक्रम के उद्देश्य:
1. पर्यटकों को जागरूक करना:
- टिकाऊ यात्रा प्रथाएं
- पर्यावरण संरक्षण
- स्थानीय संस्कृति का सम्मान
2. पर्यटन व्यवसायों को प्रोत्साहित करना:
- हरित प्रथाओं को अपनाना
- अपशिष्ट न्यूनीकरण
- नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग
3. टिकाऊ पर्यटन मानक:
- सर्टिफिकेशन प्रणाली
- पुरस्कार और मान्यता
- सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रचार
यह पहल पर्यटकों और पर्यटन उद्योग दोनों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाती है।
ग्रामीण पर्यटन का डिजिटल प्रचार
पर्यटन मंत्रालय विभिन्न माध्यमों से ग्रामीण और आदिवासी पर्यटन का सक्रिय प्रचार कर रहा है:
1. आधिकारिक वेबसाइट:
- ग्रामीण होमस्टे की सूची
- गंतव्य जानकारी
- बुकिंग सुविधाएं
- पर्यटक गाइड
2. सोशल मीडिया अभियान:
- फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर नियमित पोस्ट
- आकर्षक वीडियो और फोटो
- पर्यटक अनुभव साझा करना
- स्थानीय कहानियां
3. डिजिटल मार्केटिंग:
- ऑनलाइन विज्ञापन
- इन्फ्लुएंसर सहयोग
- वर्चुअल टूर
- वेबिनार और कार्यक्रम
4. समग्र भारत प्रचार:
- अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मेले
- देश-विदेश में प्रचार कार्यक्रम
- Incredible India अभियान के हिस्से के रूप में ग्रामीण पर्यटन
राज्य सरकारों की भूमिका
केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, पर्यटन स्थलों और उत्पादों का विकास एवं प्रचार संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों की जिम्मेदारी है।
राज्यों के कार्य:
1. प्रस्ताव तैयार करना:
- पर्यटन मंत्रालय के टेम्पलेट के अनुसार
- स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन
- उपयुक्त स्थान चिन्हित करना
2. कार्यान्वयन:
- होमस्टे निर्माण की निगरानी
- गुणवत्ता नियंत्रण
- समय पर पूर्णता सुनिश्चित करना
3. समन्वय:
- स्थानीय समुदायों के साथ
- पर्यटन उद्योग के साथ
- अन्य सरकारी विभागों के साथ
4. प्रचार और मार्केटिंग:
- राज्य स्तर पर प्रचार
- पर्यटन मेले आयोजित करना
- विदेशी और घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करना
ग्रामीण और आदिवासी पर्यटन के लाभ
यह महत्वाकांक्षी पहल कई स्तरों पर लाभ प्रदान करेगी:
स्थानीय समुदायों के लिए:
- प्रत्यक्ष आय वृद्धि
- रोजगार सृजन
- कौशल विकास
- महिला सशक्तीकरण
- युवाओं के लिए अवसर
पर्यटकों के लिए:
- प्रामाणिक सांस्कृतिक अनुभव
- प्रकृति के करीब रहने का अवसर
- पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव
- स्थानीय भोजन और शिल्प
- शांत और प्रदूषण मुक्त वातावरण
राष्ट्रीय विकास के लिए:
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
- आदिवासी क्षेत्रों का विकास
- सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- पर्यावरण संरक्षण
- समावेशी विकास
चुनौतियां और समाधान
ग्रामीण पर्यटन विकास में कुछ चुनौतियां भी हैं:
चुनौतियां:
- बुनियादी ढांचे की कमी
- कनेक्टिविटी मुद्दे
- जागरूकता की कमी
- कौशल और प्रशिक्षण की आवश्यकता
- मार्केटिंग और प्रचार
सरकारी समाधान:
- वित्तीय सहायता प्रदान करना
- प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना
- डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना
- राज्यों के साथ समन्वय
- व्यापक प्रचार अभियान
भविष्य की दृष्टि
यह पहल भारत में ग्रामीण और आदिवासी पर्यटन के लिए एक नई शुरुआत है। आने वाले वर्षों में:
- हजारों होमस्टे विकसित होंगे
- लाखों पर्यटक ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करेंगे
- स्थानीय समुदायों की आय में वृद्धि होगी
- भारत की सांस्कृतिक विविधता विश्व स्तर पर प्रमोट होगी
- टिकाऊ पर्यटन का एक मॉडल स्थापित होगा
मुख्य बातें (Key Points)
• PM-JUGA के तहत 1000 आदिवासी होमस्टे विकसित होंगे
• नए कमरे निर्माण के लिए ₹5 लाख प्रति यूनिट वित्तीय सहायता
• मौजूदा कमरों के नवीनीकरण के लिए ₹3 लाख तक सहायता
• होमस्टे मालिकों के लिए व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम
• स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास
• इको-पर्यटन और टिकाऊ पर्यटन के लिए राष्ट्रीय रणनीतियां
• Travel for LiFE कार्यक्रम शुरू
• डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक प्रचार








