Ram Mandir Attack से जुड़ी एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। हरियाणा के फरीदाबाद जिले की नीमका जेल में बंद आतंकी अब्दुल रहमान की जेल के भीतर हत्या कर दी गई है। वही आतंकी, जिसे अयोध्या स्थित राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जेल में अन्य कैदियों के साथ हुई झड़प के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
यह घटना इसलिए भी बेहद गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि अब्दुल रहमान उस साजिश का अहम कड़ी था, जिसने राम मंदिर को निशाना बनाने का पूरा प्लान तैयार किया था। उसकी मौत के साथ ही कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
नीमका जेल में कैसे हुई हत्या
जानकारी के मुताबिक, अब्दुल रहमान हरियाणा के फरीदाबाद जिले की नीमका जेल में बंद था। जेल प्रशासन के अनुसार, जेल के अंदर अन्य कैदियों के साथ उसकी किसी बात को लेकर झड़प हुई। यह झड़प इतनी बढ़ गई कि इसी दौरान उसकी हत्या कर दी गई।
घटना के बाद जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और जेल में बंद अन्य कैदियों से पूछताछ शुरू कर दी है। यह भी जांच की जा रही है कि झगड़ा अचानक हुआ या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी।
राम मंदिर पर हमले की साजिश
अब्दुल रहमान वही आतंकी था, जिसने अयोध्या के राम मंदिर को निशाना बनाने का लक्ष्य तय किया था। वह साजिश के तहत अयोध्या तक पहुंच चुका था और मंदिर पर हमला करने की योजना बना रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को मुखबिर के जरिए इस साजिश की जानकारी मिली थी।
इसी सूचना के आधार पर गुजरात और पलवल की एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 2 मार्च को उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे फरीदाबाद की नीमका जेल में रखा गया था, जहां वह न्यायिक हिरासत में था।
गिरफ्तारी के वक्त क्या मिला था
पूछताछ के दौरान अब्दुल रहमान से कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई थीं। उसके पास से भारी मात्रा में नकदी और हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए थे। उसने यह भी स्वीकार किया था कि उसे राम मंदिर पर हमले के लिए पैसे दिए गए थे और यह रकम उसे अयोध्या में ही दी गई थी।
बताया गया कि यह रकम दो अलग-अलग किस्तों में दी गई थी। इसके अलावा वह टेलीग्राम ऐप के जरिए अपने हैंडलर्स के संपर्क में था। हालांकि, अब तक उसने यह खुलासा नहीं किया था कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कौन है और असली हैंडलर कौन था।
हत्या से उठे बड़े सवाल
अब्दुल रहमान की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जेल जैसी सुरक्षित जगह पर एक आतंकी की हत्या कैसे हो गई। सुरक्षा मानकों के बावजूद यह घटना होना जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़े करती है।
इसके साथ ही जांच एजेंसियों के सामने अब यह चिंता भी है कि साजिश के असली सूत्रधार तक पहुंचने से पहले ही एक अहम आरोपी की मौत हो गई। वह कई बड़े खुलासे कर सकता था, जो अब अधूरे रह गए हैं।
पुलिस और एजेंसियां अलर्ट
घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जेल प्रशासन, स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियां मिलकर मामले की जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं अब्दुल रहमान की हत्या जानबूझकर तो नहीं कराई गई, ताकि वह किसी बड़े नाम का खुलासा न कर सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला
राम मंदिर जैसे संवेदनशील स्थल पर हमले की साजिश और फिर उस साजिश के आरोपी की जेल में हत्या, दोनों ही घटनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए यह मामला बेहद अहम हो गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- फरीदाबाद की नीमका जेल में आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या
- राम मंदिर पर हमले की साजिश में गिरफ्तार हुआ था आरोपी
- अन्य कैदियों के साथ झगड़े के दौरान हुई मौत
- हैंडलर और मास्टरमाइंड से जुड़े खुलासे अधूरे रह गए








