Rahul Gandhi Lok Sabha Speech: संसद के बजट सत्र 2026 में सोमवार को लोकसभा में ऐसा हंगामा देखने को मिला जिसने पूरे सदन को ठप कर दिया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब का हवाला देकर चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाया। जैसे ही राहुल गांधी ने किताब दिखाई, सदन में सत्ता पक्ष के सांसद भड़क उठे और पूरे हाउस में हंगामा शुरू हो गया।
स्पीकर की व्यवस्था को नहीं माने राहुल गांधी
लोकसभा अध्यक्ष ने जब राहुल गांधी को किताब के संदर्भ में बोलने से रोकने की कोशिश की और इस विषय पर व्यवस्था दी, तो राहुल गांधी ने साफ कहा – “सर, मुझे बोलने दीजिए। ये जो किताब है ये नारायण जी की किताब है।” स्पीकर ने राहुल गांधी से अपेक्षा जताई कि वे सदन की गरिमा को बनाए रखें और नियम-प्रक्रियाओं का पालन करें।
लेकिन राहुल गांधी ने कहा, “मेरे हाथ में एक मैगजीन है। उस मैगजीन में आर्टिकल है। उसको मैं कोट कर रहा हूं।” इसके बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया।
सत्ता पक्ष का आरोप: किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई
जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख की किताब का जिक्र किया, तो सत्ता पक्ष के सांसदों ने तुरंत आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि यह किताब अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। एक मंत्री ने कहा, “मैं कॉन्फिडेंस के साथ कहना चाहता हूं, पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई।”
इस पर कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल भी बीच में आ गए और सत्ता पक्ष के साथ तीखी बहस में उलझ गए। सदन में “आप बोलिए”, “आप उत्तर दीजिए” की आवाजें गूंजने लगीं।
स्पीकर ने कहा: सदन नियमों से चलता है
लोकसभा स्पीकर ने राहुल गांधी को समझाते हुए कहा, “सदन में अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सदन में नियम, प्रक्रिया, परंपराएं भी होती हैं। इस सदन का उपयोग बोलने के लिए कोई नहीं रोक रहा, न मैं रोक रहा हूं। लेकिन सदन नियम, प्रक्रियाओं, परंपराओं से चलता है। इसलिए नियम, प्रक्रिया, परंपराओं से बोलें।”
स्पीकर ने यह भी कहा, “मैंने जब इस विषय पर व्यवस्था दे दी है, तो मैं माननीय प्रतिपक्ष के नेता से अपेक्षा करता हूं कि वह सदन की गरिमा को रखेंगे।”
राहुल गांधी ने कहा: मुझे बोलने दो
राहुल गांधी ने स्पीकर की व्यवस्था के बावजूद अपनी बात जारी रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “सर, आधा घंटा चला गया। मैं केवल एक मैगजीन से कोट कर रहा हूं।” इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहा, “नो, नो। आप नहीं बोल सकते। दिस इज़ एटीट्यूड।”
पूरे सदन में “प्लीज, प्लीज” की आवाजें गूंजने लगीं और स्थिति हंसी और व्यंग्य के बीच तनावपूर्ण हो गई।
सत्ता पक्ष: राहुल सदन को गुमराह कर रहे हैं
एक सांसद ने अध्यक्ष महोदय से कहा, “ये लीडर ऑफ ओपोजिशन सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं, इन्हें किसी भी सूरत में यह बात बोलने की यहां पर इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।”
एक अन्य सदस्य ने कहा कि अगर राहुल गांधी अखबार की कटिंग्स भी दिखाते तो उन्हें रोका जाता। स्पीकर ने कहा, “आप किसी को बोलिए, आपका सदन है। सबको बोलने की इजाजत है, लेकिन सदन नियमों, प्रक्रियाओं, परंपराओं से चलता है।”
पूर्व राष्ट्रपति के अभिभाषण के दस्तावेज का भी जिक्र
इस बहस के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि राहुल गांधी ने इससे पहले पुराने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दस्तावेज भी पेश किए थे। स्पीकर ने कहा, “उन्होंने अगर कोई बात उठाई थी तो उन्होंने यह दस्तावेज दिए थे – पुराने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दस्तावेज पर विषय उठाया था।”
देशभक्ति और चीन का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में देशभक्ति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “आप देशभक्ति की और बात बताएं।” उनका इशारा चीनी घुसपैठ के मुद्दे की ओर था, जिसे वे पूर्व सेना प्रमुख की किताब के हवाले से उठाना चाहते थे।
स्पीकर: आपसे ऐसी अपेक्षा की जाती है
स्पीकर ने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आपको फिर कह रहा हूं कि आप नियम, प्रक्रियाओं से बोलें। और मुझे आशा है कि आप प्रतिपक्ष के नेता हैं, ऐसी आपसे अपेक्षा की जाती है।”
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव कितना गहरा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी बात संसद में ही रखेंगे, चाहे सदन की प्रक्रिया में कितनी भी बाधा क्यों न आए।
सदन में अनुशासन बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
यह पूरा प्रकरण संसदीय लोकतंत्र में दो महत्वपूर्ण सिद्धांतों के बीच टकराव को दर्शाता है। एक तरफ विपक्ष की अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, तो दूसरी तरफ संसदीय नियमों और परंपराओं का पालन। राहुल गांधी का यह रवैया दर्शाता है कि वे किसी भी कीमत पर चीन के मुद्दे को उठाना चाहते हैं, भले ही उन्हें इसके लिए सदन के नियमों से टकराना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही को और भी तनावपूर्ण बना सकती है। बजट सत्र के बाकी दिनों में इस मुद्दे पर और हंगामा होने की संभावना है।
मुख्य बातें (Key Points)
• राहुल गांधी ने लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब का हवाला देकर चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाया
• स्पीकर की व्यवस्था के बावजूद राहुल गांधी ने अपनी बात जारी रखने की कोशिश की
• सत्ता पक्ष ने दावा किया कि यह किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है
• पूरे सदन में जमकर हंगामा हुआ और नियम-प्रक्रियाओं को लेकर तीखी बहस छिड़ गई
• राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वे अपनी बात केवल संसद में ही रखेंगे








