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शर्म नहीं आती डील पर! Epstein Files पर राहुल ने घेरा हरदीप पुरी को

लोकसभा में बजट पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने ट्रेड डील, डाटा और एप्स्टीन फाइल्स को लेकर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 11 फ़रवरी 2026
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rahul gandhi
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Rahul Gandhi Budget Speech: लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार को चारों तरफ से घेर लिया। अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील से लेकर एप्स्टीन फाइल्स तक — राहुल ने एक के बाद एक ऐसे मुद्दे उठाए कि सत्ता पक्ष की बेचैनी साफ दिखाई दी। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि मोदी सरकार ने भारत को बेच दिया है और अगर प्रधानमंत्री पर कोई दबाव नहीं होता तो हिंदुस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री अमेरिका से ऐसी डील नहीं करता।

संसद में राहुल गांधी का यह भाषण कई मायनों में खास रहा। सत्ता पक्ष के सांसदों और मंत्रियों की लगातार टोकाटोकी, स्पीकर की तरफ से बार-बार रोके जाने और तमाम संसदीय अड़चनों के बावजूद राहुल गांधी ने अपनी बात कहने का रास्ता निकाल ही लिया। उन्होंने न सिर्फ ट्रेड डील की धज्जियां उड़ाईं बल्कि एप्स्टीन फाइल्स का जिक्र करके संसद में एक ऐसी चुप्पी तोड़ दी जिसे मीडिया भी तोड़ने से बच रहा था।

मार्शल आर्ट से शुरू हुई बात, पहुंची ट्रेड डील तक

राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत बेहद दिलचस्प अंदाज में की। उन्होंने मार्शल आर्ट्स का उदाहरण देते हुए समझाया कि किसी भी लड़ाई की शुरुआत ग्रिप से होती है। पहले आप अपने प्रतिद्वंद्वी पर पकड़ बनाते हैं, फिर चोक में जाते हैं और जब चोक लग जाता है तो सामने वाले की आंखों में डर दिखने लगता है। वह रेजिस्ट करता है, दो-तीन बार छूटने की कोशिश करता है, लेकिन आखिरकार उसे सरेंडर करना पड़ता है और वह टैप कर देता है।

राहुल ने कहा कि यही ग्रिप राजनीति में भी होती है, बिजनेस में भी होती है। फर्क बस इतना है कि जूजित्सु में ग्रिप दिखती है — हाथ कहां है, चोक कैसे लग रहा है — लेकिन राजनीति में यह नहीं दिखती। किसने किस पर ग्रिप ले रखी है, चोक कहां लग रहा है, यह छुपा रहता है।

इस रूपक के जरिए राहुल गांधी दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच की ट्रेड डील पर निशाना साध रहे थे। उनका इशारा साफ था कि ट्रंप ने मोदी की गर्दन पर ग्रिप ले रखी है और इसी दबाव में भारत ने ऐसी डील साइन कर दी जो देश के हित में नहीं है।

“आपने भारत माता को बेच दिया, शर्म नहीं आती?”

संसद में जब राहुल गांधी ने ट्रेड डील पर अपनी बात रखनी शुरू की तो माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष की ओर से लगातार आपत्तियां उठाई जा रही थीं। एक जगह राहुल ने जो शब्द इस्तेमाल किया उस पर सत्ता पक्ष ने एतराज जताया और स्पीकर ने उसे कार्यवाही से हटा दिया। लेकिन अंग्रेजी के ‘shame’ और ‘ashamed’ शब्दों को संसदीय मान लिया गया।

जैसे ही राहुल गांधी को यह इजाजत मिली, उन्होंने पूरी ताकत से हमला बोला — “You have sold India. Are you not ashamed of selling India? Do you have no shame? You have sold our mother — Bharat Mata — Do you have no shame?” राहुल ने कहा कि उन्हें मालूम है कि सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री मोदी भारत को नहीं बेचते। उन्होंने यह इसलिए किया क्योंकि उन पर चोक लगा हुआ है, उनकी गर्दन पकड़ी हुई है।

राहुल ने कहा कि जब चोक लगता है तो सामने वाले की आंखों में डर दिखता है — और प्रधानमंत्री मोदी की आंखों में भी वही डर दिख रहा है।

डाटा है असली ताकत, बजट में इसका कोई जिक्र नहीं

राहुल गांधी ने बजट में AI की चर्चा पर सवाल उठाते हुए कहा कि AI का पेट्रोल डाटा है। अगर आपके पास AI है लेकिन डाटा नहीं है तो आपके पास कुछ नहीं है। उन्होंने पूछा कि दुनिया में सबसे बड़े डाटा पूल कहां हैं? एक भारत के पास और दूसरा चीन के पास। दोनों देशों की आबादी करीब 1.4 अरब है, लेकिन भारत में ज्यादा आजादी है, लोग ज्यादा डायनामिक काम करते हैं, इसलिए भारत का डाटा और भी ज्यादा वैल्यूएबल है।

राहुल ने कहा कि बजट में बढ़ते भू-राजनीतिक टकरावों और उनसे निपटने की रणनीति के बारे में कुछ भी नहीं है। यह बजट पिछले बजटों की तरह ही एक साधारण बजट है जो इन गंभीर चुनौतियों की पहचान तो करता है लेकिन उनका कोई समाधान नहीं देता। डाटा, अनाज और एनर्जी — ये तीनों चीजें आज दुनिया में हथियार की तरह इस्तेमाल हो रही हैं और भारत को इन पर अपनी रणनीति बनानी चाहिए थी।

“इंडिया अलायंस होता तो बराबरी से बात करते”

राहुल गांधी ने बताया कि अगर इंडिया अलायंस की सरकार होती और वह ट्रंप के साथ बातचीत कर रही होती तो सबसे पहले कहती कि प्रेसिडेंट ट्रंप, इस समीकरण में सबसे महत्वपूर्ण चीज भारतीय डाटा है। आप अपने डॉलर की रक्षा करना चाहते हैं, हम आपके दोस्त हैं, हम आपकी मदद करना चाहते हैं, लेकिन याद रखिए कि आपके डॉलर की रक्षा करने वाली सबसे बड़ी संपत्ति भारत के लोगों के पास है।

दूसरी बात, राहुल ने कहा कि अगर ट्रंप को इस डाटा तक पहुंच चाहिए तो उन्हें भारत से बराबरी के स्तर पर बात करनी होगी, न कि ऐसे जैसे भारत उनका नौकर हो। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा — “You are not going to talk to us as if we are your servants.”

ट्रेड डील में भारत ने क्या-क्या गंवाया?

राहुल गांधी ने डील के मसौदे का हवाला देते हुए बताया कि मोदी सरकार ने भारत के सबसे कीमती एसेट — डाटा — को अमेरिका के हवाले कर दिया। उन्होंने पांच बड़े नुकसान गिनाए:

पहला — भारत ने अपने डिजिटल ट्रेड रूल्स पर से कंट्रोल छोड़ दिया। दूसरा — डाटा लोकलाइजेशन की कोई जरूरत नहीं रखी गई, यानी भारतीयों का डाटा भारत में रखने की बाध्यता खत्म। तीसरा — अमेरिका को फ्री डाटा फ्लो की इजाजत दे दी गई। चौथा — डिजिटल टैक्स पर लिमिट लगा दी गई। और पांचवां — किसी भी सोर्स कोड को डिस्क्लोज करने की जरूरत नहीं रखी गई। इसके ऊपर से बड़ी टेक कंपनियों को 20 साल की टैक्स हॉलिडे दे दी गई।

राहुल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वित्त मंत्री मुस्कुरा रही हैं, उन्हें मुस्कुराना बहुत पसंद है — लेकिन यह मुस्कुराने का मौका नहीं है। यह भारत की 21वीं सदी की सबसे बड़ी ताकत को गंवा देने का मामला है।

टेक्सटाइल सेक्टर पर भी गहरी चोट

राहुल गांधी ने ट्रेड डील में टेक्सटाइल सेक्टर को हुए नुकसान पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बांग्लादेश ने भारत से बेहतर डील की है। बांग्लादेश जीरो टैरिफ पर अपने गारमेंट्स का निर्यात करेगा जबकि भारत पर 18% टैरिफ लगेगा। राहुल ने कहा कि भारत का टैरिफ 3% से बढ़कर 18% हो गया है जबकि अमेरिका का टैरिफ 16% से घटकर जीरो पर आ गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री ने पहले कभी ऐसा नहीं किया और न ही कोई आगे कभी करेगा।

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इसके अलावा राहुल ने कहा कि भारत किससे तेल खरीदेगा और किससे नहीं, इसका फैसला भी अब अमेरिका कर रहा है, भारत के प्रधानमंत्री नहीं। यह बात भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक है।

एप्स्टीन फाइल्स पर संसद में तोड़ी चुप्पी

ट्रेड डील पर अपनी बात खत्म करते हुए राहुल गांधी जैसे ही जेफ्री एप्स्टीन फाइल्स पर आए, संसद में हंगामा मच गया। स्पीकर के आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने इसे कार्यवाही का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया क्योंकि राहुल गांधी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम ले रहे थे।

लेकिन राहुल ने संसदीय कलाबाजी का शानदार नमूना पेश किया। उन्होंने बिना सीधे नाम लिए कहा कि एक बिजनेसमैन है जो जेल में क्यों नहीं है — और वह इसलिए जेल में नहीं है क्योंकि उसका नाम एप्स्टीन फाइल्स में है। भले ही यह हिस्सा कार्यवाही का अंग नहीं बना, लेकिन सदन में मौजूद सैकड़ों सांसदों और लाइव टीवी पर देख रहे करोड़ों लोगों ने यह सब सुन लिया।

संसदीय कार्य मंत्री की चूक, राहुल को मिला मौका

इस बहस के बीच एक दिलचस्प मोड़ आया। संसदीय कार्य मंत्री ने कह दिया कि राहुल गांधी जो भी आरोप लगा रहे हैं उन्हें ऑथेंटिकेट (प्रमाणित) करना होगा। बस राहुल को मौका मिल गया। उन्होंने तुरंत कहा — “I will authenticate right now. I have got it.” यानी वे तैयार थे अपने सारे दावों के सबूत सदन के सामने रखने के लिए।

स्पीकर को लगा कि मामला उलझ रहा है। संसदीय कार्य मंत्री ने उत्साह में चूक कर दी थी। तुरंत पीछे हटते हुए कहा गया कि चेयर की तरफ से ऑथेंटिकेट करने के लिए नहीं कहा गया है, आप अपना भाषण पूरा कीजिए। स्पीकर जगदंबिका पाल ने इस नाजुक मोड़ पर मामला संभाला, लेकिन तब तक राहुल गांधी अपनी बात कह चुके थे।

हरदीप पुरी को आना पड़ा मीडिया के सामने

राहुल गांधी की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि भले ही वे सदन के भीतर हरदीप सिंह पुरी का सीधे नाम नहीं ले पाए, लेकिन उनकी वजह से पेट्रोलियम मंत्री पुरी को मीडिया के सामने आकर सफाई देनी पड़ी। यह वही हरदीप सिंह पुरी हैं जो रूस से तेल खरीदने जैसे बड़े मुद्दों पर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से बचते रहे।

हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया के सामने आकर कहा कि एप्स्टीन से जुड़ी जो भी जानकारी है वह पहले से पब्लिक डोमेन में है। उन्होंने बताया कि वे 2009 से 2017 तक करीब 8 साल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रहे। इस दौरान इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) और ICM के डेलिगेशन के हिस्से के रूप में उनकी एप्स्टीन से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि 30 लाख ईमेल्स रिलीज हुई हैं और उनमें कुछ रेफरेंस हैं।

लेकिन यहां सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह वाकई सफाई है? राहुल गांधी ने इशारा किया कि ब्रिटेन में भी इसी तरह की जानकारी पब्लिक डोमेन में थी लेबर पार्टी के सांसद पीटर मेंडलसन के बारे में — और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार इसी वजह से खतरे में है।

“पाकिस्तान के बराबर समझा जाना स्वीकार नहीं”

राहुल गांधी ने एक और मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा कि इंडिया अलायंस की सरकार होती तो हम बराबरी से बात करने जाते। हम कभी यह स्वीकार नहीं करते कि भारत को पाकिस्तान के बराबर समझा जाए। अगर ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ के साथ नाश्ता किया तो हमें भी उस पर कुछ कहना पड़ता। यह टिप्पणी भारत की कूटनीतिक हैसियत पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।

लोकसभा के बाहर भी जारी रहा हमला

लोकसभा से बाहर आकर राहुल गांधी ने पत्रकारों से खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि एप्स्टीन फाइल्स में हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम हैं। गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे केस में समन जारी हुआ है जिस पर भारत सरकार ने पिछले 18 महीनों से कोई जवाब नहीं दिया। राहुल का स्पष्ट आरोप था कि भारत के प्रधानमंत्री पर सीधा दबाव है और बिना किसी दबाव के हिंदुस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री देश के किसानों, डाटा, एनर्जी और डिफेंस के मामले पर ऐसा समझौता नहीं करता।

विश्लेषण: विपक्ष की भूमिका और संसदीय राजनीति

राहुल गांधी का यह भाषण 2024 के बाद की संसदीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 2014 से 2024 के बीच लोकसभा में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं था, जिसकी वजह से देश में यह धारणा बन गई थी कि विपक्ष कमजोर है और संसदीय राजनीति अपनी प्रासंगिकता खो रही है। लेकिन अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी जिस तरह से अपनी भूमिका निभा रहे हैं, वह इस धारणा को चुनौती दे रही है।

सबसे अहम बात यह है कि जब मीडिया का बड़ा हिस्सा इन मुद्दों को उठाने से बचता है, तब संसद ही वह मंच बचती है जहां से ये सवाल देश के सामने रखे जा सकते हैं। राहुल गांधी ने संसदीय नियमों की सीमाओं के भीतर रहते हुए, सत्ता पक्ष की तमाम बाधाओं को पार करते हुए, वह बात कही जो कहने की जरूरत थी। भले ही कार्यवाही से हटा दी गई हो, लेकिन देश ने सुन ली।

यह भाषण इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में विपक्ष की मजबूत आवाज कितनी जरूरी है — खासकर तब जब कूटनीतिक फैसलों पर पारदर्शिता न हो, व्यापार समझौतों में देश के हितों की अनदेखी हो रही हो, और संवेदनशील मुद्दों पर सरकार चुप्पी साधे बैठी हो।

जानें पूरा मामला

अमेरिका के साथ भारत की हालिया ट्रेड डील और जेफ्री एप्स्टीन फाइल्स — ये दो अलग-अलग मुद्दे हैं जो राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा के दौरान एक साथ उठाए। ट्रेड डील को लेकर विपक्ष का आरोप है कि भारत ने अपने डिजिटल डाटा, टेक्सटाइल सेक्टर और ऊर्जा नीति पर अमेरिका को बेजा छूट दी है। वहीं एप्स्टीन फाइल्स वो दस्तावेज हैं जो अमेरिका में रिलीज हुए हैं और जिनमें दुनियाभर की कई हस्तियों के नाम सामने आए हैं। भारत से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम इन फाइल्स में आने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसके साथ ही गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में जारी समन का मामला भी जुड़ा हुआ है जिस पर भारत सरकार 18 महीनों से मौन है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • ट्रेड डील पर हमला: राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ डील में भारत का डाटा, डिजिटल कंट्रोल और टेक्सटाइल सेक्टर गंवा दिया — भारत का टैरिफ 3% से 18% हुआ जबकि अमेरिका का 16% से जीरो।
  • एप्स्टीन फाइल्स का जिक्र: संसद में बार-बार रोके जाने के बावजूद राहुल ने एप्स्टीन फाइल्स में हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम का जिक्र किया, जिससे पुरी को मीडिया के सामने सफाई देनी पड़ी।
  • डाटा है असली ताकत: राहुल ने कहा कि AI का पेट्रोल डाटा है और भारत का 1.4 अरब लोगों का डाटा पूल दुनिया का सबसे बड़ा एसेट है, लेकिन बजट में इसकी कोई रणनीति नहीं है।
  • विपक्ष का विकल्प: राहुल ने बताया कि इंडिया अलायंस की सरकार होती तो अमेरिका से बराबरी के स्तर पर बात करती और भारत को पाकिस्तान के बराबर समझे जाना कभी स्वीकार नहीं करती।
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