Raghav Chadha इन दिनों कई विवादों के केंद्र में हैं। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने पुराने ट्वीट्स डिलीट किए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की आलोचना की गई थी। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि वे अब केवल हल्के मुद्दे उठाते हैं और पार्टी की मुश्किलों में खामोश रहते हैं।
आम आदमी पार्टी के भीतर यह विवाद तब और गहरा गया जब भगवंत मान, अतिषी और संजय सिंह जैसे बड़े नेताओं ने भी राघव चड्ढा के खिलाफ आवाज उठाई। सवाल यह है कि क्या ये आरोप सच हैं या फिर यह राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है?
Deleted Tweets का सच: क्या वाकई राघव चड्ढा ने ट्वीट्स मिटाए?
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा की एक्स (पूर्व में Twitter) फीड में “मोदी” शब्द सर्च करने पर सिर्फ दो ट्वीट्स मिलते हैं और दोनों में प्रधानमंत्री की तारीफ है। बाकी सभी आलोचनात्मक ट्वीट्स गायब हैं।
पहला मामला 10 अगस्त 2023 का है। उस दिन राघव चड्ढा ने भाजपा पर हमला किया था। उनका आरोप था कि एक बिल के लिए उन पर फर्जी हस्ताक्षर जोड़ने का झूठा आरोप लगाया गया। उन्होंने लिखा था कि “वे मेरी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।” यह ट्वीट अब उपलब्ध नहीं है।
दूसरा मामला दिसंबर 2024 का है। संजय सिंह ने एक ट्वीट में राघव चड्ढा के ऑफिस पर “जानलेवा हमले” का जिक्र किया था। राघव चड्ढा ने भी उस वक्त ट्वीट किया था कि “भाजपा गुंडों ने दिल्ली जल बोर्ड मुख्यालय पर हमला किया और मेरा पूरा ऑफिस तोड़-फोड़ दिया गया।” एक्स के एआई टूल ‘ग्रॉक’ और कई न्यूज आर्टिकल्स इस बात की पुष्टि करते हैं। लेकिन यह ट्वीट भी अब उनकी फीड से गायब है।
दिलचस्प बात यह है कि राघव चड्ढा ने अभी तक इस आरोप का कोई सफाई नहीं दी है। जबकि उन्होंने अन्य सभी आरोपों का जवाब दे दिया है।
संसदीय रिकॉर्ड: कैसा रहा राघव चड्ढा का प्रदर्शन?
साल 2022 से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का संसदीय रिकॉर्ड देखें तो वह प्रभावशाली नजर आता है। उनकी उपस्थिति 84% रही है, जो राज्य औसत (76%) और राष्ट्रीय औसत (79%) दोनों से बेहतर है।
उन्होंने 344 सवाल पूछे हैं, जो राष्ट्रीय औसत (198) से काफी ज्यादा है। हालांकि बहसों में उनकी भागीदारी 55 रही, जो राष्ट्रीय औसत (128) से कम है। बजट सेशन 2024 में उनकी उपस्थिति 96% थी, जबकि विंटर सेशन 2022 में यह 100% रही। सबसे कम उपस्थिति बजट सेशन 2024 में दर्ज की गई, जो उनकी शादी के ठीक बाद का सत्र था।
क्या राघव चड्ढा सरकार की आलोचना करते हैं?
आरोप है कि राघव चड्ढा अब सरकार और भाजपा की आलोचना नहीं करते। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है।
बजट पर अपने भाषण में उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, “देश का आम आदमी बजट भाषण इसलिए सुनता है कि टैक्स स्लैब में कोई राहत मिलेगी या नहीं। लेकिन इस बार कुछ नहीं मिला।”
उन्होंने यह भी कहा, “सरकारें मिडिल क्लास को एक आत्माहीन कंकाल समझती हैं, जिसकी हड्डियों पर चढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाना चाहती हैं।” यह “5 ट्रिलियन इकोनॉमी” का दावा अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेता करते हैं। तो यह सीधे तौर पर सरकार पर हमला था।
केवल ‘सॉफ्ट इशूज’ उठाते हैं राघव चड्ढा?
एक आरोप यह भी है कि राघव चड्ढा केवल समोसे या फ्लाइट जैसे हल्के मुद्दे उठाते हैं, जबकि गंभीर मुद्दों से दूर रहते हैं।
PRS इंडिया के डेटा के अनुसार, राघव चड्ढा ने कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। इनमें फूड इन्फ्लेशन, पंजाब में गेहूं और धान की खरीद, नकली करेंसी नोट्स की तस्करी जैसे मुद्दे शामिल हैं।
उन्होंने पंजाब के मालवा क्षेत्र से बीकानेर जाने वाली ट्रेन का जिक्र किया, जिसमें कैंसर मरीज यात्रा करते हैं। उन्होंने किसानों के लिए न्यूनतम आरक्षित मूल्य (Minimum Reserve Price) की मांग की।
हां, इनमें कुछ मुद्दे ऐसे भी थे जिनसे हर आम आदमी जुड़ नहीं पाता, लेकिन यह कहना कि वे केवल “बेकार मुद्दे” उठाते हैं, पूरी तरह सही नहीं है।
गिग वर्कर्स के मुद्दे पर क्रेडिट लेने का विवाद
राघव चड्ढा पर एक बड़ा आरोप यह है कि वे पहले से लागू योजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश करते हैं।
गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी रूल्स का मामला इसका उदाहरण है। राघव चड्ढा ने एक ट्वीट में लिखा था कि सरकार ने गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को मान्यता देने के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं और यह “हमारी जीत” है।
बहुत से लोगों ने इस ट्वीट को रिपोर्ट किया और एक्स पर इसे “मिसलीडिंग” टैग किया गया। कारण यह था कि सोशल सिक्योरिटी कोड सितंबर 2020 में ही पास हो चुका था। इसे लागू नवंबर 2025 में किया गया।
राघव चड्ढा ने दिसंबर 2025 में यह मुद्दा उठाया था, यानी कानून पास होने के काफी बाद। उनकी सफाई थी कि “पार्लियामेंट कानून पास करती है, फिर सरकार नियम बनाती है। मैं ग्राउंड वर्क कर रहा हूं ताकि ये नियम जमीन पर भी ठीक से लागू हों।”
हालांकि यह सफाई बहुत ठोस नहीं लगी और यह मुद्दा काफी वायरल हुआ।
पंजाब के मुद्दे नहीं उठाते?
आरोप है कि राघव चड्ढा पंजाब की समस्याओं पर खामोश रहते हैं। लेकिन उन्होंने एक पूरी रील बनाई जिसमें पंजाब के किसानों के लिए कृषि मूल्य निर्धारण फॉर्मूले में बदलाव की मांग की।
उन्होंने भटिंडा से बीकानेर जाने वाली ट्रेन का भावनात्मक जिक्र किया, जिसमें व्यापारी या श्रद्धालु नहीं, बल्कि कैंसर मरीज यात्रा करते हैं। यह पंजाब के मालवा क्षेत्र में कैंसर की गंभीर समस्या को उजागर करता है।
पंजाब में गेहूं और धान की खरीद का मुद्दा भी उन्होंने उठाया है। तो यह कहना कि वे पंजाब के मुद्दे नहीं उठाते, पूरी तरह सही नहीं है।
पार्टी के साथ क्यों नहीं खड़े होते?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब पार्टी पर संकट आया तो राघव चड्ढा चुप रहे। जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए, जब दिल्ली में पार्टी की बुरी हार हुई, और जब केजरीवाल को 2026 में क्लीन चिट मिली – तीनों मौकों पर राघव चड्ढा ने कोई मजबूत बयान नहीं दिया।
दूसरा आरोप है कि जब विपक्ष वॉकआउट करता है तो वे साथ नहीं होते। हालांकि राघव चड्ढा ने इसका जवाब दिया है कि “सभी कार्यवाही रिकॉर्ड होती है, दिखा दो कहां मैंने वॉकआउट नहीं किया।”
लेकिन हालिया फुटेज देखने से पता चलता है कि ओबीसी कोटा, इंडिया-यूएस डील और इलेक्टोरल रिफॉर्म जैसे मुद्दों पर विपक्ष के प्रदर्श्न में आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता नजर नहीं आए।
हालांकि एक बात स्पष्ट है – जब भी विपक्ष खड़ा होता है, तो संजय सिंह का चेहरा जरूर दिखता है। वे पार्टी के राज्यसभा में नेता हैं और उन्हें CAPF बिल पर वॉकआउट करने और 2023 में मणिपुर मुद्दे पर सस्पेंड होने का रिकॉर्ड है।
उस वक्त राघव चड्ढा ने संजय सिंह का समर्थन किया था और पूछा था, “क्या मणिपुर पर चर्चा की मांग करना अपराध है?”
Reel Politician का आरोप कितना सही?
राघव चड्ढा पर आरोप है कि वे “रील पॉलिटिशियन” हैं, यानी केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं।
लेकिन सोशल मीडिया आज राजनीति का जरूरी हिस्सा है। अगर कोई नेता युवाओं से जुड़ सकता है और उन्हें प्रेरित कर सकता है, तो इसमें गलत क्या है?
राघव चड्ढा की सबसे ज्यादा देखी गई रील पर 156 मिलियन व्यूज हैं। उसमें वे सिर्फ संसद में वॉक करते हुए अंदर जा रहे हैं। यह उनकी लोकप्रियता दर्शाता है।
अगर उनमें यह पावर है तो इसमें बुरा क्या है? यह आलोचना भी उचित नहीं लगती।
आम आदमी पार्टी में अन्य सांसदों की भूमिका
एक सवाल यह भी उठता है कि आम आदमी पार्टी के अन्य सांसद कहां हैं? विक्रमजीत सिंह साहनी, बलबीर सिंह सीजेवाल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल और रजिंदर गुप्ता – ये सभी कितने दिखते हैं?
अगर राघव चड्ढा की आलोचना हो रही है, तो यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए कि बाकी सांसद क्या कर रहे हैं।
राघव चड्ढा का भविष्य: तीन षड्यंत्र सिद्धांत
सोशल मीडिया पर राघव चड्ढा के भविष्य को लेकर तीन बड़ी अटकलें चल रही हैं:
पहला सिद्धांत: वे भाजपा में शामिल होंगे। कारण – उन्होंने भाजपा विरोधी ट्वीट्स डिलीट किए, अब खुलकर सरकार पर हमला नहीं करते, और पार्टी की मुश्किलों में खामोश रहते हैं।
दूसरा सिद्धांत: वे पंजाब में कांग्रेस में शामिल होंगे ताकि आने वाले चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया जा सके। हालांकि राजनीतिक जानकार इस पर विश्वास नहीं करते।
तीसरा सिद्धांत: वे अपनी खुद की पार्टी लॉन्च करेंगे। लेकिन यह व्यावहारिक नहीं लगता। रील्स पर व्यूज आना और पार्टी चलाना दो अलग बातें हैं। आम आदमी पार्टी भी बड़े आंदोलन से निकली थी, फिर भी उसकी यात्रा आसान नहीं रही।
यह पहली बार नहीं है कि आम आदमी पार्टी में कोई नेता बागी हुआ हो। स्वाति मालीवाल के साथ भी ऐसा ही हुआ था।
क्या कहते हैं कमेंट्स और जनता की राय?
YouTube स्टूडियो के एआई चैट एनालिसिस के अनुसार, जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित है। एक पक्ष कहता है कि राघव चड्ढा “आम आदमी की आवाज” और “यूथ आइकन” हैं। दूसरा पक्ष कहता है कि यह “कैलकुलेटेड पीआर एक्सरसाइज” है।
कुछ लोगों का मानना है कि उन्हें भाजपा में भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है और वे पंजाब के लिए भविष्य के मुख्यमंत्री चेहरा हो सकते हैं।
एक आलोचना यह भी है कि अरविंद केजरीवाल किसी भी ऐसे नेता को साइडलाइन कर देते हैं जो लोकप्रियता में उनका मुकाबला करने लगे।
कुल मिलाकर, जनता अभी भ्रमित है। समय ही बताएगा कि राघव चड्ढा आखिर करते क्या हैं।
राघव चड्ढा के सामने अब क्या विकल्प हैं?
एक संभावना यह है कि 2028 तक, जब तक उनकी राज्यसभा की सीट है, वे इसी तरह अपने मुद्दे उठाते रहें और पार्टी से संघर्ष करते रहें।
हालांकि अब उन्हें राज्यसभा में बोलने का ज्यादा समय नहीं मिलेगा, क्योंकि वे डेपुटी लीडर के पद से हट गए हैं।
अब हमें इंतजार करना होगा राघव चड्ढा की सफाई, स्पष्टीकरण और बयानों का। यह भी देखना होगा कि उनका भविष्य वास्तव में कैसा दिखता है और आम आदमी पार्टी पर इसका कितना असर पड़ता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह ने राघव चड्ढा पर पुराने ट्वीट्स डिलीट करने का आरोप लगाया, जिसमें भाजपा और प्रधानमंत्री की आलोचना थी
- राघव चड्ढा का संसदीय रिकॉर्ड प्रभावशाली है – 84% उपस्थिति, 344 सवाल, 55 बहसें
- गिग वर्कर्स के मुद्दे पर क्रेडिट लेने का विवाद वायरल हुआ, एक्स ने ट्वीट को “मिसलीडिंग” टैग किया
- पार्टी के संकट में चुप रहने का आरोप सबसे गंभीर – केजरीवाल की गिरफ्तारी और दिल्ली की हार पर कोई मजबूत बयान नहीं
- भविष्य को लेकर तीन अटकलें – भाजपा में शामिल होना, कांग्रेस जॉइन करना, या नई पार्टी बनाना
- राघव चड्ढा ने कुछ आरोपों का जवाब दिया है लेकिन डिलीटेड ट्वीट्स पर अभी तक चुप हैं













