Punjab Rainfall Crop Damage ने किसानों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने पंजाब के किसानों की कमर तोड़ दी है। मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। आलम यह है कि बेमौसम बरसात में पंजाब में 1 लाख से 1.25 लाख एकड़ क्षेत्र में गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।
अप्रैल के महीने में जब सूरज की तपिश महसूस होनी चाहिए थी तब जनवरी जैसी ठंड का एहसास हो रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पंजाब भर में बेमौसम बरसात का दौर जारी है। मंगलवार को दिन के बाद रात को भी आई बरसात ने गर्मी से राहत दी, वहीं किसानों की चिंताएं बढ़ा दीं। प्रदेश के कई हिस्सों में हुई तेज बारिश, ओलावृष्टि और धूल भरी आंधी ने खेतों व मंडियों में रखी सरसों व गेहूं की फसल को भिगो दिया।
40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी
पंजाब में इन दिनों कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। मौसम के बदले इस रुख ने गर्मी के तेवर ढीले तो जरूर किए लेकिन मौसम अब तक अपने कई रंग दिखा चुका है।
आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं ने तो बढ़ते तापमान को ही थाम लिया है। इस बदलते मौसम ने जहां गर्मी से राहत दिलाई है तो वहीं किसानों के लिए मुश्किलें लेकर आया है।
आलम यह है कि बेहिसाब बारिश और ओलावृष्टि ने पंजाब में ऐसी तबाही मचाई कि लाखों एकड़ से अधिक क्षेत्र में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। जहां तक नजर जाती है वहां सिर्फ और सिर्फ बर्बादी के मंजर दिखाई देते हैं।
जो फसल पहले खेतों में लहलहा रही थी अब वो पानी में तैरती हुई नजर आ रही है। 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने पकी हुई फसल को खेतों में बिछा दिया है, जिससे उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है।
मोहाली में किसानों की मायूसी
मोहाली में भी पश्चिमी विक्षोभ के चलते पिछले कई दिनों से बेहिसाब बारिश हो रही है। जिसने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। आलम यह है कि कटने के लिए तैयार हो चुकी किसानों की गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। किसानों के सिर मायूसी से झुक गए हैं।
एक किसान ने बताया, “जो गेहूं की फसल थी बिल्कुल तैयार थी। लेकिन आप देख सकते हैं कि बारिश की वजह से और जो तेज हवा चलती है ये गेहूं की फसल जो है बिल्कुल तैयार थी लेकिन गिर गई है बुरी तरह जिसकी वजह से किसानों को नुकसान हुआ है।”
वह मुआवजे की डिमांड भी कर रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि क्योंकि प्रोक्योरमेंट सीजन था। 1 अप्रैल से प्रोक्योरमेंट शुरू है गेहूं की। लेकिन जिस तरह की बारिशें लगातार हो रही हैं उसकी वजह से फसल क्षतिग्रस्त हुई है।
किसानों की दर्दभरी आवाज़
मोहाली के ही एक अन्य किसान ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा, “बारिश के कारण मौसम खराब है। ये 60% तो पहले ही खराब हो चुकी है, गिर चुकी है। बिल्कुल तैयार थी, आज कटनी थी।”
“हवा चल गई। अब 40% रह गई ये भी खत्म हो जाएगी। गीला हो गया है पानी से। ये सूखना भी नहीं है। हफ्ते तक कंबाइन वैसे ही नहीं चलनी। हफ्ते बाद पता नहीं कुदरत क्या करेगा,” एक निराश किसान ने कहा।
एक अन्य किसान ने भावुक होते हुए कहा, “किसान है वो चार पासे मर रहा है। आज की तारीख में सरकार से अपील है कि गिरदावरी करके क्षति का आकलन करें और किसानों को मुआवजा दें।”
फाजिलका और मोगा में भी तबाही
मोहाली की तरह ही फाजिलका और मोगा में भी कुदरत का कहर देखने को मिला है। जहां लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि में किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
अपनी फसल को इस तरह नष्ट होता देख किसान परेशान और हताश हैं। वहीं सरकार से मुआवजे की गुहार भी लगा रहे हैं।
फाजिलका के एक किसान ने कहा, “मुझे बहुत सारा नुकसान हुआ है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान व कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुटिया से निवेदन करता हूं कि वो स्पेशल दौरा इसका, गिरदावरी करवाएं।”
“फसल की जो नुकसान हुआ है किसान भाइयों का, इसके साथ मजदूर वर्ग को भी इसका बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा आगे चलकर। तो उनका स्पेशल गिरदावरी करवा के इनको इसका मुआवजा दिलाया जाए,” उन्होंने आगे कहा।
बागवानी को भी भारी नुकसान
ओलावृष्टि से न केवल गेहूं की फसल बल्कि बागवानी को भी भारी नुकसान हुआ है। एक किसान ने बताया, “देखो आप, बाग है जो ओलावृष्टि के साथ बाग भी सारा जो झड़ गया है। किन्नू का, अमरूद का बाग है। अमरूद और आम का जो इधर एरिया है उस एरिया में बाग पड़ते हैं, वो सारे बाग का भी बहुत सारा नुकसान हो गया। छोटा-छोटा जो फल लगा था वो सारा नीचे गिर गया।”
यह नुकसान किसानों की आय पर दोहरी मार है। एक तरफ गेहूं की फसल बर्बाद हुई तो दूसरी ओर फलों के बाग भी तबाह हो गए।
1.25 लाख एकड़ में फसल बर्बाद: सरकारी आंकड़े
पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते अब तक करीब-करीब 1 लाख से 1.25 लाख एकड़ क्षेत्र में गेहूं की फसल बर्बाद हो चुकी है। सबसे ज्यादा नुकसान मुक्तसर, फाजिलका और भटिंडा जिलों में दर्ज किया गया है।
जहां फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन तेज हवाओं ने पकी हुई फसल को खेतों में बिछा दिया है। जिससे उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है।
फाजिलका जिले में लगभग 25,000 से 45,000 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ है। मुक्तसर में 43,000 एकड़ और भटिंडा में लगभग 20,000 एकड़ क्षेत्र में नुकसान दर्ज किया गया है।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुटिया का बयान
इस संकट की घड़ी में पंजाब सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए विशेष गिरदावरी कराने के आदेश दिए हैं। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुटिया ने आज तक से खास बातचीत में बताया कि सीएम भगवंत मान के आदेश पर पंजाब में गिरदावरी का काम किया जा रहा है ताकि किसानों के नुकसान का सब कुछ पता चल पाए।
कृषि मंत्री ने कहा, “पंजाब में जो है असमय बारिशें हुई हैं जिसकी वजह से प्रोक्योरमेंट का सीजन था और लेकिन क्रॉप लॉस जो है काफी जगह पर हुआ क्योंकि गेहूं की जो खेती है वो खराब हुई है।”
500 से अधिक अधिकारी गिरदावरी में जुटे
गुरमीत सिंह खुटिया ने आगे बताया, “अनुमान लगाया जा रहा है तकरीबन 500 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी-मुलाजिम मेरे खेतीबाड़ी महकमे के, इसी तरह रेवेन्यू डिपार्टमेंट के, तहसीलदार, पटवारी, वो सारा कुछ इकट्ठा कर रहे हैं।”
“एक रफली प्रभावित एरिया वो सवा लाख एकड़, 1 लाख 25,000 एकड़ हो गया। रात भी बारिश पड़ी। कई जगह ओले भी पड़े। पता नहीं कहां क्या हो रहा है। वो मौसम के साथ मेरे ख्याल से एक-दो दिन में पता लग जाएगा,” उन्होंने कहा।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसान लगातार मुआवजे की डिमांड कर रहे हैं तो उसके लिए गिरदावरी कराई जा रही है। “सीएम साहब ने हुक्म दिया है कि स्पेशल गिरदावरी शुरू करें। बारिश कुछ रुकेगी फिर उसके बाद देखा जाएगा कि कहां क्या नुकसान हुआ है,” उन्होंने स्पष्ट किया।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
कृषि मंत्री ने बताया कि पहले दौर में फाजिलका जिले में 25,000 से 45,000 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसी तरह मुक्तसर में 43,000 एकड़ नुकसान दर्ज किया गया है। भटिंडा में भी लगभग 20,000 एकड़ फसल खराब हुई है।
“संगरूर में भी कुछ नुकसान हुआ है। आज सवेरे जो नई रिपोर्ट आई है उसके बाद पता लगेगा,” उन्होंने कहा।
जब आढ़तियों के साथ चल रहे विवाद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “उनका रीसेंटमेंट था वो दूर हुआ। प्रोक्योरमेंट पर कोई इम्पैक्ट नहीं होगा। उनसे सारी बातें ठीक हैं।”
विपक्ष की मांग: जल्द मुआवजा दें
विपक्ष सरकार से मांग कर रहा है कि जल्द से जल्द किसानों के नुकसान की भरपाई की जाए। एक विपक्षी नेता ने कहा, “किसान किधर जाए? ना तो कोई गिरदावरी स्पेशल अनाउंस की है। ना तो कोई सेंटर के महकमे से बात कर रहे हो। ना तो इंश्योरेंस करवा रहे हो। किसान क्या करेगा अब?”
“पिछले दो बरसों में कई किसानों ने आत्महत्या की है इसलिए अभी भी फैसले आगे कर लो। कुछ महीने किसान बच जाएगा। पर जो जिद पड़ी हुई है – ये सेंटर के महकमे को, इंश्योरेंस कंपनियों को बुलाओ। अगर वो नहीं मानते तो देखो जो,” उन्होंने चेतावनी दी।
किसान यूनियनों की अपील
किसान यूनियनों ने सभी किसानों से अपील की है। एक यूनियन नेता ने कहा, “100% फसल तबाह हो गई है। कोई दो एकड़ वाला बेचारा, 10 एकड़ वाला या पांच एकड़ वाला – 80, 90 हजार उन्होंने ठेके पर जमीन ली थी।”
“मैं सारे वर्कर्स से अपील करता हूं कि अगले हफ्ते 10 दिन आप सारे अपने-अपने गांव जाकर, अपने-अपने इलाके में जिनका भी नुकसान हुआ है आप गेहूं इकट्ठी करिए, चारा इकट्ठी करिए। जो भी मदद कर सकते हैं वो करिए,” उन्होंने साथी किसानों से कहा।
प्रोक्योरमेंट पर असर की आशंका
1 अप्रैल से गेहूं की प्रोक्योरमेंट शुरू हो चुकी है। लेकिन लगातार हो रही बारिश और फसल नुकसान से प्रोक्योरमेंट पर असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि कृषि मंत्री ने दावा किया कि प्रोक्योरमेंट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है। किसान चिंतित हैं कि जो फसल बची है वो भी अगर बारिश में गीली हो गई तो उसे मंडी में कैसे लेकर जाएंगे।
कंबाइन भी गीली फसल में नहीं चल सकती। किसानों को फसल सूखने का इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन मौसम की अनिश्चितता के चलते कब तक इंतजार करना होगा, यह कोई नहीं जानता।
आम जनजीवन पर प्रभाव
यह बेमौसम बारिश न केवल किसानों बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी। गेहूं पंजाब की मुख्य फसल है और राज्य देश के गेहूं उत्पादन में बड़ा योगदान देता है।
फसल नुकसान से किसानों की आय घटेगी जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। मजदूरों को भी काम कम मिलेगा क्योंकि फसल कटाई में कम श्रम की जरूरत होगी।
सरकार को भी प्रोक्योरमेंट में कमी का सामना करना पड़ सकता है। अगर समय पर मुआवजा नहीं मिला तो किसानों की परेशानी और बढ़ेगी।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक पंजाब में मौसम खराब रहने की चेतावनी दी है। पश्चिमी विक्षोभ अभी भी सक्रिय है और बारिश के और दौर आ सकते हैं।
इससे जो फसल अभी बची है वो भी खतरे में पड़ सकती है। किसान आसमान की ओर देख रहे हैं और प्रार्थना कर रहे हैं कि अब बारिश रुक जाए।
सरकार की जवाबदेही
यह घटना पंजाब सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। क्या किसानों को समय पर चेतावनी दी गई थी? क्या फसल बीमा योजना का लाभ सभी किसानों को मिल रहा है?
विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल घोषणाएं करती है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता। किसान इंश्योरेंस के लिए भी परेशान हैं क्योंकि कंपनियां आसानी से दावे नहीं देतीं।
सरकार को चाहिए कि वह तुरंत विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे और किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दे। साथ ही भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तंत्र विकसित किया जाए।
मुख्य बातें (Key Points)
- Punjab Rainfall Crop Damage से 1 लाख से 1.25 लाख एकड़ में गेहूं की फसल बर्बाद
- फाजिलका में 25,000-45,000 एकड़, मुक्तसर में 43,000 एकड़, भटिंडा में 20,000 एकड़ क्षेत्र प्रभावित
- 40-60 किमी/घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाएं
- पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बेमौसम बारिश
- सीएम भगवंत मान के आदेश पर विशेष गिरदावरी शुरू
- 500 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी गिरदावरी में जुटे
- कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुटिया ने किसानों को मुआवजे का भरोसा दिया
- 1 अप्रैल से प्रोक्योरमेंट सीजन शुरू, नुकसान से प्रभावित हो सकती है खरीद
- बागवानी में भी भारी नुकसान, किन्नू और अमरूद के बाग तबाह
- विपक्ष ने सरकार से तुरंत मुआवजे की मांग की











