Punjab Kesari Group Action : पंजाब में जालंधर स्थित एक बड़े मीडिया समूह पर सरकारी विभागों की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने सियासी और मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। होटल का लाइसेंस रद्द किया गया, बिजली काटी गई और अलग-अलग शहरों में छापेमारी की गई, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं जबकि सरकार ने इसे नियमों के उल्लंघन से जोड़ा है।
जालंधर में स्थित पंजाब केसरी ग्रुप के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर बीते कुछ दिनों में सरकारी विभागों की संयुक्त कार्रवाई सामने आई है। स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB), एक्साइज और लेबर डिपार्टमेंट की टीमें एक साथ ग्रुप से जुड़े कारोबारों की जांच के लिए पहुंचीं।
जालंधर बस स्टैंड के पास बने ग्रुप के होटल पार्क प्लाजा होटल पर सबसे बड़ी कार्रवाई हुई, जहां बिजली सप्लाई काट दी गई और शराब पिलाने का लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
होटल पर क्यों हुई कार्रवाई
पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि होटल में नियमों का उल्लंघन हो रहा था, जिसके चलते पहले बिजली कनेक्शन काटा गया और फिर होटल को सील करने की प्रक्रिया अपनाई गई। एक्साइज विभाग ने दावा किया कि होटल मैनेजमेंट ने तय कोटे से अधिक शराब का उपयोग किया और यहां से एक्सपायरी शराब भी मिली है।
हालांकि, इस संबंध में अब तक किसी एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
लेबर डिपार्टमेंट की एंट्री और रिकॉर्ड जांच
पंजाब केसरी ग्रुप का कहना है कि बीते पांच दिनों में उसके खिलाफ करीब 10 बड़ी सरकारी कार्रवाइयां की गईं। लेबर डिपार्टमेंट की टीम दो दिन पहले ग्रुप के कार्यालय पहुंची और स्टाफ से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।
ग्रुप का आरोप है कि यह जांच सामान्य प्रक्रिया से आगे बढ़कर दबाव बनाने की कोशिश जैसी थी।
बठिंडा की प्रिंटिंग यूनिट में तनाव
कार्रवाई केवल जालंधर तक सीमित नहीं रही। बठिंडा में ग्रुप की प्रिंटिंग प्रेस पर भी छापा मारा गया। यहां गेट पर तैनात कर्मचारी द्वारा पूछताछ करने पर कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई।
गेट न खुलने पर पुलिसकर्मियों ने सीढ़ियां लगाकर प्रिंटिंग प्लांट में प्रवेश किया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।


मीडिया ग्रुप का आरोप: हमें टारगेट किया जा रहा
पंजाब केसरी ग्रुप ने दावा किया कि उसे जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। ग्रुप ने इस पूरी कार्रवाई को लेकर पंजाब के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है।
AAP सरकार का जवाब
आम आदमी पार्टी सरकार ने मीडिया समूह के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने साफ कहा कि यह कार्रवाई किसी मीडिया हाउस के खिलाफ नहीं, बल्कि गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए की गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अवैध शराब की जब्ती या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई को “प्रताड़ना” कैसे कहा जा सकता है।

राजनीति गरमाई, विपक्ष का हमला
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह जनता की आवाज दबाने की कोशिश है और मीडिया संस्थानों को डराया जा रहा है।
वहीं, भाजपा ने इसे प्रेस की आज़ादी पर हमला बताया और इसे आपातकाल जैसे हालात से जोड़ दिया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने भी सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया।

सरकार का आधिकारिक पक्ष
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यवसायिक इकाई को आबकारी, श्रम और पर्यावरण कानून तोड़ने की छूट दी जाए। सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई नियमों के गंभीर उल्लंघन के आधार पर की गई है, न कि किसी राजनीतिक द्वेष से।
आम आदमी पर असर
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि जब मीडिया समूहों और सरकार के बीच टकराव होता है, तो उसका असर सूचना की स्वतंत्रता और कर्मचारियों की सुरक्षा पर कैसे पड़ता है। वहीं, सरकार का तर्क है कि कानून सभी के लिए बराबर है, चाहे वह कोई भी संस्था क्यों न हो।
जानें पूरा मामला
पंजाब केसरी ग्रुप के होटल, प्रिंटिंग प्रेस और कार्यालयों पर अलग-अलग विभागों द्वारा की गई एक साथ कार्रवाई ने राज्य में प्रशासनिक सख्ती और प्रेस की भूमिका को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ मीडिया समूह इसे दबाव की कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार इसे नियमों के पालन से जोड़ रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- जालंधर के पार्क प्लाजा होटल का शराब लाइसेंस रद्द, बिजली सप्लाई कटी
- बठिंडा समेत कई शहरों में प्रिंटिंग यूनिट्स पर छापेमारी
- विपक्ष ने कार्रवाई को प्रेस की आज़ादी पर हमला बताया
- AAP सरकार ने नियमों के उल्लंघन को कार्रवाई की वजह बताया








