Punjab Crop Diversification Special Package Lok Sabha 2026 : Punjab Crop Diversification का मुद्दा गुरुवार को लोकसभा में जोरदार तरीके से गूँजा। आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने सप्लीमेंट्री ग्रांट की माँगों पर बोलते हुए केंद्र सरकार से अपील की कि पंजाब को फसल विविधीकरण और कृषि शोध के लिए विशेष वित्तीय पैकेज और अतिरिक्त ग्रांट दी जाए। उन्होंने कहा कि अगर यह सहायता मिले तो पंजाब न केवल अपनी खेती को नई दिशा दे सकता है बल्कि दालों के आयात पर भारत की निर्भरता को भी खत्म करने में सक्षम होगा।
‘हरित क्रांति का बोझ आज भी उठा रहा है पंजाब’
कंग ने देश की खाद्य सुरक्षा में पंजाब के ऐतिहासिक योगदान को याद दिलाते हुए कहा कि जब भारत खाने की कमी से जूझ रहा था, तब जवाहरलाल नेहरू और प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में हुई हरित क्रांति में पंजाब ने सबसे अहम भूमिका निभाई। उस क्रांति ने भारत को अनाज में आत्मनिर्भर बना दिया, लेकिन इसकी सबसे भारी कीमत पंजाब ने चुकाई।
उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि आज पंजाब का भूजल स्तर खतरनाक हद तक गिर चुका है और राज्य कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है। पंजाब की मिट्टी और पानी की प्रकृति के अनुकूल न होने वाली धान जैसी फसलें वर्षों से उगाई जा रही हैं जिसने पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर गहरी चोट की है।
‘पंजाब में दालें, फल और सब्जियाँ उगाकर आयात रोका जा सकता है’
कंग ने ध्यान दिलाया कि जहाँ एक तरफ पंजाब उन फसलों की खेती में लगा है जो उसकी धरती के लिए सही नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत अभी भी दालें, फल और सब्जियाँ जैसी कई जरूरी चीजें विदेश से मँगवा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब में फसल विविधीकरण की अपार संभावनाएँ हैं और यहाँ दालें, फल, डेयरी उत्पाद, कपास, मक्का, गन्ना और आलू बड़े पैमाने पर पैदा किए जा सकते हैं।
उनका तर्क था कि अगर केंद्र सरकार विविधीकरण ग्रांट देकर इस बदलाव में मदद करे तो पंजाब अकेला भारत की आयात निर्भरता खत्म करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
‘मान सरकार ने नहरी सिंचाई 21% से बढ़ाकर 78% पहुँचाई’
कंग ने भगवंत मान सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि AAP के सत्ता में आने से पहले पंजाब में सिर्फ 21 प्रतिशत खेतों को नहर का पानी मिलता था। आज यह आँकड़ा बढ़कर 78 प्रतिशत तक पहुँच गया है। यह उपलब्धि सिंचाई बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और भूजल पर निर्भरता कम करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने माना कि दूसरे राज्यों की तुलना में पंजाब की सिंचाई व्यवस्था बेहतर है, लेकिन पानी के सही चैनलाइजेशन और वितरण में अभी भी सुधार की गुंजाइश है।
‘केंद्र से माँग: कृषि परियोजनाओं में पंजाब को दें प्राथमिकता’
कंग ने अंत में केंद्र सरकार से यह अपील करते हुए अपना भाषण समाप्त किया कि कृषि परियोजनाओं, सिंचाई विकास और फसल विविधीकरण से जुड़े शोध में पंजाब को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इस बदलाव में मिली मदद से न सिर्फ पंजाब की खेती फिर से जीवंत होगी बल्कि पूरा देश कृषि में आत्मनिर्भरता की नई ऊँचाई छुएगा।
‘क्या है पूरी पृष्ठभूमि’
पंजाब दशकों से देश की खाद्य टोकरी (Food Basket) कहलाता रहा है। हरित क्रांति के दौर में अपनाई गई गेहूँ-धान की मोनो क्रॉपिंग ने भले ही देश को अनाज में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन इससे पंजाब का भूजल संकट में आ गया। अब आप सरकार और उसके सांसद केंद्र के सामने यह माँग रख रहे हैं कि पंजाब के किसानों को विविधीकरण की ओर मोड़ने के लिए ठोस वित्तीय सहायता दी जाए ताकि राज्य की खेती, पर्यावरण और स्वास्थ्य तीनों को नई दिशा मिल सके।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- Punjab Crop Diversification पर AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने लोकसभा में विशेष पैकेज और ग्रांट की माँग रखी।
- पंजाब में नहरी सिंचाई कवरेज मान सरकार के कार्यकाल में 21% से बढ़कर 78% हुई।
- कंग का दावा: दालें, फल, मक्का, आलू उगाकर पंजाब भारत की आयात निर्भरता खत्म कर सकता है।
- हरित क्रांति से पंजाब का भूजल संकट में, कैंसर जैसी बीमारियाँ बढ़ीं; फसल बदलाव ही एकमात्र रास्ता।








