Punjab Development Funds: पंजाब भर में ईंटों के भाव बढ़ गए हैं, जिससे रंगला पंजाब विकास फंड के रंग फीके पड़ने लगे हैं। ईंटों का सरकारी भाव कम है जबकि बाजार में ईंट का भाव काफी बढ़ गया है। कई भट्ठा मालिक सरकारी भाव पर ईंट देने को तैयार नहीं, जिसके कारण ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित होने लगे हैं।
देखा जाए तो यह समस्या केवल ईंट के भाव की नहीं है, बल्कि पूरी विकास प्रक्रिया पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए हर विधानसभा क्षेत्र को पांच करोड़ रुपये का रंगला पंजाब विकास फंड दिया है, लेकिन ईंट न मिलने से यह पैसा खर्च नहीं हो पा रहा।
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सरकारी भाव और बाजार भाव में बड़ा अंतर
| जिला | सरकारी भाव (प्रति हजार) | बाजार भाव (प्रति हजार) | अंतर |
|---|---|---|---|
| लुधियाना | ₹8,900 | ₹10,500 | ₹1,600 |
| अमृतसर | ₹8,200 | ₹10,500 | ₹2,300 |
| बठिंडा | ₹7,420 | ₹9,000 | ₹1,580 |
| मोहाली | ₹8,000 | ₹11,500 | ₹3,500 |
| संगरूर | ₹8,400 | ₹9,500 | ₹1,100 |
| मानसा | ₹7,500 | ₹9,000 | ₹1,500 |
अगर गौर करें तो मोहाली जिले में यह अंतर सबसे ज्यादा है – 3,500 रुपये प्रति हजार ईंट। ऐसी स्थिति में पंचायतों के लिए सरकारी भाव पर ईंट खरीदना लगभग असंभव हो गया है।
विधायकों की चिंता, विकास कार्य रुके
विधायकों को जल्दी है कि विकास का यह पैसा बिना देर किए खर्च किया जाए, लेकिन पंचायतों को सरकारी भाव पर ईंट नहीं मिल रही। समझने वाली बात यह है कि अगर पैसा है लेकिन निर्माण सामग्री नहीं, तो विकास कैसे होगा?
इसके अलावा, 15वें वित्त आयोग का पैसा भी खर्च करने के लिए पड़ा है। समस्या के समाधान के लिए हर जिले में पंचायतों और भट्ठा मालिकों की मीटिंग जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
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सरकारी कर्मचारियों की दुविधा
पंचायत विभाग के कर्मचारी सस्ते भाव वाली ईंट इस्तेमाल करने का खतरा मोल लेने से डर रहे हैं। उन्हें चिंता है कि अगर उन्होंने सरकारी भाव से ज्यादा दाम पर ईंट खरीदी तो ऑडिट में फंस सकते हैं, और अगर कम गुणवत्ता की ईंट इस्तेमाल की तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब हो जाएगी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकारी कर्मचारी दोधारी तलवार के बीच फंसे हैं – एक तरफ काम पूरा करने का दबाव, दूसरी तरफ नियमों का पालन करने की बाध्यता।
भट्ठा मालिकों का पक्ष
भट्ठा मालिक एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष तरसेम सिंगला ने कहा कि ईंटों पर लागत खर्च बढ़ने के कारण भाव करीब दो हजार रुपये तक बढ़ गए हैं। भट्ठा मालिक मनप्रीत सिंह ने बताया कि मजदूरों की दिहाड़ी भी बढ़ी है, कोयले और अन्य कच्चे माल के दाम भी बढ़े हैं।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ भट्ठा मालिक अपनी लागत की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पंचायतें सरकारी निर्देशों में बंधी हैं। इस गतिरोध को तोड़ना जरूरी है।
संगरूर में समझौता, राहत की उम्मीद
संगरूर जिले में कुछ राहत की खबर है। सरपंच यूनियन संगरूर के अध्यक्ष मनिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने भट्ठा मालिक यूनियन के साथ समझौता किया है, जिसके तहत अब जिले में पंचायतों को 8,400 रुपये में हजार ईंट मिलेगी। हालांकि यह भी सरकारी भाव से ज्यादा है, लेकिन बाजार भाव (9,500 रुपये) से कम है।
मानसा जिले में भी कुछ प्रगति हुई है। हलका सरदूलगढ़ के विधायक गुरप्रीत सिंह वनांवाली की अपील पर जिला प्रशासन ने ईंटों का सरकारी भाव 7,500 रुपये से बढ़ाकर 8,500 रुपये कर दिया। विधायक ने बताया कि पंचायतों और भट्ठा मालिक एसोसिएशन की मीटिंग कराई गई, जिसके बाद भट्ठा मालिक 31 मार्च 2027 तक पंचायतों को 8,500 रुपये में हजार ईंट देंगे।
कुछ पंचायतों ने तोड़ा रास्ता
लुधियाना के पिंड भागपुर के सरपंच गगनदीप सिंह ने कहा कि ईंटों का सरकारी भाव कम होने के कारण विभाग के लिए भ्रष्टाचार के रास्ते भी खुलते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने विकास कार्य सस्ते में करने के लिए गुणवत्ता से समझौता किया है, जो भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है।
अगर गौर करें तो यह समस्या केवल ईंट की नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की है। जब सरकारी दरें बाजार की वास्तविकता से मेल नहीं खातीं, तो या तो काम रुक जाता है या फिर गुणवत्ता का नुकसान होता है।
मुख्य बातें (Key Points):
- पंजाब में ईंट का बाजार भाव 8 से 11.50 रुपये प्रति ईंट तक पहुंच गया
- सरकारी भाव और बाजार भाव में 1,500 से 3,500 रुपये प्रति हजार का अंतर
- रंगला पंजाब विकास फंड (5 करोड़ प्रति विधानसभा क्षेत्र) का खर्च प्रभावित
- संगरूर और मानसा में भट्ठा मालिकों से समझौता, कुछ राहत
- पंचायत कर्मचारी सस्ते भाव पर ईंट खरीदने से डर रहे
- मजदूरों की दिहाड़ी और कच्चे माल के दाम बढ़ने से लागत बढ़ी













