Poor Blood Circulation Causes Symptoms Treatment in Hindi : शरीर में खून का बहाव जरा भी बिगड़ा तो आंख हो या किडनी, दिल हो या दिमाग — कोई भी अंग सुरक्षित नहीं रहता। सी.के. बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के एसोसिएट डायरेक्टर, वैस्कुलर सर्जरी एवं इंटरवेंशन्स, डॉ. दिग्विजय शर्मा कहते हैं कि शरीर बिल्कुल गाड़ी की तरह है — जब तक फ्यूल है, सब ठीक है। लेकिन गाड़ी का फ्यूल फिर भर सकते हैं, शरीर के अंगों को एक बार नुकसान हो जाए तो वह हमेशा के लिए हो सकता है।
नसें दो तरह की: आर्टरी और वेन्स, दोनों की अलग बीमारी
डॉ. दिग्विजय शर्मा बताते हैं कि शरीर में खून की दो तरह की नाड़ियाँ होती हैं। पहली आर्टरी, जो हृदय से शुद्ध खून टिशूज तक पहुँचाती है। दूसरी वेन्स यानी शिराएं, जो टिशूज से खून वापस दिल तक लाती हैं। दोनों में अलग-अलग और गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
वेन्स में सबसे बड़ी समस्या उनका फूल जाना है। जब नसें फूल जाती हैं तो खून वापस ऊपर नहीं जा पाता और वहीं इकट्ठा होने लगता है। इसे वेरिकोज वेन्स कहते हैं जिसमें पैर की नसें टेढ़ी और उभरी हुई दिखने लगती हैं। इसके अलावा नस में क्लॉट बन सकता है जिसे वेनस थ्रॉम्बोसिस कहते हैं। यह क्लॉट अगर ऊपर बहा तो जानलेवा हो सकता है।
आर्टरी में रुकावट मतलब: अंधापन, लकवा, हार्ट अटैक, किडनी फेलियर
आर्टरी प्रेशर के साथ खून को टिशूज तक पहुँचाती है। स्वस्थ अवस्था में इसकी अंदरूनी परत रबर जैसी चिकनी होती है जिससे खून बिना रुकावट के बहता है। लेकिन जब कोई धूम्रपान करता है, डायबिटीज अनियंत्रित हो, या ब्लड प्रेशर बिगड़ा हो, तो यह परत खुरदरी हो जाती है।
खुरदरी परत पर खून अटकता है, क्लॉट बनता है और जिस अंग की आपूर्ति रुकती है वह नष्ट होना शुरू हो जाता है। आँख में गया तो अंधापन, मस्तिष्क में गया तो लकवा, हृदय में गया तो हार्ट अटैक, आँतों में गया तो आँतों का नुकसान, किडनी की सप्लाई बंद हुई तो किडनी फेलियर और हाथ-पैर में गया तो उन्हें काटने की नौबत भी आ सकती है।
ये 5 आदतें खराब करती हैं ब्लड सर्कुलेशन
डॉ. दिग्विजय शर्मा के अनुसार स्मोकिंग, अनियंत्रित डायबिटीज, बिगड़ा ब्लड प्रेशर, कम पानी पीना और शारीरिक गतिविधि न करना — ये पाँचों आर्टरी और वेन्स दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं।
ये आदतें धीरे-धीरे नसों को बर्बाद करती हैं और जब तक लक्षण दिखते हैं तब तक नुकसान हो चुका होता है।
ये लक्षण दिखें तो एक दिन भी न करें देरी
पैर में थोड़ा भी दर्द, सूजन, मोजे का निशान पड़ना, झनझनाहट या पैर का रंग बदलना — ये सभी Poor Blood Circulation के संकेत हैं। डॉक्टर कहते हैं कि इन्हें देखते ही बिना देर किए वैस्कुलर सर्जन से मिलें। जल्दी इलाज हुआ तो बीमारी जल्दी ठीक होती है। देर की तो पैर भी जा सकता है और जान भी।
ब्लड सर्कुलेशन ठीक रखने के आसान उपाय
शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें। नियमित रूप से टहलें और व्यायाम करें। पर्याप्त पानी पिएं। डिब्बाबंद और डीप फ्राइड खाना बंद करें। जितना हो सके कच्ची सब्जियाँ और फल खाएं। डॉ. दिग्विजय का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है: इलाज से बड़ा बचाव है — बीमारी को होने ही मत दीजिए।
गैस का दर्द: पेट से लेकर सीने तक, कभी-कभी हार्ट अटैक जैसा
पेट में गैस बनना आम समस्या है लेकिन इसके दर्द को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। पारस हेल्थ, पंचकूला के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. आकाश गंडोत्रा बताते हैं कि जब खाने के कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह नहीं पचते तो आँतों में मौजूद बैक्टीरिया उन्हें तोड़ते हैं जिससे गैस बनती है। जल्दी-जल्दी खाने से हवा निगल जाती है और वह भी गैस का कारण बनती है।
गैस कहाँ फँसी है, दर्द वहीं होगा। पेट के ऊपरी बाएं हिस्से में फँसी हो तो भारीपन और जलन, दाहिने ऊपरी हिस्से में हो तो हेपेटिक फ्लेक्सर में दर्द, नीचे हो तो मरोड़ और अगर छाती के पास जमा हो जाए तो ऐसा तेज दर्द उठता है जो हार्ट अटैक जैसा लग सकता है। अगर दर्द के साथ जकड़न, पसीना, सांस फूलना या दर्द बाएं हाथ, जबड़े तक जाए — तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं, यह गैस नहीं हो सकती।
अजवाइन-सौंफ का पानी, अदरक की चाय, हल्का खाना, समय पर खाना और खाने के बाद थोड़ी देर टहलना — ये गैस से राहत के सरल उपाय हैं।
दाल बनाम चना: प्रोटीन, पाचन और वजन घटाने में क्या है बेहतर?
मेदांता, गुरुग्राम के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. पवन रावल बताते हैं कि एक कटोरी पके चने में 13-15 ग्राम प्रोटीन होता है। मूंग, मसूर और अरहर की दाल 10-15 ग्राम प्रोटीन देती हैं जबकि उड़द दाल 15-18 ग्राम तक प्रोटीन देती है। यानी दोनों में प्रोटीन लगभग बराबर है।
पाचन की दृष्टि से दालें, खासकर छिलके रहित मूंग दाल, ज्यादा फायदेमंद हैं। जिन्हें गैस और ब्लोटिंग की समस्या है, उनके लिए मूंग की दाल सबसे अच्छी है। चना खाने वाले इसे अच्छी तरह भिगोकर और पकाकर ही खाएं। वजन घटाने में भी दोनों मददगार हैं क्योंकि इनमें प्रोटीन और फाइबर दोनों होते हैं जो पेट को देर तक भरा रखते हैं और ओवरइटिंग से बचाते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- आर्टरी में ब्लॉकेज से अंधापन, लकवा, हार्ट अटैक, किडनी फेलियर तक हो सकता है; पैर में दर्द, सूजन या झनझनाहट को नजरअंदाज न करें।
- स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई BP, कम पानी और बैठे रहना — ये खराब ब्लड सर्कुलेशन के पाँच बड़े कारण हैं।
- गैस का दर्द सीने तक पहुँच सकता है; जकड़न, पसीना या बाएं हाथ तक दर्द जाए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- दाल और चने में प्रोटीन बराबर है; पाचन के लिए मूंग दाल सर्वश्रेष्ठ, वजन घटाने में दोनों उपयोगी।








