Pakistan on India EU Trade Deal: 27 जनवरी 2025 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने पाकिस्तान को नींद उड़ा दी है। करीब 20 साल की बातचीत के बाद हुए इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स‘ कहा जा रहा है। यह समझौता दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी और वैश्विक GDP के 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाली दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है।
एक हफ्ते बाद भी पाकिस्तान की बेचैनी कम नहीं हो रही है। इस्लामाबाद को डर सता रहा है कि यूरोपीय बाजार में उसकी सालों पुरानी व्यापारिक बढ़त पूरी तरह खत्म हो जाएगी। पाकिस्तान ने अब EU अधिकारियों से संपर्क किया है ताकि अपने निर्यात पर पड़ने वाले असर को समझा और कम किया जा सके।
पाकिस्तानी उद्योग जगत के नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति नहीं संभली तो करीब 1 करोड़ नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। आइए समझते हैं कि आखिर यह डील पाकिस्तान के लिए इतनी बड़ी चिंता क्यों बन गई है।
GSP Plus का फायदा खत्म होने का डर
अब तक पाकिस्तान को EU की GSP Plus (Generalized Scheme of Preferences Plus) योजना के तहत बड़ा फायदा मिलता था। 2014 से चल रही इस योजना के तहत पाकिस्तान के लगभग 66% निर्यात उत्पादों पर यूरोप में शून्य शुल्क लगता था।
खासकर टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स में पाकिस्तान को भारी रियायत मिली हुई थी। इसी सेक्टर से पाकिस्तान अपने कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा कमाता है।
दूसरी ओर, भारत को उन्हीं उत्पादों पर 9% से 12% तक का शुल्क देना पड़ता था। यह पाकिस्तान के लिए बड़ी competitive advantage थी। लेकिन अब India-EU FTA के बाद यह बढ़त पूरी तरह खत्म होने वाली है।
GSP Plus का संकट:
- पाकिस्तान को 2014 में मिला था GSP Plus status
- इसकी अवधि दिसंबर 2027 में खत्म हो सकती है
- अगर extend नहीं हुआ तो सभी विशेष रियायतें समाप्त
- EU पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है
$6.2 Billion vs $5.6 Billion – अब बदलेगा खेल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान यूरोप में सालाना 6.2 बिलियन डॉलर** का निर्यात करता है। इसके मुकाबले भारत की हिस्सेदारी **\5.6 बिलियन डॉलर की है।
दिलचस्प बात यह है कि 9-12% की ऊंची duty के बावजूद भारत का निर्यात पाकिस्तान के लगभग बराबर रहा। इससे साफ होता है कि भारतीय उत्पादों की quality और demand कितनी मजबूत है।
अब जब India-EU FTA लागू होगा तो भारत को भी लगभग पूरी तरह duty-free access मिल जाएगी। इससे:
- पाकिस्तान की price advantage पूरी तरह खत्म
- भारतीय products ज्यादा competitive होंगे
- EU market में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी
- पाकिस्तान के exporters को भारी नुकसान
1 करोड़ नौकरियों पर खतरा!
पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गौहर एजाज ने गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, अगर हालात नहीं सुधरे तो पाकिस्तान में करीब 1 करोड़ (10 million) नौकरियों पर खतरा आ सकता है।
यह चौंकाने वाला आंकड़ा है क्योंकि:
- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है
- बेरोजगारी दर बढ़ रही है
- विदेशी मुद्रा भंडार कम है
- IMF से कर्ज लेकर गुजारा हो रहा है
टेक्सटाइल सेक्टर पाकिस्तान का सबसे बड़ा रोजगार देने वाला उद्योग है। अगर EU export में गिरावट आई तो लाखों लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।
पाकिस्तानी इंडस्ट्री का डर
ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (APTMA) के चेयरमैन कमरान अरशद ने खुलकर अपनी चिंता जताई है।
उनका कहना है:
“कई क्षेत्रों में भारत अब पाकिस्तान से आगे निकल सकता है। हमारी जो competitive edge थी वह खत्म हो रही है। EU market में हमारी position कमजोर होगी।”
पाकिस्तानी व्यापारियों का कहना है:
- भारत का manufacturing base ज्यादा मजबूत है
- भारत में better infrastructure है
- India की production capacity बहुत बड़ी है
- Quality और variety में भी भारत आगे है
अब जब price advantage भी खत्म हो जाएगा तो पाकिस्तान के पास कोई USP नहीं बचेगी।
भारत को मिलेगा बड़ा फायदा
India-EU FTA से भारत को क्या-क्या फायदे होंगे, यह समझना जरूरी है:
1. Duty-Free Access:
- भारत के करीब 95% श्रम प्रधान उत्पादों को EU में duty-free entry
- टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर products में बड़ा बूस्ट
- हैंडीक्राफ्ट और MSME products को फायदा
2. Export Growth:
- अगले 5 सालों में EU को भारत का export दोगुना हो सकता है
- $100 billion के export target की संभावना
- हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी
3. Manufacturing Boost:
- ‘Make in India’ को बड़ा बढ़ावा
- FDI में वृद्धि
- Supply chain में भारत की अहम भूमिका
4. Consumer Benefits:
- यूरोप से आने वाली luxury cars सस्ती होंगी
- European wines और spirits की कीमत कम होगी
- High-end products की availability बढ़ेगी
Trump Tariffs का भी असर
इस पूरे मामले में एक और dimension है – अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की tariff policies।
Trump ने कई देशों पर import duty बढ़ाने की धमकी दी है। अगर America अपने tariffs बढ़ाता है तो:
- पाकिस्तान का एक और बड़ा market प्रभावित होगा
- भारत को अपनी strong diplomatic position का फायदा मिलेगा
- Global trade में realignment होगा
- पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ेंगी
भारत ने पहले से ही America के साथ अच्छे relations बनाए हैं। Quad, I2U2 जैसे forums में भारत की active भागीदारी है। इससे भारत को geopolitical advantage मिलता है।
पाकिस्तान ने EU से की अपील
घबराए हुए पाकिस्तान ने अब EU अधिकारियों से संपर्क किया है। इस्लामाबाद चाहता है:
- GSP Plus status को 2027 के बाद भी extend किया जाए
- India-EU FTA के impact को कम करने के उपाय खोजे जाएं
- पाकिस्तानी exporters को कुछ विशेष रियायतें मिलें
- Transition period दिया जाए
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि EU भारत को ज्यादा priority देगा क्योंकि:
- भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी economy है
- भारत stable democracy है
- भारत का market size बहुत बड़ा है (1.4 billion people)
- China के alternative के रूप में भारत पर focus है
China Factor – एक और चुनौती
पाकिस्तान की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। चीन भी अब global manufacturing में अपनी position मजबूत कर रहा है।
China के साथ पाकिस्तान के CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) में भारी निवेश के बावजूद, पाकिस्तान को खास फायदा नहीं मिला।
उल्टा:
- पाकिस्तान चीन के कर्ज में डूब गया
- Chinese products ने पाकिस्तानी industry को नुकसान पहुंचाया
- Trade deficit बढ़ता गया
- Local manufacturing कमजोर हुई
अब India-EU FTA के बाद:
- भारत supply chain में चीन का alternative बनेगा
- ‘China Plus One’ strategy में भारत को फायदा
- पाकिस्तान की relevance और कम होगी
भारत की Strategic Win
यह सिर्फ economic deal नहीं, बल्कि strategic victory भी है। इससे:
1. Geopolitical Advantage:
- EU के 27 देशों के साथ मजबूत संबंध
- 450 million लोगों का विशाल market
- Pakistan को diplomatic isolation
2. Global Image:
- भारत reliable partner के रूप में उभरा
- Democratic values की साझेदारी
- Rule-based order में विश्वास
3. Economic Integration:
- European technology और investment
- Knowledge transfer
- Innovation partnerships
4. Counter to Pakistan-China Axis:
- Pakistan-China की नाकामी
- भारत की balanced foreign policy का फायदा
- Middle ground की diplomacy
पाकिस्तानी मीडिया में हाहाकार
पाकिस्तानी अखबारों और TV channels में इस मुद्दे पर गहन चर्चा हो रही है। वहां के analysts openly accept कर रहे हैं कि यह Pakistan के लिए बड़ा झटका है।
Dawn, The Express Tribune, Geo News जैसे leading media outlets ने इसे “economic disaster in making” तक कह दिया है।
पाकिस्तानी social media पर भी यह trending topic है। लोग अपनी सरकार को कोस रहे हैं कि:
- 20 सालों में Pakistan ने क्या किया?
- India इतना आगे कैसे निकल गया?
- Economic policies में कहां चूक हुई?
- अब भविष्य क्या होगा?
भारत का जवाब – काम बोलता है
भारत सरकार ने इस मुद्दे पर सीधा कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन message साफ है – हमारा काम बोलता है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल में कहा था:
“भारत अपने national interest को लेकर clear है। हम किसी के against नहीं, अपने favor में काम करते हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘Sabka Saath, Sabka Vikas, Sabka Vishwas’ की policy दुनिया में appreciated हो रही है।
आगे क्या होगा?
अगले कुछ महीनों में यह deal लागू होना शुरू होगी। तब असली impact दिखेगा।
Short Term (1-2 years):
- भारतीय exports में 20-30% growth
- पाकिस्तान के exports में गिरावट
- EU market में market share redistribution
Medium Term (3-5 years):
- भारत EU का top trading partner बनेगा
- पाकिस्तान को alternative markets ढूंढने होंगे
- Manufacturing shift India की ओर
Long Term (5-10 years):
- भारत global manufacturing hub
- पाकिस्तान की economic crisis गहराना
- Geopolitical equations में बदलाव
पाकिस्तान के विकल्प
अब पाकिस्तान के पास सीमित options हैं:
1. Product Diversification:
- Textile के अलावा नए sectors में जाना
- Value addition बढ़ाना
- Innovation पर focus
2. New Markets:
- Middle East, Africa, Latin America में expansion
- Regional trade agreements
- China market का बेहतर उपयोग
3. Domestic Reforms:
- Manufacturing capability बढ़ाना
- Infrastructure improvement
- Ease of doing business
4. Diplomatic Efforts:
- EU से better terms negotiate करना
- GSP Plus extension की कोशिश
- Bilateral agreements
लेकिन पाकिस्तान की political instability और economic weakness को देखते हुए ये सब आसान नहीं होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• 27 जनवरी 2025 को भारत और EU के बीच ऐतिहासिक FTA हुआ, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, 20 साल की बातचीत के बाद यह समझौता हुआ।
• पाकिस्तान को GSP Plus status के तहत अपने 66% products पर zero duty मिलती थी जबकि भारत को 9-12% duty देनी पड़ती थी, अब यह advantage खत्म होगा।
• पाकिस्तान EU को $6.2 billion का export करता है जबकि भारत $5.6 billion का, लेकिन India-EU FTA के बाद भारत तेजी से आगे निकलेगा।
• पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री ने चेतावनी दी है कि करीब 1 करोड़ नौकरियों पर खतरा है, खासकर textile sector में बड़ा असर पड़ेगा।
• पाकिस्तान का GSP Plus status दिसंबर 2027 में खत्म हो सकता है, अगर extend नहीं हुआ तो सभी विशेष रियायतें समाप्त हो जाएंगी।
• भारत के 95% श्रम प्रधान उत्पादों को EU में duty-free entry मिलेगी, textile, garments, handicrafts और MSME products को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
• APTMA चेयरमैन कमरान अरशद ने स्वीकार किया कि कई क्षेत्रों में भारत अब पाकिस्तान से आगे निकल सकता है, competitive edge खत्म हो रही है।
• यह सिर्फ economic deal नहीं बल्कि geopolitical victory भी है, भारत EU के 450 million लोगों के market में मजबूत position हासिल करेगा।








