Operation Entebbe: यह कहानी है दुनिया के सबसे दुस्साहसी सैन्य अभियानों में से एक की, जब इजराइल के कमांडो 4000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर युगांडा के एंटबी एयरपोर्ट में घुसे और महज 53 मिनट के अंदर 102 बंधकों को छुड़ाकर वापस ले आए। सात हाईजैकर्स मारे गए, 45 युगांडा आर्मी के सैनिक ढेर किए गए और इस पूरे ऑपरेशन में इजराइल का सिर्फ एक कमांडो शहीद हुआ: योनी नेतन्याहू, जो आज के इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे। यह ऑपरेशन आज भी दुनिया के सबसे बोल्ड और लॉन्ग डिस्टेंस रेस्क्यू ऑपरेशन के रूप में जाना जाता है।
चार C-130 Hercules प्लेन क्यों चुने गए: Operation Entebbe की तैयारी
Operation Entebbe को अंजाम देने के लिए इजराइल ने चार C-130 Hercules प्लेन सेलेक्ट किए थे। इन प्लेंस को चुनने के पीछे ठोस वजहें थीं। ये प्लेन खराब एयरफील्ड पर भी तेजी से लैंडिंग और टेक ऑफ कर सकते थे, छोटे रनवे पर भी आसानी से ऑपरेट हो सकते थे और सबसे बड़ी बात यह थी कि ये बहुत भारी सामान उठाने में सक्षम थे।
चूंकि इजराइल के कमांडो एक ऐसे देश में जा रहे थे जहां से किसी भी तरह का सपोर्ट मिलना संभव नहीं था, इसलिए बहुत सारा सामान साथ ले जाना जरूरी था। इन प्लेंस का बैक डोर खुल जाता था, जिससे बहुत तेजी से लोडिंग और अनलोडिंग हो जाती थी। इस मिशन में Mercedes और Land Rover कारों का भी बेहद अहम रोल था, जिनके बारे में आगे विस्तार से बताया जाएगा। इन बड़ी-बड़ी कारों को भी इन प्लेंस के अंदर ले जाना बहुत आसान था। ये स्टेल्थ प्लेन नहीं थे, लेकिन अंडर द रडार उड़ते समय इनके पकड़े जाने की संभावना बाकी प्लेंस से काफी कम थी।
4000 KM की उड़ान और सीक्रेट रिफ्यूलिंग का प्लान
Operation Entebbe की सबसे बड़ी चुनौती दूरी थी। इजराइल से युगांडा की दूरी 4000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। इतनी लंबी उड़ान के बाद वापसी में एक जगह रिफ्यूलिंग कराना तो तय ही था। इसके लिए इजराइल ने गुपचुप तरीके से केन्या से परमिशन हासिल कर ली थी कि ऑपरेशन पूरा होने के बाद रिफ्यूलिंग केन्या में हो जाएगी।
सारी तैयारियां पूरी होने के बाद ये चार प्लेन रात करीब 11 बजे शर्म अल शेख वाले एरिया से उड़ान भरते हैं। इनके पीछे दो Boeing 707 भी फॉलो करते हैं। एक Boeing 707 को केन्या में बैकअप के तौर पर रखना था, जबकि दूसरे को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि जब ऑपरेशन अपने फाइनल स्टेज में होगा तो जरूरत पड़ने पर उस एरिया पर नजर रखेगा। इसके बाद ये प्लेन रेड सी से इंटरनेशनल फ्लाइट रूट पकड़कर आगे बढ़ते हैं और जब आधी दूरी पर पहुंचते हैं तो अंडर द रडार एकदम लो एल्टीट्यूड पर उड़ना शुरू कर देते हैं। पहले इथियोपिया, फिर केन्या और फिर लेक विक्टोरिया के रास्ते एंटबी एयरपोर्ट की तरफ बढ़ना शुरू कर देते हैं।
चार प्लेन, चार अलग-अलग मिशन: किसे क्या करना था?
Operation Entebbe में चारों प्लेंस की अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई थीं। पहला प्लेन सबसे अहम था, इसमें मुख्य पैराट्रूपर टीम थी जिन्हें ओल्ड टर्मिनल के हॉल में जाकर असली ऑपरेशन अंजाम देना था। इस प्लेन में 29 लोगों की एक स्पेशल सरयत मतकल (Sayeret Matkal) टीम थी, जिसे योनी नेतन्याहू लीड कर रहे थे।
दूसरे प्लेन में क्विक रिएक्शन टीम थी। इस टीम को न्यू टर्मिनल वाले एरिया को सिक्योर करना था। अगर युगांडा की आर्मी जवाबी कार्रवाई करती तो उससे निपटना इनकी जिम्मेदारी थी। साथ ही जब बाकी टीमें बंधकों को बाहर ला रही होंगी, तो उनके लिए एक सुरक्षित रास्ता तैयार रखना भी इन्हीं के जिम्मे था।
तीसरे प्लेन में रिजर्व पैराट्रूपर्स थे जिनका काम था प्लेन से निकलकर युगांडा एयरफोर्स के जितने भी मिग फाइटर जेट्स खड़े थे, उन सबको नष्ट करना। यह इसलिए तय किया गया था ताकि जब चारों प्लेन बंधकों को लेकर वापस लौट रहे हों, तो अगर युगांडा की एयरफोर्स हमला भी करना चाहे तो कर ही न पाए। चौथे प्लेन में इवाकुएशन और मेडिकल सपोर्ट टीम थी। इसके साथ 10 लोगों की एक प्लेन रिफ्यूलिंग टीम भी बैकअप में रखी गई थी, जिसके पास पोर्टेबल फ्यूल पंप थे। यह बैकअप इसलिए था कि अगर केन्या में रिफ्यूलिंग का ऑप्शन फेल हो जाए, तो एंटबी एयरपोर्ट पर ही खुद से पंप करके अपने प्लेंस में ईंधन भर लेंगे।
एंटबी एयरपोर्ट का लेआउट: जहां 53 मिनट में इतिहास लिखा गया
Operation Entebbe को समझने के लिए एंटबी एयरपोर्ट का लेआउट समझना जरूरी है। एयरपोर्ट में एक न्यू टर्मिनल था जिसका न्यू रनवे और न्यू एटीसी टावर था। इसके अलावा एक ओल्ड टर्मिनल था, जिसका उस समय सामान्य उपयोग बंद हो चुका था। इसी ओल्ड टर्मिनल बिल्डिंग में सारे बंधक रखे गए थे और यहीं पर पूरा ऑपरेशन थंडरबोल्ट अंजाम दिया जाना था।
ओल्ड एटीसी टावर के ऊपर युगांडा के सैनिक तैनात थे। एयरपोर्ट में एक मिलिट्री रनवे भी था और उसके साइड में युगांडा एयरफोर्स के 11 मिग फाइटर जेट्स खड़े थे। पूरे एयरपोर्ट के दक्षिण में विक्टोरिया लेक था और यहीं से इजराइल ने अपने सारे प्लेंस को एक-एक करके लैंड करवाया था।
रात के अंधेरे में लैंडिंग: दो इंजन बंद, लाइटें ऑफ
Operation Entebbe का सबसे रोमांचक पल तब आया जब पहला C-130 प्लेन एंटबी एयरपोर्ट के पास पहुंचा। प्लेन ने सबसे पहले अपनी सारी लाइटें बंद कीं। फिर चार में से दो इंजन बंद किए ताकि शोर कम से कम हो। इसके बाद एक निर्धारित पॉइंट पर धीरे-धीरे लैंडिंग शुरू की। लैंड करते समय प्लेन के डोर हवा में ही खोल दिए गए ताकि जमीन पर पहुंचते ही अनलोडिंग तेजी से हो सके।
लैंडिंग के बाद प्लेन ने एक बैटरी लाइट से सिग्नल बनाया ताकि बाकी तीन प्लेन भी उसी लाइट कोड के हिसाब से लैंड कर सकें। यह इसलिए भी जरूरी था कि अगर लड़ाई के दौरान युगांडा की फोर्सेस रनवे की लाइटें बंद कर दें या कंफ्यूज करने की कोशिश करें, तो इजराइली प्लेंस को कोई दिक्कत न आए।
ईदी अमीन का फेक कॉन्वॉय: जब ब्लैक Mercedes बनी सबसे बड़ा हथियार
Operation Entebbe में सबसे चतुराई भरा कदम था ईदी अमीन के कॉन्वॉय की हूबहू नकल तैयार करना। ईदी अमीन, जो उस समय युगांडा के तानाशाह राष्ट्रपति थे, हमेशा एक ब्लैक Mercedes में अपने कॉन्वॉय के साथ एयरपोर्ट आते थे। इजराइली कमांडो ने ठीक वैसा ही फेक कॉन्वॉय तैयार किया, जिसमें हूबहू वही ब्लैक Mercedes और दो Land Rover थीं, सेम नंबर प्लेट, सेम झंडे, सब कुछ बिल्कुल ओरिजनल से मैच करता था।
योनी नेतन्याहू और उनकी कोर टीम के 29 कमांडो और 52 पैराट्रूपर इस फेक कॉन्वॉय में बैठ गए। प्लेन से कारों का निकलना और कॉन्वॉय तैयार होना, यह सब 30 सेकंड से 2 मिनट के अंदर पूरा कर लिया गया। इसके बाद यह फेक कॉन्वॉय 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ओल्ड टर्मिनल की तरफ बढ़ने लगा, ठीक उसी स्पीड से जैसे ईदी अमीन का असली कॉन्वॉय चलता था, ताकि किसी को शक न हो।
ब्लैक Mercedes की जगह व्हाइट Mercedes: जब प्लान में आई दरार
Operation Entebbe में एक ऐसा मोड़ आया जिसने पूरे मिशन को खतरे में डाल दिया। ईदी अमीन ने 2-3 दिन पहले एक नई व्हाइट Mercedes खरीद ली थी और पिछले दो दिनों से वह उसी सफेद कार में अपने कॉन्वॉय में आ रहा था। लेकिन यह इंटेलिजेंस इजराइली कमांडो के पास नहीं था। वे अपने फेक कॉन्वॉय में पुरानी ब्लैक Mercedes लेकर चल रहे थे।
जब यह कॉन्वॉय ओल्ड टर्मिनल से करीब 300 मीटर की दूरी पर था, तो दो युगांडा के सिक्योरिटी गार्ड्स को शक हो गया। उनकी सोच थी कि दो दिन से अमीन व्हाइट Mercedes में आ रहा था, तो आज अचानक ब्लैक Mercedes कैसे और वह भी रात को? उन दोनों गार्ड्स ने कॉन्वॉय को रोक दिया। इजराइली कमांडो को साफ निर्देश दिए गए थे कि युगांडा आर्मी के किसी भी अधिकारी को नहीं मारना है, वरना युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। लेकिन जब गार्ड्स ने कॉन्वॉय रोका तो ब्लैक Mercedes की पिछली विंडो खुली और एक कमांडो ने साइलेंसर लगी गन से एक गार्ड को मार गिराया।
लेकिन पीछे वाली Land Rover में खड़े एक और इजराइली कमांडो ने बिना साइलेंसर वाली गन से दूसरे गार्ड पर फायर कर दिया। इसकी तेज आवाज पूरे रनवे पर गूंज गई। इजराइली कमांडो खुद डर गए कि अब अंदर के हाईजैकर्स और युगांडा की फोर्सेस अलर्ट हो जाएंगी। प्लान अब बदलना जरूरी था।
300 मीटर की दौड़ और हॉल के अंदर का खूनी मंजर
Operation Entebbe में जैसे ही दोनों गार्ड मारे गए, कमांडो ने सारी कारें वहीं छोड़ दीं और कई ग्रुप्स बनाकर ओल्ड टर्मिनल की तरफ तेजी से दौड़ पड़े। 300 मीटर की दूरी जल्दी ही तय हो गई। जैसे ही कमांडो ओल्ड टर्मिनल पहुंचे, ऊपर ओल्ड एटीसी टावर पर तैनात युगांडा की आर्मी ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। दो टीमें टावर पर तैनात सैनिकों से निपटीं, जबकि योनी नेतन्याहू की टीम बिना रुके आगे बढ़ती रही और ओल्ड टर्मिनल के मेन हॉल में घुसने लगी।
स्पीड इस मिशन की सबसे अहम चीज थी और कमांडो ने इसमें कोई कमी नहीं छोड़ी। लेकिन जब योनी नेतन्याहू अंदर घुस रहे थे, तभी पीछे से युगांडा के एक अधिकारी ने गोली चलाई जो उन्हें लग गई। योनी नेतन्याहू वहीं शहीद हो गए। ऑपरेशन की शुरुआत में ही मुख्य लीडर की मौत हो गई, लेकिन कोई नहीं रुका।
हॉल में घुसते ही एक हाईजैकर बाहर की तरफ आता दिखा, उसे कमांडो ने वहीं ढेर कर दिया। अंदर दो और हाईजैकर थे जिन्होंने फायरिंग शुरू कर दी, उन्हें भी मार गिराया गया। इसके बाद कमांडो ने मेगाफोन पर अंग्रेजी और हिब्रू दोनों भाषाओं में चिल्लाकर कहा: “स्टे डाउन!” लेकिन इसके बावजूद एक बंधक खड़ा हो गया, जिसे कमांडो ने हाईजैकर समझकर गोली मार दी।
बंधकों से पूछा गया कि बाकी हाईजैकर्स कहां हैं, तो उन्होंने कनेक्टिंग रूम की तरफ इशारा किया। कमांडो उस रूम में गए, पहले ग्रेनेड फेंके और फिर अंदर घुसकर बाकी हाईजैकर्स को भी मार गिराया। कुल सात हाईजैकर्स थे, जिनमें चार मुख्य हाईजैकर जिन्होंने प्लेन हाईजैक किया था और तीन जो बाद में युगांडा में जुड़े थे, सभी मारे गए।
102 बंधक सुरक्षित, 53 मिनट में मिशन पूरा
Operation Entebbe में जब पूरा एरिया क्लियर हो गया, तो कमांडो ने अपनी टीम को रेडियो पर मैसेज भेजा कि सारे बंधकों को लेकर बाहर निकल रहे हैं। कुल 106 बंधकों में से तीन क्रॉसफायरिंग में मारे गए। एक बंधक डोरा बलोच बीमार थीं और उन्हें युगांडा के सिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया था, इसलिए वे रेस्क्यू नहीं हो पाईं। बाकी 102 बंधकों को लेकर कमांडो धीरे-धीरे बाहर निकले।
बाहर भी भारी फायरिंग चल रही थी। ओल्ड एटीसी टावर पर तैनात युगांडा आर्मी के सैनिकों को कमांडो ने मार गिराया। उसके बाद सभी बंधकों को सुरक्षित गार्ड बनाकर प्लेंस में बैठाया गया। इसी दौरान इजराइली कमांडो ने युगांडा एयरफोर्स के जितने भी मिग फाइटर जेट्स खड़े थे, उन सबको नष्ट कर दिया ताकि वापसी में कोई हवाई हमला न हो सके।
इसके बाद चारों प्लेन सारे बंधकों और योनी नेतन्याहू की पार्थिव देह को लेकर वहां से उड़ान भर गए। कुल 53 मिनट ये लोग उस एयरपोर्ट पर थे। 30 मिनट तक असॉल्ट चला। सात हाईजैकर्स और 45 युगांडा आर्मी के सैनिक मारे गए। प्लेन केन्या में लैंड हुए, वहां रिफ्यूलिंग हुई और फिर वापस इजराइल के उसी बेन गुरियन एयरपोर्ट पर लैंड किए, जहां से सारे यात्री 27 जून को पेरिस के लिए चढ़े थे।
ऑपरेशन के बाद: ईदी अमीन का गुस्सा और डोरा बलोच की दर्दनाक मौत
Operation Entebbe पूरा होने के बाद तानाशाह ईदी अमीन आग-बबूला हो गया। उसने अपने ही आर्मी चीफ को गिरफ्तार करा दिया, उसे शक था कि शायद वह भी इजराइल से मिला हुआ था, तभी ये लोग इतना बड़ा ऑपरेशन कर पाए। चूंकि केन्या में रिफ्यूलिंग हुई थी, इसलिए ईदी अमीन केन्या पर जवाबी कार्रवाई की भी सोच रहा था। लेकिन उसके सारे मिग फाइटर जेट्स नष्ट हो चुके थे, इसलिए यह प्लान भी धरा का धरा रह गया।
जो एक बंधक डोरा बलोच बीमारी के कारण युगांडा के सिटी हॉस्पिटल में रह गई थीं, उनका रेस्क्यू नहीं हो पाया। काफी समय तक उनका कुछ पता नहीं चला। फिर अचानक खबर आई कि उनकी मौत हो गई है। कई ब्रिटिश डिक्लासिफाइड दस्तावेजों में इस बात का जिक्र है कि ईदी अमीन ने इजराइल से बदला लेने के लिए डोरा बलोच को किडनैप करवाया और फिर मरवा दिया। यह इस पूरे ऑपरेशन का सबसे दुखद पहलू रहा।
योनी नेतन्याहू: नेशनल हीरो जिनकी शहादत ने भाई को प्रधानमंत्री बना दिया
Operation Entebbe में योनी नेतन्याहू इकलौते इजराइली कमांडो थे जिनकी जान गई। उनकी शहादत के बाद पूरे इजराइल में जबरदस्त राष्ट्रीय सहानुभूति की लहर उठी। वे रातोंरात नेशनल हीरो बन गए। उनके सम्मान में इस ऑपरेशन का नाम “ऑपरेशन थंडरबोल्ट” से बदलकर “ऑपरेशन योनातन” (Operation Yonatan) कर दिया गया।
योनी नेतन्याहू की शहादत ने उनके छोटे भाई बेंजामिन नेतन्याहू को एक ऐसी राजनीतिक पहचान दी, जो बाद में उनके प्रधानमंत्री बनने में सबसे बड़ा कारक साबित हुई। लोगों ने बेंजामिन नेतन्याहू को चुनाव जिताकर प्रधानमंत्री बनाया और इसमें उनके बड़े भाई की शहादत से जुड़ी राष्ट्रीय भावना का गहरा योगदान रहा। भले ही इस ऑपरेशन को हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन आज की तारीख में भी इसे दुनिया का सबसे बोल्ड और सबसे लंबी दूरी का रेस्क्यू ऑपरेशन माना जाता है। यह ऑपरेशन न सिर्फ सैन्य रणनीति की पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाया जाता है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और बेजोड़ योजना के आगे कोई भी दूरी या चुनौती रुकावट नहीं बन सकती।
मुख्य बातें (Key Points)
- Operation Entebbe में इजराइल ने 4 C-130 Hercules प्लेन से 4000 KM दूर युगांडा के एंटबी एयरपोर्ट पर छापा मारा और 53 मिनट में 102 बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया।
- ईदी अमीन के कॉन्वॉय की हूबहू नकल बनाकर फेक ब्लैक Mercedes और Land Rover से कमांडो ओल्ड टर्मिनल तक पहुंचे, लेकिन अमीन की नई व्हाइट Mercedes की इंटेलिजेंस न होने से प्लान में दरार आई।
- मिशन लीडर योनी नेतन्याहू (PM बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई) ऑपरेशन की शुरुआत में ही शहीद हो गए, सात हाईजैकर्स और 45 युगांडा सैनिक मारे गए, ऑपरेशन का नाम उनके सम्मान में “ऑपरेशन योनातन” रखा गया।
- बंधक डोरा बलोच बीमारी के कारण हॉस्पिटल में रह गईं और ब्रिटिश दस्तावेजों के अनुसार ईदी अमीन ने बदले में उन्हें किडनैप करवाकर मरवा दिया।







