Northeast Monsoon 2026 की शुरुआत का इंतजार अब खत्म होने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1:20 बजे जारी अपनी प्रेस रिलीज में साफ कह दिया: अगले दो दिनों में देश के बचे हुए हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो जाएगी और ठीक उसी के साथ दक्षिणी प्रायद्वीप पर उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश शुरू हो जाएगी। यानी 14 से 19 अक्टूबर के बीच तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भीगने वाले दिन आ रहे हैं।
और सिर्फ दक्षिण ही नहीं। उत्तर भारत में भी मौसम करवट ले रहा है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक आंधी, बिजली और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है।
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‘दो दिन में पूरा होगा मानसून की विदाई का सफर’
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक 13 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई रेखा 27.0°N/90.5°E, धुबरी, कोलकाता, अंगुल, खम्मम, होनावर और 14.0°N/73.0°E से गुजर रही थी। देखा जाए तो यह रेखा अब देश के नक्शे पर लगभग आखिरी पड़ाव पर है।
पिछले 24 घंटों का हिसाब भी दिलचस्प रहा। तमिलनाडु में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज हुई, तिरुनेलवेली में 8 सेंटीमीटर पानी गिरा। वहीं पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर ओले गिरे। अक्टूबर के महीने में ओले: समझने वाली बात यही है कि मौसम का यह मिजाज सामान्य नहीं कहा जा सकता।
‘छह मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय, इसलिए बदला मिजाज’
मौसम विभाग ने जो वजहें गिनाई हैं, वे एक-दो नहीं बल्कि आधा दर्जन हैं। दक्षिण श्रीलंका तट के पास दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसी से एक ट्रफ लाइन मध्य बंगाल की खाड़ी तक जा रही है।
इसके अलावा दक्षिण अंडमान सागर पर भी एक चक्रवाती परिसंचरण है, जो इसी ट्रफ में मिल गया है। उत्तर भारत की तरफ देखें तो उत्तरी पाकिस्तान और सटे जम्मू पर एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर पहले से मौजूद विक्षोभ बना हुआ है और पूर्वी राजस्थान पर एक और चक्रवाती परिसंचरण है।
इतने सारे सिस्टम एक ही वक्त पर: इसका मतलब है कि अगले एक हफ्ते तक देश के ज्यादातर हिस्सों में आसमान शांत नहीं रहेगा।
‘दक्षिण भारत में 14 से 19 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट’
Northeast Monsoon 2026 का सबसे बड़ा असर तमिलनाडु पर दिखने वाला है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 14 से 19 अक्टूबर तक अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी है। केरल और माहे में यह सिलसिला 15 से 19 अक्टूबर तक चलेगा।
एक नजर में समझिए पूरी तस्वीर:
| राज्य/क्षेत्र | भारी बारिश की तारीखें | आंधी-बिजली की चेतावनी |
|---|---|---|
| तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल | 14 : 19 अक्टूबर | 15 : 17 अक्टूबर (40-50 kmph, झोंके 60 तक) |
| केरल और माहे | 15 : 19 अक्टूबर | 15 : 17 अक्टूबर (40-50 kmph) |
| तटीय आंध्र प्रदेश और यनम | 15 : 18 अक्टूबर | 15 : 17 अक्टूबर + तेज सतही हवाएं |
| दक्षिण आंतरिक कर्नाटक | 15 : 18 अक्टूबर | 15 : 17 अक्टूबर (30-40 kmph) |
| तटीय व उत्तर आंतरिक कर्नाटक | 16 : 18 अक्टूबर | 16 : 18 अक्टूबर |
| रायलसीमा | 16 : 18 अक्टूबर | 15 : 17 अक्टूबर |
| तेलंगाना | 17 अक्टूबर | 15 : 19 अक्टूबर |
तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 13 से 17 अक्टूबर तक तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। लक्षद्वीप में 16 से 19 अक्टूबर के बीच व्यापक बारिश होगी।
‘दिल्ली-NCR में 15 और 16 को बिगड़ेगा मौसम, ओले भी गिर सकते हैं’
राजधानी के लोगों के लिए यह हिस्सा सबसे काम का है। 14 अक्टूबर को आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा, शाम तक हल्के बादल आएंगे। अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री और न्यूनतम 20 से 22 डिग्री रहेगा। इस दिन अलग-अलग जगहों पर ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है।
15 अक्टूबर का दिन सबसे अहम है। दोपहर से आसमान घने बादलों से भर जाएगा। दोपहर-शाम को कई जगहों पर हल्की बारिश के साथ गरज, बिजली और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 60 तक पहुंच सकते हैं। रात में बारिश का दूसरा दौर आएगा।
16 अक्टूबर को सुबह से दोपहर तक फिर बारिश। अधिकतम तापमान गिरकर 30 से 32 डिग्री पर आ जाएगा, जो सामान्य से नीचे है। न्यूनतम 18 से 20 डिग्री। राहत की बात यह है कि इस बारिश से राजधानी की हवा साफ होगी और गर्मी से छुटकारा मिलेगा।
‘उत्तर भारत में ओलावृष्टि की चेतावनी, पहाड़ों पर भारी बारिश’
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में 13 से 15 अक्टूबर तक व्यापक बारिश और 13-14 अक्टूबर को भारी बारिश का अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश में 15 अक्टूबर को जोरदार बारिश होगी।
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 14-15 अक्टूबर को व्यापक बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी है। पश्चिमी राजस्थान में 14 अक्टूबर, पूर्वी राजस्थान और उत्तराखंड में 15 अक्टूबर को ओले गिर सकते हैं।
अगर गौर करें, तो उत्तराखंड में 13 से 19 अक्टूबर तक लगातार सात दिन बारिश का अनुमान है: पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
‘किसानों के लिए चिंता का विषय, फसल पर सीधा असर’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अक्टूबर खरीफ की कटाई का महीना होता है। मौसम विभाग ने साफ चेताया है कि तेज हवाओं और ओलों से खड़ी फसल, बागवानी और केला, पपीता, सहजन जैसी फसलों को नुकसान हो सकता है।
तमिलनाडु के किसानों को सलाह दी गई है कि धान की नर्सरी, कपास, मक्का, मूंगफली और सब्जियों के खेतों में पानी निकासी का इंतजाम दुरुस्त रखें। जो फसल पक चुकी है, उसे बारिश रुकने के बीच काट लें और सुरक्षित जगह भंडारित करें। कटी फसल पर तिरपाल डालने और छोटे फल-पौधों को सहारा देने की भी सलाह है।
पशुपालकों से कहा गया है कि जानवरों को शेड के अंदर रखें और चारा सूखी जगह पर रखें। मछली पालकों को तालाबों पर जाली वाले आउटलेट बनाने की सलाह दी गई है, ताकि पानी भरने पर मछलियां बाहर न निकलें।
‘आम लोगों के लिए क्या सावधानी जरूरी’
बिजली गिरने के दौरान घर के अंदर रहें। कंक्रीट की दीवारों और फर्श से दूरी बनाएं। बिजली के उपकरण प्लग से निकाल दें। पेड़ के नीचे शरण लेने की गलती न करें और पानी में हों तो तुरंत बाहर आ जाएं।
मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि छोटे जहाज, ट्रॉलर और नावें प्रभावित हो सकती हैं। पर्यटन, मनोरंजन और अपतटीय गतिविधियों को सोच-समझकर नियंत्रित करने की जरूरत है। कच्चे मकान, दीवारें, झोपड़ियां और सड़कें भी नुकसान की चपेट में आ सकती हैं।
कोंकण-गोवा में 13 से 15 अक्टूबर और तटीय कर्नाटक में 13-14 अक्टूबर तक गर्म और उमस भरा मौसम बना रहेगा। इन इलाकों में खेत मजदूरों को दिन के सबसे गर्म हिस्से में भारी काम से बचने की सलाह दी गई है।
‘IMD ने लॉन्च किया चक्रवात चेतावनी का नया डिजिटल हथियार’
इसी बीच एक और बड़ी खबर। 12 अक्टूबर 2026 को IMD ने देश को समर्पित किया अपना नया Cyclone Warning and Marine Weather Services Decision Support System (DSS): एक इंटरैक्टिव वेबजीआईएस आधारित प्लेटफॉर्म।
यह लॉन्च मानसून बाद सीजन (अक्टूबर-दिसंबर) 2026 की द्वि-वार्षिक प्री-साइक्लोन एक्सरसाइज बैठक में हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने की। वे IMD के महानिदेशक और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के तीसरे उपाध्यक्ष हैं।
यह प्लेटफॉर्म चक्रवात का ट्रैक, तीव्रता, अनिश्चितता का शंकु, हवाओं का वितरण, जिलेवार बारिश की चेतावनी, तूफानी लहरें और नदी जलग्रहण क्षेत्रों के लिए बारिश का पूर्वानुमान: सब एक जगह दिखाता है। यह mausam.imd.gov.in और rsmcnewdelhi.imd.gov.in पर आम जनता के लिए उपलब्ध है। सीधा लिंक: dss.imd.gov.in/dwr_img/GIS/marine.php
‘230 लोग, 30 से ज्यादा संस्थाएं और एक अहम तारीख’
दिलचस्प बात यह है कि 12 अक्टूबर की तारीख खुद इतिहास में दर्ज है। इसी दिन 2013 में अति भीषण चक्रवाती तूफान फैलिन और 2014 में हुदहुद ने तट पार किया था। दोनों की सटीक भविष्यवाणी ने भारत की अर्ली-वार्निंग क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी।
बैठक में 30 से ज्यादा संगठनों के करीब 230 प्रतिभागी शामिल हुए: 180 ऑनलाइन और 50 मौके पर। इनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), NDRF, गृह मंत्रालय, भारतीय नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल, केंद्रीय जल आयोग, PIB, NCMRWF और IIT के प्रतिनिधि थे।
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, अंडमान-निकोबार, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, लक्षद्वीप, दमन-दीव और दादरा-नगर हवेली के प्रतिनिधि भी जुड़े। बंदरगाह-जहाजरानी मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, उपभोक्ता मामले विभाग और DGLL के अधिकारी भी मौजूद रहे।
IMD 2008 से यह बैठक साल में दो बार करता आ रहा है। इस बार अप्रैल की बैठक की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा हुई और नए DSS का लाइव डेमो दिखाया गया।
‘क्या है पूरे मामले की पृष्ठभूमि’
भारत में मानसून दो हिस्सों में आता है। जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के बड़े हिस्से को पानी देता है, और अक्टूबर से दिसंबर तक उत्तर-पूर्वी मानसून दक्षिणी प्रायद्वीप, खासकर तमिलनाडु की सालाना बारिश का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। इसीलिए तमिलनाडु के लिए अक्टूबर-दिसंबर का यह दौर पानी, खेती और पीने के पानी के भंडार: तीनों के लिए निर्णायक होता है। इस साल दोनों मानसून की यह अदला-बदली 14-15 अक्टूबर के आसपास हो रही है, और साथ ही उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना मौसम को दोहरी करवट दे रहा है।
‘सवाल उठता है: आगे क्या’
अगले छह महीनों के नजरिए से देखें तो यह दौर काफी मायने रखता है। उत्तर-पूर्वी मानसून की अच्छी शुरुआत का मतलब है दक्षिण भारत के जलाशयों में पानी, रबी की बुवाई के लिए बेहतर नमी और शहरों में पेयजल संकट का कम खतरा।
दूसरी ओर, चक्रवात का मौसम भी अब शुरू हो चुका है। बंगाल की खाड़ी पर एक साथ दो चक्रवाती परिसंचरण और एक ट्रफ लाइन का बनना: यह दर्शाता है कि समुद्र सक्रिय है। इसी वजह से IMD का नया DSS प्लेटफॉर्म समय पर आया है। यह दिखाता है कि अब सरकार का जोर सिर्फ पूर्वानुमान लगाने पर नहीं, बल्कि उस पूर्वानुमान को आम आदमी तक समझने लायक भाषा में पहुंचाने पर है। और असल फर्क यहीं से पड़ता है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अगले दो दिन में पूरी, साथ ही दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत।
- तमिलनाडु-पुडुचेरी-कराईकल में 14 से 19 अक्टूबर, केरल में 15 से 19 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट।
- दिल्ली-NCR में 15 और 16 अक्टूबर को बारिश-आंधी, 14-15 को ओलावृष्टि की आशंका, तापमान 30-32 डिग्री तक गिरेगा।
- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में ओलावृष्टि व तेज हवाओं की चेतावनी।
- IMD ने 12 अक्टूबर को लॉन्च किया नया Cyclone Warning और Marine Weather DSS, जिसमें 230 प्रतिभागी शामिल हुए।










