National Law University Jammu : जम्मू में एक बार फिर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों के आवंटन का विवाद अभी थमा ही था कि अब नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) को लेकर नया आंदोलन खड़ा हो गया है। छात्रों का आरोप है कि उमर सरकार एक बार फिर जम्मू के साथ भेदभाव कर एनएलयू को कश्मीर ले जाने की तैयारी कर रही है।
जम्मू विश्वविद्यालय के कानून विभाग के छात्र जम्मू में प्रदर्शन कर रहे हैं। आरोप सीधे Omar Abdullah की सरकार पर है कि वह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को जम्मू के बजाय कश्मीर में स्थापित करना चाहती है।

मेडिकल कॉलेज विवाद के बाद नया आंदोलन
छात्रों का कहना है कि श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में जम्मू की अनदेखी के खिलाफ आंदोलन के बाद मामला सुलझा ही था, लेकिन अब एनएलयू को लेकर वही स्थिति दोबारा बन रही है। इससे जम्मू के युवाओं में आक्रोश और गहरा गया है।
एनएलयू को कश्मीर ले जाने का आरोप
कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों का दावा है कि सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को बड़गांव क्षेत्र में खोला जा सकता है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा भी नहीं हुई है। इसके बावजूद घाटी में इसे लेकर जोर-शोर से प्रचार चल रहा है।
छात्रों का तर्क: जम्मू बेहतर विकल्प
जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रों ने साफ कहा कि हर दृष्टि से जम्मू ही एनएलयू के लिए बेहतर स्थान है। मौसम अनुकूल है, अन्य राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए पहुंच आसान है और बुनियादी ढांचा भी मौजूद है। इसके बावजूद सरकार जम्मू को नजरअंदाज कर रही है।

बीजेपी भी मैदान में
इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने भी मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि उमर सरकार को जम्मू-कश्मीर में बंटवारे और धर्म की राजनीति बंद करनी चाहिए। पार्टी इस मुद्दे को बजट सत्र में उठाने की तैयारी कर रही है।
“हर संस्थान संघर्ष के बाद मिला”
छात्रों ने याद दिलाया कि जम्मू को विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय, एम्स, आईआईटी और अन्य संस्थान भी लंबे संघर्ष के बाद ही मिले। उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो एनएलयू के लिए भी वैसी ही लड़ाई लड़ी जाएगी।
वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज का संदर्भ
छात्रों ने यह भी कहा कि इससे पहले श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में जम्मू की अनदेखी के विरोध के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने कॉलेज की मान्यता रद्द की थी। इससे जम्मू के लोगों में यह भावना और मजबूत हुई है कि उन्हें हर बार अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
विश्लेषण (Analysis)
यह विवाद सिर्फ एक विश्वविद्यालय के स्थान को लेकर नहीं है, बल्कि जम्मू और कश्मीर के बीच लंबे समय से चले आ रहे असंतुलन की भावना को उजागर करता है। लगातार आंदोलनों से साफ है कि अगर सरकार ने समय रहते संतुलित फैसला नहीं लिया, तो यह मुद्दा बड़े राजनीतिक और सामाजिक टकराव का रूप ले सकता है।
आम लोगों पर असर
अगर आंदोलन तेज होता है तो शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा। छात्रों का भविष्य, प्रवेश प्रक्रियाएं और जम्मू की शिक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
क्या है पृष्ठभूमि
जम्मू क्षेत्र लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि बड़े शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थान कश्मीर केंद्रित नीति के तहत स्थापित किए जाते हैं। यही पृष्ठभूमि इस ताजा विरोध की जड़ में है।
मुख्य बातें (Key Points)
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जम्मू में एनएलयू को लेकर छात्रों का विरोध
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उमर सरकार पर जम्मू से भेदभाव का आरोप
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छात्रों ने जम्मू को बेहतर स्थान बताया
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बीजेपी बजट सत्र में मुद्दा उठाने की तैयारी में
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जरूरत पड़ी तो बड़े आंदोलन की चेतावनी








