Mukhyamantri Sehat Yojana ने देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के मानकों को एक नई ऊंचाई दी है। चंडीगढ़ में 22 मार्च 2026 को पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाई जा रही इस योजना का मॉडल केंद्र की आयुष्मान भारत योजना से हर मायने में बेहतर है। जहां आयुष्मान भारत चुनिंदा परिवारों को ₹5 लाख तक का कवर देती है, वहीं पंजाब की Mukhyamantri Sehat Yojana बिना किसी शर्त राज्य के हर परिवार को ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज सुनिश्चित कर रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस योजना में इलाज का अधिकार पात्रता नहीं, बल्कि आवश्यकता तय करती है।
सोच का अंतर: ₹9,500 करोड़ बनाम ₹2,000 करोड़ में कौन ज्यादा कर रहा है?
Mukhyamantri Sehat Yojana और आयुष्मान भारत के बीच का फर्क सिर्फ बजट का नहीं, बल्कि सोच और प्राथमिकता का है। केंद्र सरकार 140 करोड़ की आबादी के लिए ₹9,500 करोड़ का बजट आयुष्मान भारत पर खर्च कर रही है। इसके मुकाबले पंजाब ने अपने सिर्फ 3 करोड़ निवासियों के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया है।
अगर प्रति व्यक्ति निवेश की बात करें तो पंजाब का खर्च केंद्र से लगभग दस गुना ज्यादा बैठता है। इसका सीधा मतलब है कि पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया है और अपने नागरिकों के इलाज पर कोई समझौता नहीं किया है।
₹5 लाख बनाम ₹10 लाख: कवरेज में पंजाब ने मारी बाजी
Mukhyamantri Sehat Yojana के तहत पंजाब के हर परिवार को प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर मिलता है। इसमें हृदय रोग, कैंसर, गुर्दा रोग, अस्थि संबंधी उपचार और दुर्घटना से जुड़ी गंभीर स्थितियों सहित 2,300 से ज्यादा उपचार पैकेज शामिल हैं। इसके मुकाबले आयुष्मान भारत सिर्फ ₹5 लाख तक का कवर देती है और उसमें भी सिर्फ 1,900 पैकेज शामिल हैं।
आज के दौर में जब एक गंभीर बीमारी का इलाज आसानी से ₹5-7 लाख तक पहुंच जाता है, तो ₹5 लाख का कवर कई बार अपर्याप्त साबित होता है। ऐसे में ₹10 लाख का कवर परिवारों को वह सुरक्षा देता है जो उन्हें अस्पताल के बिल की चिंता से मुक्त कर देती है।
सबसे बड़ा अंतर: न कोई सूची, न कोई बहिष्करण
Mukhyamantri Sehat Yojana की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई पात्रता सूची नहीं है। पंजाब का हर निवासी, चाहे उसकी आय कुछ भी हो, इस योजना का लाभ उठा सकता है। इसके ठीक उलट आयुष्मान भारत सिर्फ उन्हीं परिवारों को कवर करती है जिनका नाम एसईसीसी (सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना) डाटाबेस में दर्ज है।
इसका नतीजा यह है कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा, खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के वे परिवार जो इस डेटाबेस में शामिल नहीं हैं, आयुष्मान भारत के दायरे से बाहर रह जाते हैं। ये वे लोग हैं जो न इतने गरीब हैं कि बीपीएल सूची में आएं और न इतने अमीर कि निजी बीमा का खर्च उठा सकें। पंजाब की योजना इसी खाई को पाटती है और हर नागरिक को बिना भेदभाव इलाज का अधिकार देती है।
मोगा में 98 साल की बुजुर्ग को मिला कैशलेस कैंसर इलाज
Mukhyamantri Sehat Yojana की ताकत सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी नजर आ रही है। मोगा में 98 वर्षीय बुजुर्ग महिला मुख्तियार कौर को इस योजना के तहत कीमोथेरेपी सहित विशेष कैंसर उपचार पूरी तरह कैशलेस मिला। इस उम्र में जहां लगातार इलाज की जरूरत होती है, वहां सेहत कार्ड ने यह सुनिश्चित किया कि इलाज बिना किसी देरी और आर्थिक दबाव के शुरू हो सके।
मुख्तियार कौर जैसी कहानियां दिखाती हैं कि यह योजना कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में लोगों की जिंदगी बचा रही है। जब एक 98 साल की बुजुर्ग को बिना एक रुपया खर्च किए कैंसर का इलाज मिल सकता है, तो यह किसी भी सरकारी योजना की सबसे बड़ी सफलता है।
आसान रजिस्ट्रेशन: न कागजी कार्रवाई, न भागदौड़
Mukhyamantri Sehat Yojana में शामिल होना भी बेहद आसान है। जहां आयुष्मान भारत में पहले यह चेक करना पड़ता है कि परिवार का नाम एसईसीसी सूची में है या नहीं, और सूची से बाहर के परिवारों को पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं, वहीं पंजाब की योजना में सिर्फ आधार या वोटर आईडी के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
किसी भी तरह के आय प्रमाण या पेशे के दस्तावेज की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं, प्रशिक्षित युवा क्लब के सदस्य घर-घर जाकर लोगों को पंजीकरण में मदद कर रहे हैं और सेहत कार्ड सीधे उनके घर पहुंचा रहे हैं। अब तक 9 लाख से ज्यादा सेहत कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 900 से अधिक अस्पतालों में इस कार्ड से इलाज हो रहा है।
एक अस्पताल का बिल पूरे परिवार को कर्ज में डाल सकता है
भारत जैसे देश में जहां एक गंभीर बीमारी का अस्पताल बिल ही किसी परिवार को कर्ज के बोझ तले दबा देता है, Mukhyamantri Sehat Yojana और आयुष्मान भारत के बीच का अंतर सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि वैचारिक है। एक मॉडल पात्रता के आधार पर सेवा को सीमित करता है और दूसरा इसे हर नागरिक का अधिकार बनाता है।
डॉ. बलबीर सिंह ने इस बात को बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा: “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सेहत योजना इस सिद्धांत पर आधारित है कि स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए, न कि केवल चुनिंदा लोगों तक। प्रति व्यक्ति अधिक निवेश के माध्यम से पंजाब यह सुनिश्चित कर रहा है कि इलाज तक पहुंच पात्रता या आय नहीं, बल्कि आवश्यकता से तय हो।”
जानें पूरा मामला
आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने पंजाब में सत्ता संभालने के बाद से स्वास्थ्य सेवा को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बनाया। मुख्यमंत्री सेहत योजना जनवरी 2026 में लॉन्च की गई थी और इसे 2026-27 के बजट में ₹2,000 करोड़ का आवंटन दिया गया है। यह योजना हाइब्रिड मॉडल पर काम करती है जिसमें ₹1 लाख का कवर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी देती है और बाकी ₹10 लाख तक का कवर पंजाब सरकार अपने राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के जरिए सीधे वहन करती है। जो परिवार पहले से आयुष्मान भारत के तहत कवर हैं, उन्हें इस योजना के तहत अतिरिक्त ₹5 लाख का टॉप-अप मिलता है, जिससे उनका कुल कवर ₹10 लाख हो जाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Mukhyamantri Sehat Yojana पंजाब के हर परिवार को बिना किसी शर्त ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज देती है, जबकि आयुष्मान भारत ₹5 लाख तक सीमित है।
- पंजाब ने 3 करोड़ निवासियों पर ₹2,000 करोड़ खर्च किए हैं, जो प्रति व्यक्ति केंद्र से करीब दस गुना ज्यादा निवेश है।
- योजना में 2,300 से ज्यादा उपचार पैकेज शामिल हैं और 900 से अधिक अस्पतालों में कैशलेस इलाज उपलब्ध है।
- इस योजना में कोई पात्रता सूची नहीं है: न आय की शर्त, न दस्तावेजों की भागदौड़, सिर्फ आधार या वोटर आईडी से रजिस्ट्रेशन हो जाता है।








