Moran Highway Airstrip China : बड़ी खबर आपको बता रहे हैं। चीन को रक्षा विशेषज्ञ ने एक बड़ी चेतावनी दी है। चीन बॉर्डर के पास राफेल उतारे गए भारतीय एयरफोर्स की तरफ से और इसके बाद एयर पावर डॉक्ट्रिन बदल गई है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने बड़ी चेतावनी यहां पर दी है।
14 फरवरी 2026 को जिस तरीके से असम के मोरान एयर स्ट्रिप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विमान लैंड करता है, राफेल लैंड करते हैं, उसके बाद से वहां से 300 किलोमीटर दूर जो चीन की सीमा है, वहां तक उसकी गर्जना पहुंची है और चीन में भी कहीं न कहीं इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई होगी।
पूर्वोत्तर की पहली Highway-Based Emergency Landing Facility
काफी कुछ 14 फरवरी को हमें देखने को मिला। जो तस्वीरें सामने आईं, वो बेहद अहम तस्वीरें थीं और बेशक उस पर चर्चा चीन में भी हो रही होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो एयरक्राफ्ट C-130J Super Hercules है, वो लैंड करता है।
जिस तरीके से डिब्रूगढ़ के मोरान एक्सप्रेसवे पर हाईवे है, उसी पर अब हमने एयर स्ट्रिप बना लिया है। इमरजेंसी सिचुएशन में ये बहुत काम आने वाला है। हमने देखा कि तेजस हो, सुखोई हो, यहां तक कि राफेल हो और कई सारे हेलीकॉप्टर्स भी वहां पर उतरते हैं, टेक ऑफ करते हैं, लैंडिंग करते हैं।
इसके बाद से ही भारत ने चीन और बांग्लादेश को भी संदेश दे दिया है कि हम अपनी सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं।
Brahma Chellaney का बड़ा बयान
रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी की तरफ से यह बड़ा बयान आया। उन्होंने कहा कि जो एयर पावर डॉक्ट्रिन है, अब पूरी तरीके से बदल गया है।
पहले हमने देखा है कि किस तरीके से चीन अपने वाले हिस्से में किस तरीके से चाहे वो एयर स्ट्रिप का निर्माण करना हो, चाहे वो एयरपोर्ट बनाना हो, टेम्पररी हाईवे बनाना हो, तो तमाम चीजें चीन लगातार डेवलपमेंट करता रहा। भारत इसमें पीछे रहा और अब भारत ने भी यह बड़ा फैसला लिया है।
ब्रह्म चेलानी ने हाइलाइट किया है कि ऐसी Emergency Landing Facilities तेजी से सैन्य तैनाती को सक्षम बनाती हैं। उन्होंने नोट किया कि एक C-130J विमान लैंड कर सकता है, एक इन्फैंट्री प्लाटून या हल्के बख्तरबंद वाहनों को उतार सकता है, और जल्दी से फिर से हवा में उड़ सकता है, प्रभावी रूप से एक हाईवे सेक्शन को कम समय में एक फॉरवर्ड स्टेजिंग ग्राउंड में बदल देता है।
इसके बाद से अब ब्रह्म चेलानी का यह कहना है कि इस एयर स्ट्रिप से भारतीय सेना काफी मजबूत होगी।
चीन और बांग्लादेश को संदेश
ये सारी चीजें ऐसे वक्त में हुई हैं जब हमने देखा है कि बांग्लादेश भी एक नए दुश्मन के तौर पर धीरे-धीरे उभर रहा था। हालांकि अब वहां पर सत्ता परिवर्तन हुआ है। अब देखना होगा कि किस तरीके से वहां की सरकार का भारत को लेकर रुख रहता है।
लेकिन हमने पिछले दिनों देखा था किस तरीके से तीस्ता मुद्दे पर भी भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव हुआ। इसके अलावा हमने देखा कि चिकन नेक को लेकर लगातार चीन और बांग्लादेश साजिश रचते रहे।
इसी वजह से यह एयर स्ट्रिप बहुत अहम हो जाता है, क्योंकि कल को अगर हमें अपने लड़ाकू विमान उतारने हों – युद्ध की भी नौबत छोड़ देते हैं – अगर कोई प्राकृतिक आपदा भी आती है तो ऐसे सिचुएशन में यह एयर स्ट्रिप बहुत अहम हो जाएगी।
Moran Bypass की तकनीकी विशेषताएं
मोरान बाईपास पर जो ये पूरी एयर स्ट्रिप बनी है, ये 4.2 किलोमीटर लंबी है और इसे भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर बनाया गया है। खास बात यह है कि यहां पर 74 टन तक के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 40 टन तक के फाइटर जेट आराम से उतर सकते हैं।
यह तस्वीरें हमने जो देखी थीं कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री का C-130J Super Hercules एयरक्राफ्ट जब लैंड करता है – और भारत के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनते हैं कि किसी हाईवे पर बने एयर स्ट्रिप पर उनका प्लेन लैंड करता है।
तो ये भी अपने आप में संदेश देना है। देखिए, प्रधानमंत्री का प्रोटोकॉल बहुत बड़ा होता है और वो एयर स्ट्रिप पर उतरकर यह संदेश देना चाहते हैं कि भाई देखो, ये हमारी सुरक्षा के लिहाज से भी कितना अहम है, क्योंकि कोई भी प्रधानमंत्री यूं ही रिस्क नहीं लेगा।
Air Power Doctrine में बदलाव
ब्रह्म चेलानी ने लिखा कि यह ELF भारत की एयर पावर डॉक्ट्रिन में एक शांत लेकिन गहरा बदलाव दर्शाता है। असली ऑपरेशनल रिडंडेंसी का निर्माण – इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर कोई दुश्मन प्रमुख एयरबेस पर हमला करने में सफल हो जाए।
क्योंकि अक्सर जब युद्ध की नौबत आती है तो सड़कों को निशाना बनाया जाता है, पुलों को निशाना बनाया जाता है जिससे कि सेना की मूवमेंट को प्रभावित कर दें। इसके अलावा एयरबेस को निशाना बनाया जाता है।
इसीलिए देश में मौजूदा समय में 28 तकरीबन एयर स्ट्रिप ऐसे बनाए जा चुके हैं। राजस्थान में भी है, उत्तर प्रदेश में भी है, कहीं और राज्यों में भी है कि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जाए। अगर एयरबेस में कहीं कोई क्षति होती है तो ऐसे सिचुएशन पर आप उनका भी इस्तेमाल कर लें।
हवाई युद्ध का बुनियादी सिद्धांत
उन्होंने कहा कि इस नए ELF से भारतीय वायुसेना अपनी लड़ाई जारी रख सकेगी और जरूरत पड़ने पर हवाई युद्ध का बुनियादी सिद्धांत भी यह है कि युद्ध की शुरुआत दुश्मन की एयर डिफेंस और एयर फील्ड्स को निष्क्रिय करके होती है।
तो ये Operation Sindoor का भी जिक्र किया जाता है, क्योंकि जिस तरीके से Operation Sindoor के बाद हमें भी पता लगा कि हमें और कहां-कहां तैयारियां करनी हैं, कहां मजबूती करनी है और इसीलिए भारत ने ये बनाया है।
रणनीतिक महत्व: चीन से 300 KM
जिस तरीके से यहां पर ये मोरान एयर स्ट्रिप पर प्रधानमंत्री का जो एयरक्राफ्ट है वो लैंड करता है और तमाम जो लड़ाकू विमान हैं उनको लैंड करवाके जिस तरीके से चीन को एक मैसेज देने की कोशिश की गई है – महज 300 किलोमीटर की दूरी जो है वो इस एयर स्ट्रिप से चीन बॉर्डर तक की है।
तो कुछ ही मिनटों में जो ये दूरी है वो भी एक्शन के समय में तय हो सकती है। यानी कि हम हर तरफ से और खासकर पूर्वोत्तर वाले जो हमारे राज्य हैं, वो बहुत ज्यादा सेंसिटिव इलाका हमेशा से माना जाता है।
मोरान ELF को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह भारत की पूर्वी सीमाओं के निकट है, चीन सीमा से लगभग 300 किमी और म्यांमार सीमा से 200 किमी दूर है।
अरुणाचल और LAC तनाव
अरुणाचल पर जिस तरीके से चीन की हमेशा से नजर है और वो जो उलजुलूल दावे बीजिंग से किए जाते हैं अरुणाचल को लेकर, उस पर भी हम गहनता से बातचीत करते हैं।
लद्दाख वाले क्षेत्र में जो चीन के साथ हमारा तनाव था, हमने कम किया है, सिर्फ बातचीत से सुलझाया है। ऐसे ही अरुणाचल का जो तनाव है वो भी हम आने वाले समय में बातचीत के जरिए पहले सुलझाने की कोशिश करेंगे।
यह सुविधा पूर्वी थिएटर में भारत की परिचालन तत्परता को मजबूत करने और चीन के साथ Line of Actual Control (LAC) के पास तेजी से एयरलिफ्ट क्षमता बढ़ाने के रूप में देखी जाती है, खासकर 2020 की सीमा संकट के संदर्भ में।
सैन्य आधुनिकीकरण और तैयारी
हालांकि चीन से उलझना कहीं न कहीं ठीक नहीं होगा क्योंकि चीन को ये समझ आ रहा है कि भारत कितना जरूरी है और हम भी आज वैश्विक परिस्थितियों में तमाम जो पड़ोसी हैं उनको साथ लेकर चलना चाहते हैं। इसलिए हम बहुत ज्यादा तनाव, बहुत ज्यादा विवाद नहीं चाहते।
लेकिन फिर भी अगर जरूरत पड़ती है तो हमारी जो तीनों सेनाएं हैं – भारतीय वायुसेना हो, थल सेना हो और इसी के साथ जो नेवी हो, हमारी नौसेना हो – वो पूरी तरीके से तैयार है।
इसी के साथ हम फ्रांस से आने वाले समय में जो 114 राफेल हम खरीदने जा रहे हैं और राफेल हमारे बेड़े में आ जाएंगे, उससे बहुत ज्यादा मजबूती हमें मिलने वाली है।
S-400 और अन्य रक्षा प्रणालियां
हमने देखा था कि इस बार 15 अगस्त को 2025 में जब लाल किले पर स्पीच देते हैं प्रधानमंत्री, तब उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में हम अपने सीमावर्ती राज्यों में S-400 की तैनाती भी करेंगे। बड़े पैमाने पर हम तैनात करेंगे।
तो इस तरीके से लगातार कहीं न कहीं भारत अपनी सेना को मजबूत कर रहा है। ना सिर्फ राफेल बल्कि और सारी जो चीजें हैं – SCALP मिसाइलें हैं, तमाम बहुत सारी जो चीजें हैं वो हमारे पास आ रही हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
ये कहीं न कहीं दिखाता है कि हमारी मजबूती, हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर जो हैं वो कितने मजबूत हो रहे हैं। इसी के साथ चीन को काउंटर करने के लिए हम यह देख रहे हैं कि कैसे हम बॉर्डर के नजदीक अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करें। इस पर भी हम काम कर रहे हैं।
इसी के साथ पहली रेल एंड रोड जो परियोजना है वो भी असम में पास हो चुकी है। समुद्र के नीचे जो रोड है और जो रेल नेटवर्क है उसको स्थापित किया जाएगा।
हम बहुत तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ा रहे हैं और खासकर सबसे बड़ी बात ये है कि ऐसे राज्यों में जहां पर उन राज्यों की सीमा किसी और देश के साथ लगती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 14 फरवरी 2026 को असम के मोरान में पूर्वोत्तर की पहली Highway-Based Emergency Landing Facility का उद्घाटन
- PM मोदी का C-130J Super Hercules हाईवे पर उतरा, पहले PM जो हाईवे एयर स्ट्रिप पर उतरे
- Rafale, Sukhoi, Tejas जैसे लड़ाकू विमानों ने लैंडिंग और टेक-ऑफ किया
- 4.2 KM लंबी एयर स्ट्रिप, 74 टन तक के ट्रांसपोर्ट और 40 टन तक के फाइटर जेट उतर सकते हैं
- चीन बॉर्डर से महज 300 KM, म्यांमार से 200 KM दूर
- रक्षा विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने कहा – Air Power Doctrine में बदलाव
- देश में 28 ऐसी Emergency Landing Facilities तैयार








