Modi Russia Visit Cancelled : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का बहुप्रतीक्षित Modi Russia Visit Cancelled हो गया है, जो 9 मई को रूस (Russia) की राजधानी मॉस्को (Moscow) में होने वाली विक्ट्री डे परेड (Victory Day Parade) में हिस्सा लेने के लिए तय था। इस दौरे में भारतीय प्रधानमंत्री को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के साथ मंच साझा करना था। लेकिन अब यह कार्यक्रम अचानक स्थगित कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यह फैसला जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पहलगाम (Pahalgam) में हुए हालिया आतंकी हमले और उसके बाद पाकिस्तान (Pakistan) से उपजे कूटनीतिक तनाव की वजह से लिया गया है।
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन (Kremlin) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव (Dmitry Peskov) ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मोदी अब 9 मई को मॉस्को में आयोजित होने वाली विक्ट्री डे परेड में शामिल नहीं होंगे। इस परेड का आयोजन द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) में नाजी जर्मनी (Nazi Germany) पर सोवियत संघ (Soviet Union) की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। यह रूस के लिए बेहद प्रतिष्ठित आयोजन होता है, जिसमें सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन भी किया जाता है।
परेड में हिस्सा लेने के लिए रूस ने कई वैश्विक नेताओं को आमंत्रित किया था, जिनमें चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिनपिंग इस परेड में शिरकत करेंगे और रूस-चीन संबंधों की गहराई का सार्वजनिक प्रदर्शन भी होगा। हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक दौरा रद्द करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि वर्तमान हालात ने मोदी की इस विदेश यात्रा को फिलहाल स्थगित करवा दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले जुलाई 2024 में रूस का दौरा किया था, जब वे लोकसभा चुनावों में तीसरी बार जीत दर्ज कर देश के प्रधानमंत्री बने थे। उस दौरान पुतिन और मोदी के बीच नजदीकी और आपसी समझ का जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला था। लेकिन अब क्षेत्रीय तनाव और पाकिस्तान के साथ संबंधों में आई तल्खी के कारण भारत ने अपने इस दौरे को पुनः विचार के तहत रख दिया है।
रूस के लिए विक्ट्री डे परेड एक गौरवपूर्ण अवसर होता है, जो भारत की रिपब्लिक डे परेड जैसा महत्व रखता है। ऐसे में मोदी का इस आयोजन से दूर रहना निश्चित तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनेगा, खासकर जब चीन जैसे साम्यवादी राष्ट्र से शी जिनपिंग की उपस्थिति वहां तय मानी जा रही है। भारत के इस निर्णय के रणनीतिक और कूटनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।








