MM Naravane Unpublished Book Parliament: सोमवार को संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान अचानक माहौल गरमा गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए चीन की घुसपैठ पर सवाल उठाए। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उनकी तीखी बहस हुई और भारी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही को कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा।
यह टकराव तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने दावा किया कि पूर्व आर्मी चीफ की किताब में लिखा है कि चीनी सेना भारतीय सीमा में घुसपैठ कर रही है। इस बयान ने सदन में भूचाल ला दिया और सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।
राहुल गांधी ने किताब से पढ़ने की मांगी इजाजत
राहुल गांधी ने संसद में कहा कि जो किताब उनके पास है वह गारंटीड ऑथेंटिक है। उन्होंने दावा किया कि यह जनरल नरवणे का संस्मरण यानी मेमोयर है जिसे सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है।
राहुल गांधी ने स्पीकर से अनुरोध किया कि वह इस किताब से सिर्फ पांच लाइनें पढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इन पंक्तियों में जनरल नरवणे ने राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कुछ लिखा है।
इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सांसदों ने उन पर देशभक्त न होने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ की किताब का हवाला दिया।
राजनाथ सिंह ने उठाया सवाल – जब किताब छपी ही नहीं तो कैसा हवाला?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस किताब का राहुल गांधी उल्लेख कर रहे हैं वह अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है।
राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि जब किताब का पब्लिकेशन ही नहीं हुआ है तो इस पुस्तक का उल्लेख संसद में क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी गलत किताब का जिक्र कर रहे हैं।
इस टकराव के बीच सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ और दोनों पक्षों के सांसद एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहे।
स्पीकर ओम बिरला ने की मर्यादा बनाए रखने की अपील
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि संसद में बजट और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा हो रही है इसलिए मुद्दे पर बने रहें।
स्पीकर ने कहा कि यह सदन नियमों से चलता है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि बड़ी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उनसे अपेक्षा है कि वह नियमों का पालन करते हुए बजट पर बात करें।
ओम बिरला ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में भारत-चीन रिश्तों का कोई जिक्र नहीं था। उन्होंने सभी सदस्यों से अभिभाषण पर चर्चा करते हुए सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
राहुल गांधी ने दी सफाई – बात कैरेक्टर की है
स्पीकर की टिप्पणी पर राहुल गांधी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि उनकी बात चीन के बारे में नहीं बल्कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के कैरेक्टर के बारे में है। इस बयान से सदन में और अधिक हंगामा हुआ।
अखिलेश यादव ने किया राहुल गांधी का समर्थन
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात कहने का पूरा हक है।
अखिलेश यादव ने चीन के मुद्दे को बेहद संवेदनशील बताया। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया और जॉर्ज फर्नांडीस का हवाला देते हुए कहा कि ये नेता हमेशा चीन से सावधान रहने की बात कहते थे।
कौन हैं जनरल एमएम नरवणे?
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंने जमीनी ऑपरेशन से लेकर रणनीतिक कमान तक हर स्तर पर काम किया।
वह भारतीय सेना के 28वें थल सेना प्रमुख रहे और 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक इस पद पर अपनी सेवाएं दीं। उनसे पहले यह जिम्मेदारी जनरल बिपिन रावत के पास थी।
सेना प्रमुख बनने से पहले जनरल नरवणे ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, आर्मी ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख और वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं।
वह सिख लाइट इन्फैंट्री से आने वाले तीसरे अधिकारी थे जो सेना प्रमुख बने।
जनरल नरवणे का परिवार और शिक्षा
एमएम नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ। उनका परिवार सेना और वायुसेना से गहराई से जुड़ा है।
उनके पिता मुकुंद नरवणे भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर रहे जबकि उनकी मां सुधा नरवणे ऑल इंडिया रेडियो में उद्घोषिका थीं।
उन्होंने पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी प्रशाला से स्कूली शिक्षा हासिल की। इसके बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खड़कवासला और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्होंने डिफेंस स्टडीज में मास्टर्स और एमफिल किया है और डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज में पीएचडी कर रहे हैं। डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन और आर्मी वॉर कॉलेज महू में भी उन्होंने पढ़ाई की है।
शानदार सैन्य करियर
जनरल नरवणे को जून 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री की सातवीं बटालियन में कमीशन मिला। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की कमान संभाली और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई।
इसके अलावा वह असम राइफल्स के इंस्पेक्टर जनरल (नॉर्थ) भी रहे और पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ ऑपरेशन संभाला।
उन्होंने श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के तहत इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के साथ भी सेवा दी। म्यांमार में भारत के सैन्य अताशे के तौर पर वह तैनात रहे।
दिल्ली एरिया के जीओसी रहते हुए उन्होंने 2017 की गणतंत्र दिवस परेड की कमान भी संभाली।
वर्तमान में कहां हैं जनरल नरवणे?
इस समय एमएम नरवणे पुणे में रहते हैं। उनकी पत्नी वीणा नरवणे शिक्षिका हैं और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनकी दो बेटियां हैं।
विवादित किताब में क्या है?
राहुल गांधी का दावा है कि जनरल नरवणे की इस अप्रकाशित किताब में डोकलाम और चीन की गतिविधियों को लेकर सेना के भीतर की सोच और रणनीति का आकलन दर्ज है।
सरकार का कहना है कि जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई तो उसके कंटेंट को संसद में कोट करना उचित नहीं है।
यही वजह है कि डोकलाम, चीन की घुसपैठ और सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे एक बार फिर संसद में टकराव का हिस्सा बन गए।
आम जनता पर क्या असर?
यह विवाद सीधे तौर पर देश की सीमा सुरक्षा से जुड़ा है। अगर पूर्व सेना प्रमुख की किताब में वाकई चीन की घुसपैठ के बारे में कुछ लिखा है तो यह आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय है।
इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या सरकार सुरक्षा संबंधी जानकारी जनता से छुपा रही है। दूसरी तरफ सरकार का पक्ष है कि अप्रकाशित किताब के आधार पर संसद में बहस करना उचित नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points)
- संसद में हंगामा: राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देकर चीन की घुसपैठ पर सवाल उठाए
- राजनाथ सिंह का जवाब: रक्षा मंत्री ने कहा कि जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई तो उसका संसद में उल्लेख क्यों किया जा रहा है
- स्पीकर की अपील: ओम बिरला ने सदन की मर्यादा बनाए रखने और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करने की अपील की
- कौन हैं नरवणे: जनरल एमएम नरवणे भारतीय सेना के 28वें थल सेना प्रमुख रहे और 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक इस पद पर सेवाएं दीं








