Miniratna Status – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यंत्र इंडिया लिमिटेड को ‘मिनीरत्न’ श्रेणी-I का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय उस रक्षा कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो महज चार वर्षों में घाटे में चल रहे सरकारी संगठन से लाभ कमाने वाली कंपनी में बदल गई। इस दर्जे के साथ अब कंपनी को सरकारी मंजूरी के बिना 500 करोड़ रुपये तक के पूंजीगत निर्णय लेने का अधिकार मिल गया है।
रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के इस उपक्रम की यात्रा उल्लेखनीय रही है। 2021-22 में जब कंपनी की स्थापना हुई थी, तब इसकी बिक्री महज 956.32 करोड़ रुपये थी। लेकिन महज तीन वर्षों में यह आंकड़ा तीन गुना से अधिक बढ़कर 3,108.79 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
रक्षा मंत्री ने कंपनी को इस बदलाव पर बधाई देते हुए प्रबंधन द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यंत्र इंडिया ने न केवल अपने कारोबार को बढ़ाया है, बल्कि स्वदेशीकरण को भी अधिकतम करने में सफलता हासिल की है।
घाटे से मुनाफे की ओर: चार साल का सफर
यंत्र इंडिया लिमिटेड की कहानी एक सरकारी कंपनी के पुनर्जीवन का शानदार उदाहरण है। जब 2021 में पूर्ववर्ती आयुध कारखाना बोर्ड (ओएफबी) का निगमीकरण हुआ था, तब सात नई रक्षा कंपनियां बनाई गई थीं। यंत्र इंडिया उन्हीं में से एक है।
पहले वर्ष में कंपनी की हालत चुनौतीपूर्ण थी। लेकिन प्रबंधन ने रणनीतिक सुधार करते हुए उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया। नतीजा यह रहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी की बिक्री 3,108.79 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
निर्यात में जबरदस्त उछाल: शून्य से 321 करोड़
यंत्र इंडिया की सबसे बड़ी सफलता निर्यात के मोर्चे पर देखने को मिली है। 2021-22 में कंपनी का निर्यात शून्य था। लेकिन तीन वर्षों में यह आंकड़ा 321.77 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यह उपलब्धि उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब भारत सरकार रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है। यंत्र इंडिया के उत्पादों में अब वैश्विक बाजार में मांग बढ़ रही है।
कंपनी के प्रमुख उत्पादों में कार्बन फाइबर कंपोजिट, मध्यम और बड़े कैलिबर गोला-बारूद के लिए असेंबली उत्पाद, बख्तरबंद वाहनों के लिए कंपोनेंट्स, तोपखाने और मुख्य युद्धक टैंकों (एमबीटी) के लिए असेंबली प्रोडक्ट्स, ग्लास कंपोजिट और एल्युमीनियम मिश्र धातु शामिल हैं।
मिनीरत्न दर्जा: क्या होगा फायदा?
मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा मिलने से यंत्र इंडिया के बोर्ड को अब काफी वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता मिल जाएगी। अब कंपनी का बोर्ड नए प्रोजेक्ट, आधुनिकीकरण, उपकरण खरीद और अन्य पूंजीगत निवेश पर 500 करोड़ रुपये तक खर्च करने का निर्णय खुद ले सकता है।
पहले इन फैसलों के लिए रक्षा उत्पादन विभाग या वित्त मंत्रालय से मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिसमें समय लगता था। अब यह प्रक्रिया तेज हो जाएगी और कंपनी बाजार की मांग के अनुसार तेजी से फैसले ले सकेगी।
इससे रक्षा उत्पादन और निर्यात में तेज विकास की संभावना बनी है। कंपनी अब नई तकनीकों में निवेश करने, क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में प्रवेश करने में अधिक तेजी दिखा सकेगी।
सात में से चौथी कंपनी को मिला यह सम्मान
यंत्र इंडिया लिमिटेड उन सात नवगठित रक्षा उपक्रमों में से एक है, जो रक्षा उत्पादन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करते हैं। ये सभी कंपनियां अनुसूची ‘ए’ की श्रेणी में आती हैं।
मई 2025 में रक्षा मंत्री ने इनमें से तीन कंपनियों – मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड और इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड को पहले ही मिनीरत्न-I का दर्जा दे दिया था। अब यंत्र इंडिया इस सूची में चौथी कंपनी बन गई है।
यह क्रम दर्शाता है कि आयुध कारखाना बोर्ड के निगमीकरण का निर्णय सही साबित हो रहा है। इन कंपनियों को मिली स्वायत्तता से उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
यह निर्णय सरकार की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण सरकार की प्राथमिकता रही है।
भारत अब रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में काम चल रहा है।
यंत्र इंडिया जैसी कंपनियों को मिली स्वायत्तता से यह लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकेगा। जब सरकारी कंपनियां व्यावसायिक दक्षता के साथ काम करेंगी, तो वे न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेंगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
निगमीकरण: एक सुधारवादी कदम
2021 में आयुध कारखाना बोर्ड के निगमीकरण का निर्णय रक्षा क्षेत्र में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। पुराने ढांचे में कारोबार, दक्षता और नवाचार में कई चुनौतियां थीं।
निगमीकरण के बाद सात नई कंपनियों को कार्यात्मक स्वायत्तता, बेहतर प्रबंधन और व्यावसायिक दृष्टिकोण मिला है। इसका नतीजा यह है कि इन कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन तेजी से सुधर रहा है।
यंत्र इंडिया का उदाहरण साबित करता है कि जब सरकारी कंपनियों को सही दिशा, स्वायत्तता और व्यावसायिक लक्ष्य दिए जाते हैं, तो वे न केवल लाभ कमा सकती हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।
आम आदमी पर प्रभाव
यंत्र इंडिया को मिनीरत्न का दर्जा देने का फायदा सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को होगा। जब देश में रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ेगा, तो आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचेगी।
साथ ही, रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यंत्र इंडिया जैसी कंपनियों में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है।
निर्यात में वृद्धि से विदेशी मुद्रा की आमदनी भी बढ़ेगी, जो देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। यह सब मिलकर आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव रखेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा दिया
• कंपनी की बिक्री चार वर्षों में 956.32 करोड़ से बढ़कर 3,108.79 करोड़ रुपये हो गई
• निर्यात शून्य से 321.77 करोड़ रुपये तक पहुंचा
• मिनीरत्न दर्जे से कंपनी को 500 करोड़ रुपये तक के पूंजीगत निर्णय लेने की स्वायत्तता मिलेगी
• यह सात नवगठित रक्षा उपक्रमों में से चौथी कंपनी है जिसे यह दर्जा मिला








