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The News Air - NEWS-TICKER - Budget 2026 Punjab Ignored: लोकतंत्र-संघवाद पर खतरा, चीमा का आरोप

Budget 2026 Punjab Ignored: लोकतंत्र-संघवाद पर खतरा, चीमा का आरोप

केंद्रीय बजट 2026 में पंजाब को पूरी तरह नजरअंदाज करने का आरोप, किसानों-शिक्षा-स्वास्थ्य पर चोट।

The News Air Team by The News Air Team
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026
in NEWS-TICKER, पंजाब
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Harpal Singh Cheema
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Budget 2026 Punjab : पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर केंद्रीय बजट 2026 में पंजाब की जरूरतों और कुर्बानियों को पूरी तरह नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बजट में कहीं भी पंजाब का कोई जिक्र नहीं है और न ही लंबे समय से बकाया पड़े 8,500 करोड़ रुपये के ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) का कोई हवाला दिया गया है।

बजट-2026 को शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, गरीब, व्यापारी और पंजाब की सुरक्षा विरोधी करार देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का बोझ उठाने, बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने और आरडीएफ से संबंधित जिम्मेदारियों को निभाने के बावजूद पंजाब को एक बार फिर अपने स्तर पर सभी प्रबंध करने के लिए मजबूर किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट में आम लोगों के लिए कोई राहत नहीं है और लगातार 12वें साल भी केंद्र की ओर से कोई ठोस सहायता नहीं दी गई।

आज यहां पंजाब भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह बजट देश के लिए बेमिसाल कुर्बानियां देने वाले राज्य पंजाब को विकास की पटरी से उतारने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने कहा, ‘केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा की मानसिकता देश के लोकतंत्र और खासकर पंजाब के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। केंद्रीय बजट 2026 शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों, गरीबों, व्यापारियों तथा पंजाब की सुरक्षा विरोधी है। इस बजट के माध्यम से, देश के लिए बेमिसाल कुर्बानियां देने वाले पंजाब के विकास की पटरी से उतारने की एक साजिश रची गई है।’

वित्त मंत्री ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए लगातार 12वें बजट में पंजाब को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री को दिए गए मेमोरेंडम को अनदेखा किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब देश के लिए सीना तानकर खड़ा होता आया है, पंजाब ने केंद्रीय फूड पूल में अपना योगदान कभी कम नहीं किया, बल्कि हर साल बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि देश के अनाज भंडार को बढ़ाने के कारण पंजाब के 117 ब्लॉक डार्क जोन में जा चुके हैं।

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16वें वित्त आयोग को पूरी तरह नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र ने राज्यों के सामने मौजूद वित्तीय तनाव के बावजूद राज्यों की खराब स्थिति को पूरी तरह अनदेखा किया है और राज्यों के हिस्से को बढ़ाने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि वर्टिकल डेवोल्यूशन (टैक्स पूल में सभी राज्यों का कुल हिस्सा) 41 प्रतिशत पर ही रखा गया है और कोई बदलाव नहीं किया गया। 16वें वित्त आयोग से कोई राजस्व घाटा अनुदान नहीं है। 15वें वित्त आयोग ने इन अनुदानों की सिफारिश की थी। एसडीआरएफ की शर्तें बहुत अधिक सीमित हैं और आपदाओं को प्रभावी ढंग से कम करने व प्रबंधन करने में पंजाब जैसे राज्य को प्रभावित करेंगी।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक बार फिर पंजाब के किसानों की जायज चिंताओं को नजरअंदाज किया है, जिससे उसके किसान-हितैषी होने के खोखले दावों की पोल खुल गई है। उन्होंने कहा कि बजट 2026 में कृषि आधारभूत ढांचा फंड में कोई वृद्धि नहीं की गई और न ही मंडी के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस सहायता दी गई है, जिससे कृषि प्रधान राज्यों को अपने भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट-2026 में कृषि आधारभूत ढांचा फंड में वृद्धि या मंडी आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के बारे में पंजाब के किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि राज्यों को अपने फंडों के साथ ही विकास करना होगा। बजट में उच्च-मूल्य वाली फसलों के विकास बारे ज़िक्र हुआ परन्तु पंजाब को पूरी तरह अनदेखा रखा।

पंजाब के वित्त मंत्री ने बताया कि पंजाब का किसान देश का पेट भरता है, फिर भी केंद्र सरकार उन प्रणालियों में निवेश को लगातार नजरअंदाज कर रही है जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। वित्त मंत्री ने उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनाए गए चुनिंदा दृष्टिकोण की भी आलोचना की। जबकि बजट में नारियल, काजू, चंदन और ड्राई फ्रूट्स जैसी फसलों का जिक्र है, लेकिन उत्तरी भारत के किसानों के लिए कुछ भी नहीं है जो अपनी कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल फसलों पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि यह बजट स्पष्ट रूप से केंद्र के पक्षपात और अनाज पैदा करने वाले राज्यों, खासकर पंजाब के किसानों के प्रति उसकी लगातार उदासीनता को दर्शाता है। ये किसान सम्मान, सहयोग और उचित निवेश के हकदार हैं, खोखले नारों के नहीं।

सब्सिडी में कटौती और आम नागरिकों को कोई राहत न देने की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यूरिया सब्सिडी पिछले साल 1,26,475 करोड़ से घटाकर 1,16,805 करोड़ कर दी गई है। इस बजट में ‘आम आदमी’ के लिए कुछ नहीं है, जबकि आज के समय में जब महंगाई आम आदमी की बचत को खा रही है और आय नहीं बढ़ रही, तो टैक्स में जीरो राहत उचित नहीं है। वास्तव में, भारत सरकार ने एसएसटी (सिक्योरिटीज़ ट्रांजेक्शन टैक्स) बढ़ा दिया है जो आम आदमी पर बुरा प्रभाव डालेगा। इस वृद्धि से बाद में लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कोई राहत नहीं है। यह आम आदमी को हर तरफ से निचोड़ने जैसा है।

रक्षा के बारे में बोलते हुए पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि केंद्रीय वित्त मंत्री भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत बनाने और पिछले साल पाकिस्तान के साथ तनाव के मद्देनजर रक्षा बजट में अर्थपूर्ण वृद्धि के लिए बड़ी योजनाओं की घोषणा करेंगे। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने भाषण में रक्षा का जिक्र सिर्फ चार बार किया।

प्रधानमंत्री-विश्वकर्मा योजना का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि यह पिछले साल बहुत जोर-शोर से शुरू की गई थी ताकि पारंपरिक कारीगरों और दस्तकारों को पूर्ण, आधुनिक सहायता प्रदान की जा सके, कौशल प्रशिक्षण दिया जा सके, लेकिन इस संबंध में बजट 5,100 करोड़ से घटाकर 3,861 करोड़ कर दिया गया। एक तरफ सरकार दावा करती है कि यह युवा-शक्ति बजट है जिसका उद्देश्य विरासती उद्योगों को विकसित करना है और दूसरी तरफ उसी योजना के लिए बजट में कटौती की जाती है।

शिक्षा के बारे में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बजट को बहुत निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से कम (8 प्रतिशत) वृद्धि हुई है। बजट में पिछले साल की तुलना में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसमें पीएम-श्री योजना के लिए 7,500 करोड़ रुपये रखे गए। पूंजी निर्माण के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) के बारे में उन्होंने कहा कि इस योजना का कोई जिक्र नहीं है। सभी राज्यों ने पूंजीगत व्यय के उच्च स्तर को बनाए रखने के लिए योजना के दायरे का अर्थपूर्ण विस्तार करने की मांग की थी लेकिन केंद्र ने इस मांग को नजरअंदाज कर दिया।

स्वास्थ्य के मामले में उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के बजट में कोई बदलाव नहीं किया गया जो 9,500 करोड़ रुपये है। स्वच्छ भारत मिशन का बजट पिछले साल 5,000 करोड़ से आधा होकर 2,500 करोड़ रह गया। मनरेगा के तहत भी बजट 88,000 करोड़ से बढ़कर 95,692 करोड़ हो गया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सीमा बुनियादी ढांचा और प्रबंधन योजना (केंद्रीय योजना) का बजट पिछले साल के 5,597 करोड़ से घटाकर वर्तमान बजट में 5,577 करोड़ कर दिया गया है।

बजट के सार के बारे में बात करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 पंजाब और इसके लोगों के प्रति केंद्र की उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘इस बजट में पंजाब के योगदान और इसकी चुनौतियों को नजरअंदाज किया गया है और इसके भविष्य को कमजोर करने की चाल चली गई है। यह बजट न तो देश की सुरक्षा को मजबूत करता है और न ही किसानों, मजदूरों, युवाओं या राज्यों का समर्थन करता है। पंजाब और इसके लोग इससे कहीं बेहतर बजट के हकदार हैं।’

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