Mansa Murder Case ने इस वक्त पूरे पंजाब को हिलाकर रख दिया है। 15 अक्टूबर 2026 को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या के बाद राज्यभर में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्कूल बंद, बाजार बंद, हाईवे जाम : गुस्सा हर गली में साफ दिख रहा है। और दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मामले की जड़ में एक ऐसा असला लाइसेंस निकल कर सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔍 यह भी पढ़ें- NIA Raid Mansa: Shehzad Bhatti के कनेक्शन में मानसा के युवक के घर तीसरी बार छापा
मानसा में उस दिन हुआ क्या था
13 अक्टूबर की वो शाम, मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर। परविंदर सिंह झोटा, जो नशे के खिलाफ मुहिम चलाते थे, दुकान मालिक अश्विनी कुमार से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। बहस बढ़ी, और देखते ही देखते गोली चल गई।
झोटा की मौके पर ही मौत हो गई। चार अन्य लोग भी गोलीबारी में घायल हुए। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना फेसबुक लाइव के दौरान रिकॉर्ड हो गई, जिसने मामले को और भड़का दिया।
पुलिस के मुताबिक गोली चलाने से पहले अश्विनी कुमार ने मोबाइल पर अपने परिवार के किसी सदस्य से बात की थी। उसके बाद उसने झोटा पर फायरिंग शुरू कर दी। आरोप यह भी है कि बाजार में भाग रहे झोटा और उसके साथियों पर भी गोलियां चलाई गईं।
पांच केस, फिर भी मिल गया असला लाइसेंस
अब समझने वाली बात है कि अश्विनी कुमार पर पहले से पांच पुलिस केस दर्ज थे। इनमें से तीन केस तो सीधे जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों की अवहेलना से जुड़े थे। इसके बावजूद मानसा प्रशासन ने उसे हथियार का लाइसेंस थमा दिया।
एसएसपी मानसा ने 9 अगस्त 2024 को नंबर 91/एनएएल के तहत लाइसेंस की सिफारिश की, जिसमें पांचों केसों का जिक्र भी था। इसके बावजूद वधीक डिप्टी कमिश्नर ने 21 अगस्त 2024 को लाइसेंस जारी कर दिया, जो 20 अगस्त 2029 तक वैध था।
और यहीं ध्यान देने वाली बात है : अश्विनी के लिए खतरे का आधार सिटी-2 मानसा की एफआईआर नंबर 66 (4 अप्रैल 2024) को बनाया गया। उसे एक पिस्टल (7.62 एमएम) और एक बारह बोर गन रखने की इजाजत मिली, साथ ही एक बार में 50 और साल भर में 100 कारतूस खरीदने का अधिकार भी।
सामान्य तौर पर जिला मजिस्ट्रेट किसी भी पुलिस केस वाले व्यक्ति को लाइसेंस नहीं देते, कई बार तो केस की वजह से रीन्यू तक नहीं करते। समझने वाली बात है कि फिर अश्विनी के मामले में पांचों केस नजरअंदाज कैसे हो गए? क्या किसी सियासी दबाव में यह लाइसेंस जारी हुआ, यह अब जांच का विषय बन गया है।
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 4 अप्रैल 2024 | सिटी-2 मानसा में FIR 66 दर्ज |
| 9 अगस्त 2024 | SSP ने लाइसेंस की सिफारिश भेजी |
| 21 अगस्त 2024 | ADC ने असला लाइसेंस जारी किया |
| 13 अक्टूबर 2026 | इसी लाइसेंसी हथियार से झोटा की हत्या |
SHO सस्पेंड, आरोपी की पत्नी हिरासत में
मामला गरमाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। मानसा थाना सिटी-2 की महिला एसएचओ बेअंत कौर को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। उन्हें लाइन हाजिर करते हुए जिले से बाहर तबादला भी कर दिया गया।
वजह साफ थी : झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले भी कई शिकायतें और नशा तस्करों की जानकारी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल के खिलाफ भी जांच के लिए डीजीपी ऑफिस को सिफारिश भेजी गई है।
इसी बीच आरोपी की पत्नी नीलम रानी को भी हिरासत में लिया गया। मेडिकल स्टोर उसी के नाम पर चल रहा था, और आरोप है कि उसने पति को फरार होने में मदद की। लाडी बरनाला और विपन गर्ग के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। अश्विनी कुमार को पुलिस ने राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया था।
राहत की बात यह रही कि प्रशासन ने आरोपी का घर और दुकान पर बुलडोजर चलवा दिया, हालांकि इसे अवैध निर्माण का मामला बताया गया। लेकिन इसके बाद भीड़ ने दुकान में घुसकर तोड़फोड़ की और आग लगा दी।

आज पूरा पंजाब क्यों है बंद
15 अक्टूबर को झोटा की हत्या के विरोध में पंजाब बंद बुलाया गया। सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक यह बंद रहेगा, सिर्फ अस्पताल, मेडिकल स्टोर, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसी इमरजेंसी सेवाओं को छूट दी गई है।
वहीं, लुधियाना, पठानकोट, गुरदासपुर, बठिंडा, मानसा और जालंधर में प्राइवेट स्कूल-कॉलेज पूरी तरह बंद रहे। सरकारी स्कूलों में छुट्टी नहीं थी, लेकिन छात्र नदारद रहे। किसान संगठनों ने लुधियाना, बठिंडा और मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाले हाईवे जाम कर दिए।
| सेवा | स्थिति |
|---|---|
| प्राइवेट स्कूल-कॉलेज | बंद |
| सरकारी स्कूल | खुले, पर छात्र नदारद |
| बाजार | पूरी तरह बंद |
| टोल प्लाजा | सुबह 8 बजे से मुफ्त |
| अस्पताल-मेडिकल | खुले (इमरजेंसी छूट) |
| हाईवे | कई जगह जाम |
दूसरी ओर, जालंधर, बठिंडा और फरीदकोट में किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। टोल प्लाजा वर्कर्स यूनियन ने भी समर्थन देते हुए राज्यभर के सभी टोल प्लाजा मुफ्त कर दिए।
लुधियाना में प्रदर्शन के दौरान एक और मौत
चिंता का विषय यह भी बन गया कि लुधियाना के शेरपुर चौक पर प्रदर्शन के दौरान बैनर लगाते वक्त करंट लगने से एक युवक जसनदीप सिंह की मौत हो गई। परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है, और उन्होंने प्रशासन व सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
वहीं, झोटा के पिता भीम सिंह ने बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक सीबीआई जांच की मांग पूरी नहीं होती, वे शव नहीं लेंगे। डीआईजी हरजीत सिंह ने परिवार से मुलाकात तो की, लेकिन अंतिम संस्कार को लेकर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।
इस पूरे मामले का असली मतलब क्या है
अगर गौर करें तो यह सिर्फ एक हत्याकांड की कहानी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की एक बड़ी मिसाल भी है। एक ऐसे व्यक्ति को, जिस पर पांच पुलिस केस दर्ज थे, हथियार का लाइसेंस मिल जाना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ा छेद है। इससे साफ होता है कि जब तक असला लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक आम नागरिकों की जान खतरे में ही रहेगी। सवाल उठता है कि क्या यह मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित है, या पूरे पंजाब में इसी तरह के लाइसेंस किसी दबाव में बांटे जा रहे हैं? उम्मीद की किरण बस इतनी है कि अब यह मामला जांच के दायरे में आ गया है, और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
जानें पूरा मामला
परविंदर सिंह झोटा मानसा में एक जाना-पहचाना नाम थे, जो नशे के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे थे। 13 अक्टूबर को जब उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल किया, तो बात बिगड़ गई और गोली चल गई। इसके बाद पूरे पंजाब में गुस्सा भड़क उठा, और यह मामला अब केवल एक हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक नाकामी और असला लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल बनकर उभरा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 13 अक्टूबर को मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या, आरोपी अश्विनी कुमार गिरफ्तार।
- पांच पुलिस केस होने के बावजूद अश्विनी को 21 अगस्त 2024 को असला लाइसेंस जारी हुआ था।
- मानसा सिटी-2 की एसएचओ बेअंत कौर सस्पेंड, आरोपी की पत्नी नीलम रानी हिरासत में।
- 15 अक्टूबर को पूरे पंजाब में बंद, स्कूल-बाजार बंद, हाईवे जाम, लुधियाना में एक प्रदर्शनकारी की मौत।












