Mansa Jhota Murder Case अब सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे पंजाब की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के 12 दिन बीत जाने के बाद भी पोस्टमॉर्टम तक नहीं हो पाया है। झोटा के परिजन और एक्शन कमेटी अब भी मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी बीच शनिवार सुबह CBI ने मानसा के कई मेडिकल स्टोरों पर अचानक रेड कर दी।
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पिता का बड़ा आरोप: SSP को तुरंत करें ट्रांसफर
झोटा के पिता भीम सिंह ने अब सीधे मानसा के SSP वैभव चौधरी पर सवाल उठा दिए हैं। उनका कहना है कि इस हत्याकांड में पुलिस की मिलीभगत भी हो सकती है।
इसलिए उन्होंने मांग की कि SSP को तुरंत प्रभाव से यहां से हटाया जाए। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी, क्योंकि भीम सिंह ने यह भी कहा कि SSP किसी भी बैठक में शामिल न हों।
DSP और SHO की बर्खास्तगी की मांग
भीम सिंह ने सस्पेंड किए जा चुके DSP हरजिंदर सिंह गिल और थाना सिटी-2 की SHO बेअंत कौर को भी तुरंत नौकरी से बर्खास्त करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि परविंदर झोटा की हत्या एक सोची-समझी साजिश के तहत हुई, जिसमें कई पुलिस अधिकारियों का हाथ हो सकता है।
चिंता का विषय यह है कि सस्पेंशन के बावजूद अभी तक इन अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
CBI की सुबह-सुबह मेडिकल स्टोरों पर रेड
इसी बीच हत्या की जांच कर रही CBI ने शनिवार सुबह ही मानसा के कई मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की। यहां प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री और स्टॉक को लेकर गहन पड़ताल की गई।
दिलचस्प बात यह है कि यह रेड ऐसे समय पर हुई, जब परिवार की नाराजगी अपने चरम पर है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी अब दवा तस्करी के एंगल को भी गंभीरता से खंगाल रही है।
SIT बोली: 11 मांगें मानी, फिर भी असंतोष बरकरार
सरकार की बनाई तीन महिला IAS अफसरों की SIT में शामिल IAS अधिकारी अपनीत रियात के मुताबिक, परिवार और एक्शन कमेटी की 11 मांगें पहले ही मान ली गई हैं और इस बारे में लिखित पत्र भी सौंपा जा चुका है।
लेकिन यहां समझने वाली बात है कि सबसे बड़ी दो मांगें, यानी मुख्यमंत्री और डीजीपी का इस्तीफा, अभी भी अटकी हुई हैं। यही वजह है कि बाकी 11 मांगों के बावजूद परिवार और एक्शन कमेटी शांत नहीं हैं।
एक्शन कमेटी सख्त: इस्तीफे बिना बात नहीं बनेगी
एक्शन कमेटी के सदस्य मानिक गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि जब तक मुख्यमंत्री और डीजीपी इस्तीफा नहीं देते, तब तक सरकार से बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकती।
मानिक गोयल ने ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग का भी जिक्र किया। सरकार ने इस पर सहमति तो जताई, लेकिन अभी तक न बजट तय हुआ और न ही कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर इस्तीफे की मांग SIT के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, तो सरकार मंत्रियों की अलग कमेटी बनाकर बातचीत के लिए भेजे।
किसान नेता राकेश टिकैत पहुंचेंगे मानसा
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत विभिन्न राज्यों के किसान नेता आज मानसा पहुंच रहे हैं। वे झोटा के परिवार से मुलाकात कर प्रदर्शन की अगली रणनीति पर चर्चा करेंगे।
उम्मीद की किरण यह है कि बड़े नेताओं की मौजूदगी से शायद सरकार पर दबाव बढ़े और मामला जल्द सुलझे। लेकिन दूसरी ओर, यह भी साफ है कि जब तक मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन थमने वाला नहीं है।
परिवार पर क्या बीत रही, यह समझना जरूरी
भीम सिंह ने भावुक होकर कहा कि उनका परिवार गहरे सदमे में है। इसके बावजूद कुछ लोग उन्हें बोलने के लिए मजबूर कर सोशल मीडिया पर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस परिवार के इकलौते जवान बेटे की हत्या हो जाए, उस पर क्या गुजरती है, यह भी समझने वाली बात है।
12 दिन बाद भी पोस्टमॉर्टम क्यों नहीं, बड़ा सवाल
देखा जाए तो किसी भी हत्याकांड में पोस्टमॉर्टम में इतनी देरी अपने आप में असामान्य घटना है। यह दिखाता है कि मामला सिर्फ एक हत्या तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासन और राजनीति के बीच फंसा हुआ एक गंभीर टकराव बन चुका है। आम जनता के लिए यह सवाल और गहरा हो जाता है कि अगर नशा विरोधी आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट को इंसाफ के लिए 12 दिन इंतजार करना पड़े, तो आम आदमी की शिकायत पर कार्रवाई की रफ्तार कैसी होगी। यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ मानसा तक सीमित न रहकर पूरे पंजाब की राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
क्या है पूरा मामला
नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या के बाद से मानसा में तनाव का माहौल है। परिवार और एक्शन कमेटी का आरोप है कि इस हत्या में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध है। इसी वजह से वे मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं, जबकि सरकार की SIT कुछ अन्य मांगों को मानकर मामला सुलझाने की कोशिश में जुटी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- परविंदर झोटा की हत्या के 12 दिन बाद भी पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ।
- पिता भीम सिंह ने SSP वैभव चौधरी के तबादले की मांग की, पुलिस मिलीभगत का शक जताया।
- CBI ने मानसा के मेडिकल स्टोरों पर रेड कर नशीली दवाओं की जांच की।
- SIT ने 11 मांगें मानीं, लेकिन CM और DGP इस्तीफे पर अभी कोई फैसला नहीं।
- किसान नेता राकेश टिकैत आज मानसा पहुंचकर परिवार से मिलेंगे।













