LPG Cylinder की किल्लत का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई और जेब दोनों पर दिखने लगा है। जौनपुर में गैस सिलेंडर की भारी कमी के चलते लोगों ने वैकल्पिक रास्ता अपनाते हुए इंडक्शन चूल्हे की तरफ रुख कर लिया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक Induction Cooktop की बिक्री में 3 से 4 गुना तक का इजाफा हो चुका है। बढ़ती मांग का फायदा उठाते हुए कंपनियों ने कुछ ही दिनों में दाम 10% तक बढ़ा दिए हैं। इतना ही नहीं, इंडक्शन पर शिफ्ट होने से बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ गई है, जिससे Electricity Bill अब लोगों की नई चिंता बन गया है।
सिलेंडर नहीं मिला तो लोगों ने अपनाया इंडक्शन का रास्ता
LPG Cylinder की जिस तरह देशभर में होड़ मची हुई है, उसके बाद से लोगों ने वैकल्पिक रास्ता ढूंढना शुरू कर दिया है। जौनपुर में स्थिति यह है कि लोग गैस सिलेंडर की कतारों में खड़े-खड़े थककर अब इंडक्शन चूल्हे खरीदने पर मजबूर हो गए हैं। दुकानदारों ने इस बढ़ती मांग को भांपते हुए पहले से ही भारी स्टॉक जमा कर लिया है।
हर वर्ग के ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए बाजार में ₹1,500 से लेकर ₹8,000 तक के ब्रांडेड और सामान्य इंडक्शन चूल्हे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जो परिवार पहले पूरी तरह LPG Cylinder पर निर्भर थे, वे अब इंडक्शन पर खाना बनाने को मजबूर हैं। यह स्थिति बताती है कि गैस की किल्लत ने आम आदमी की रसोई की तस्वीर ही बदल दी है।
आपदा में अवसर: कंपनियों ने 10% बढ़ाए इंडक्शन के दाम
LPG Cylinder की कमी को देखते हुए इंडक्शन बनाने वाली कंपनियों ने “आपदा में अवसर” ढूंढ लिया है। जैसे-जैसे मांग बढ़ी, कंपनियों ने कुछ ही दिनों के अंदर इंडक्शन चूल्हों के दामों में 10% तक की वृद्धि कर दी। यानी पहले जो इंडक्शन सस्ते में मिल रहा था, अब उसके लिए भी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।
आम आदमी एक तरफ सिलेंडर की कालाबाजारी और ब्लैक मार्केटिंग से परेशान है, दूसरी तरफ एलपीजी के बढ़ते दामों ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। ऐसे में जब लोगों ने इंडक्शन का रास्ता चुना तो वहां भी महंगाई ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। यह स्थिति साफ करती है कि आम उपभोक्ता जिधर भी जा रहा है, उसकी जेब कटती ही जा रही है।
Electricity Bill बना नई चिंता: बिजली खपत 345 से बढ़कर 415 मेगावाट पहुंची
LPG Cylinder की किल्लत से इंडक्शन पर शिफ्ट होने का सबसे बड़ा असर अब Electricity Bill पर दिखने लगा है। जौनपुर में फरवरी महीने में एक दिन की अधिकतम बिजली खपत 345 मेगावाट दर्ज की गई थी। लेकिन 5 मार्च को यही खपत अचानक बढ़कर 415 मेगावाट तक पहुंच गई।
अगर पिछले साल से तुलना करें तो मार्च 2024 में अधिकतम बिजली खपत 398 मेगावाट दर्ज की गई थी। यानी इस साल खपत पिछले साल के मुकाबले भी काफी ज्यादा है। एक तरफ लोग सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं और जब उन्होंने वैकल्पिक रास्ता अपनाया तो बिजली बिल की बढ़ती खपत उनकी नई चिंता बन गई है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।
सरकार का बड़ा फैसला: PNG वालों को नहीं मिलेगा घरेलू सिलेंडर
सरकार ने LPG Cylinder की आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि जिन उपभोक्ताओं के पास पाइप से मिलने वाली गैस यानी PNG (Piped Natural Gas) कनेक्शन है, उन्हें फिलहाल घरेलू सिलेंडर नहीं दिया जाएगा।
इससे पहले सरकार ने PNG पर शिफ्ट होने की बात भी कही थी और कहा था कि नए PNG कनेक्शन लेने वालों को छूट भी मिलेगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिस रफ्तार से इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ी है, उससे साफ है कि लोगों ने PNG का इंतजार करने की बजाय तुरंत उपलब्ध विकल्प को चुना है।
जिलापूर्ति अधिकारी ने बताए हालात: 18,594 सिलेंडर का स्टॉक मौजूद
जौनपुर के जिलापूर्ति अधिकारी संतोष विक्रम शाही ने LPG Cylinder की स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में 18,594 सिलेंडर का स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति होने के साथ ही उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिया जा रहा है। डीएसओ ने यह भी कहा कि पहले बुकिंग कराने वाले उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
जमाखोरी रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। आधार कार्ड के जरिए PNG उपभोक्ताओं का डाटा लिया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई PNG कनेक्शन होने के बावजूद सिलेंडर तो नहीं ले रहा। अगर किसी ने जमाखोरी की तो उस पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
अधिकारी मान रहे चिंता, लेकिन किल्लत से कर रहे इनकार
सरकार की ओर से कहा गया है कि स्थिति “थोड़ी चिंतामय” जरूर है और अधिकारियों ने भी इस बात को माना है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ अधिकारी LPG Cylinder की किल्लत की बात को सिरे से नकारते हुए भी नजर आ रहे हैं। यह विरोधाभास आम लोगों की परेशानी और बढ़ा रहा है।
जमीनी हकीकत यह है कि एक तरफ लोग सिलेंडर के लिए घंटों कतार में खड़े हैं, कालाबाजारी और ब्लैक मार्केटिंग जारी है, इंडक्शन की मांग 3-4 गुना बढ़ गई है, बिजली खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन अधिकारी किल्लत मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आम आदमी किसके भरोसे रहे, यह सवाल बना हुआ है।
आम आदमी पर दोहरी मार: सिलेंडर भी महंगा, बिजली बिल भी भारी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा मार आम आदमी पर पड़ रही है। LPG Cylinder मिल नहीं रहा, मिल भी रहा है तो महंगा है। इंडक्शन लिया तो उसके दाम भी 10% बढ़ गए। इंडक्शन पर खाना बनाना शुरू किया तो Electricity Bill आसमान छूने लगा। एक समस्या का समाधान ढूंढो तो दूसरी समस्या सामने खड़ी हो जाती है।
गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए तो हालात और भी मुश्किल हैं। जहां पहले सिर्फ सिलेंडर के खर्च की चिंता थी, वहां अब इंडक्शन खरीदने का खर्च और बढ़ा हुआ बिजली बिल, दोनों मिलकर बजट बिगाड़ रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- जौनपुर में LPG Cylinder की कमी से इंडक्शन चूल्हों की बिक्री 3 से 4 गुना बढ़ी, कंपनियों ने दाम 10% तक बढ़ाए।
- बिजली खपत फरवरी की 345 मेगावाट से बढ़कर 5 मार्च को 415 मेगावाट पहुंची, Electricity Bill बना लोगों की नई चिंता।
- सरकार ने PNG कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को घरेलू सिलेंडर देने पर रोक लगाई, जमाखोरी पर सख्त एक्शन की चेतावनी दी।
- जिलापूर्ति अधिकारी संतोष विक्रम शाही ने बताया कि 18,594 सिलेंडर का स्टॉक मौजूद है और पहले बुकिंग वालों को प्राथमिकता दी जा रही है।








