LPG Crisis India लगातार गहराता जा रहा है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण Strait of Hormuz से तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह बाधित हो गई है। इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत हो गई है। लखनऊ समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत सरकार के पास इस संकट से निपटने के लिए आखिर कौन-कौन से विकल्प हैं?
Strait of Hormuz है पूरे संकट की जड़
LPG Crisis India का मूल कारण Strait of Hormuz है। विदेश मामलों के जानकार संजीव जी के मुताबिक, भारत का जो ऑयल और गैस का इंपोर्ट होता है, उसका 50 से 70 प्रतिशत तक का हिस्सा Strait of Hormuz से होकर आता है। ईरान ने इस जलमार्ग को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी है और साफ कहा है कि किसी भी देश को यहां से एक लीटर भी तेल ले जाने नहीं दिया जाएगा।
जब इतने बड़े पैमाने पर ऊर्जा सप्लाई बाधित हो जाए तो उसका असर सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंचना स्वाभाविक है। यही कारण है कि शहरों में गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों में अफरातफरी का माहौल बना हुआ है।
7 मार्च से बढ़ चुके हैं LPG Cylinder के दाम
LPG Crisis India के बीच महंगाई का झटका भी लोगों को लग चुका है। 7 मार्च 2026 से घरेलू 14.2 किलोग्राम के नॉन-सब्सिडाइज्ड एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी हुई है। वहीं 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹114 से ₹144 तक का इजाफा किया गया है।
इसके अलावा सरकार ने गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है। जमाखोरी और बढ़ती मांग पर लगाम लगाने के लिए सिलेंडर की रीबुकिंग का समय बढ़ाया गया है। लेकिन इन सबके बावजूद कई शहरों में गैस की किल्लत बनी हुई है।
क्या Strait of Malacca बन सकता है विकल्प? जवाब है: नहीं
LPG Crisis India के बीच कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या Strait of Malacca को Strait of Hormuz का विकल्प बनाया जा सकता है? विदेश मामलों के जानकार संजीव जी ने इसका सीधा जवाब दिया कि नहीं, Strait of Malacca Strait of Hormuz का विकल्प नहीं हो सकता।
उन्होंने बताया कि Strait of Malacca हमारे अपने क्षेत्र का जलमार्ग है जो पैसिफिक ओशन, इंडो-पैसिफिक रीजन और साउथ चाइना सी को कनेक्ट करता है। यह एक ट्रेड रूट जरूर है, लेकिन यह मध्य पूर्व के तेल और गैस सप्लाई का विकल्प नहीं बन सकता।
Cape of Good Hope से आ सकता है तेल, लेकिन 5 दिन की जगह लगेंगे 25 दिन
LPG Crisis India से निपटने के लिए एक और रूट की चर्चा हो रही है और वह है Cape of Good Hope, जो अफ्रीका के सबसे दक्षिणी छोर से होकर गुजरता है। यह रूट मध्य पूर्व के युद्ध से पूरी तरह अप्रभावित है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती है इसकी दूरी और लागत।
संजीव जी ने बताया कि मध्य पूर्व से भारत तक तेल का जहाज करीब 5 दिनों में पहुंच जाता है। लेकिन अगर Cape of Good Hope का रास्ता अपनाया जाए तो यही सफर 25 दिनों का हो जाएगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ जाएगी और फ्रेट चार्जेस भी कई गुना बढ़ जाएंगे। इसका मतलब यह है कि इस रूट से तेल लाने पर भारत में ऊर्जा की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं।
Red Sea रूट भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं
LPG Crisis India के बीच Red Sea और Bab-el-Mandeb Strait को भी एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन यह रास्ता भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। संजीव जी ने चेतावनी दी कि Red Sea क्षेत्र में हूती आतंकी सक्रिय हैं, जो ईरान की प्रॉक्सी फोर्स माने जाते हैं।
हालांकि इस समय हूती थोड़े शांत हैं, लेकिन वे कभी भी Red Sea में जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसे में Red Sea रूट भी पूरी तरह भरोसेमंद विकल्प नहीं कहा जा सकता। यह स्थिति भारत के लिए निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है।
भारत के पास हैं ये बड़े विकल्प: अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक
LPG Crisis India से निपटने के लिए भारत सरकार के पास कई वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत मौजूद हैं। संजीव जी ने बताया कि भारत की एनर्जी इंपोर्ट डायवर्सिफिकेशन पॉलिसी पहले से ही मजबूत है और भारत सिर्फ मध्य पूर्व से ही तेल-गैस आयात नहीं करता, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों से भी करता है।
अगर यह युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत निम्नलिखित देशों से अपने ऊर्जा आयात को बढ़ा (रैंप अप) सकता है:
- अंगोला (अफ्रीका): तेल का प्रमुख उत्पादक देश
- नाइजीरिया (अफ्रीका): ऑयल इंपोर्ट का बड़ा स्रोत
- ऑस्ट्रेलिया: गैस और ऊर्जा का बड़ा निर्यातक
- कनाडा: तेल और गैस का विशाल भंडार
- अमेरिका: दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक
- वेनेजुएला (लैटिन अमेरिका): तेल के विशाल भंडार
- गुयाना (लैटिन अमेरिका): नया उभरता तेल उत्पादक देश
ये सभी देश Strait of Hormuz से पूरी तरह स्वतंत्र हैं और इनसे ऊर्जा आयात बढ़ाकर भारत मध्य पूर्व के युद्ध के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
सरकार प्रोएक्टिव तरीके से कर रही है तैयारी
LPG Crisis India को लेकर भारत सरकार सिर्फ स्थिति पर नजर ही नहीं रख रही, बल्कि प्रोएक्टिव तरीके से कदम भी उठा रही है। संजीव जी ने बताया कि वेस्ट एशिया के इस पूरे संकट पर भारत सरकार की बेहद पैनी नजर है। सरकार युद्ध के दुष्परिणामों और एनर्जी सप्लाई चेन पर पड़ रहे प्रभावों से निपटने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से आयात बढ़ाने की दिशा में काम तेजी से चल रहा है। हालांकि वैकल्पिक रूट से तेल-गैस लाने में ज्यादा समय और लागत लगेगी, लेकिन कम से कम सप्लाई पूरी तरह बंद होने की स्थिति से बचा जा सकेगा।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर
LPG Crisis India का सबसे बड़ा असर आम आदमी की जेब और रसोई पर पड़ रहा है। एक तरफ एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ चुके हैं, दूसरी तरफ सिलेंडर मिलना भी मुश्किल हो रहा है। अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहा तो पेट्रोल-डीजल के दामों में भी और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। वैकल्पिक रूट से तेल-गैस आयात होने पर ट्रांसपोर्टेशन और इंश्योरेंस की बढ़ी लागत भी अंततः उपभोक्ता की जेब से ही निकलेगी। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आम आदमी पर इसका कम से कम बोझ कैसे डाले।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि
करीब दो हफ्ते पहले अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, जिसके बाद ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने की धमकी दी। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। भारत अपने तेल और गैस आयात का 50 से 70 प्रतिशत तक इसी रूट से करता है। Strait of Hormuz बंद होने से भारत में तेल और एलपीजी गैस की किल्लत शुरू हो गई। सरकार ने 7 मार्च 2026 से घरेलू सिलेंडर के दाम ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹114-144 तक बढ़ा दिए। साथ ही सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया। अब भारत सरकार अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आयात बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- LPG Crisis India गहराया: Strait of Hormuz बंद होने से भारत के 50-70% तेल-गैस आयात प्रभावित, कई शहरों में लंबी कतारें।
- Strait of Malacca Strait of Hormuz का विकल्प नहीं बन सकता, Cape of Good Hope से तेल लाने में 5 की जगह 25 दिन लगेंगे।
- भारत अंगोला, नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, वेनेजुएला और गुयाना से ऊर्जा आयात बढ़ा सकता है।
- घरेलू सिलेंडर ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर ₹114-144 महंगा हुआ, सरकार ने बुकिंग नियम भी बदले।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








