Khamenei Last Rites की तैयारियां ईरान में शुरू हो गई हैं। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को देश के पवित्र शहर मशहद में दफनाने की तैयारी की जा रही है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें उनके जन्मस्थान में ही सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह फैसला न केवल भावनात्मक बल्कि धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘मशहद: शिया मुस्लिमों का पवित्र शहर’
Khamenei Last Rites के लिए मशहद को चुने जाने के पीछे गहरी धार्मिक और व्यक्तिगत वजहें हैं। अयातुल्लाह खामेनेई का जन्म ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में हुआ था। यही वो शहर है जहां उनके पिता को इमाम रजा की दरगाह परिसर में दफनाया गया था।
मशहद शिया मुस्लिमों के लिए अत्यंत पवित्र स्थान है क्योंकि यहां आठवें शिया इमाम का मजार स्थित है। हर साल लाखों जायरीन इस दरगाह पर हाजिरी देने पहुंचते हैं। ऐसे में Khamenei Last Rites के लिए इसी शहर का चुनाव उनके समर्थकों के लिए गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
‘तेहरान में 3 दिन का शोक, विशाल श्रद्धांजलि सभा’
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर जानकारी दी कि Khamenei Last Rites से पहले तेहरान में एक विशाल श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। राजधानी तेहरान में स्थित इमाम खुमेनी मस्जिद में तीन दिनों तक शोक कार्यक्रम चलेगा, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं।
हालांकि दफन की सटीक तारीख का औपचारिक ऐलान अभी बाकी है। पूरे ईरान में शोक का माहौल है और लोग अपने 36 साल तक नेतृत्व करने वाले धार्मिक और राजनीतिक मार्गदर्शक को अंतिम विदाई देने की तैयारी में जुटे हैं।
’36 साल का शासन: एक युग का अंत’
Khamenei Last Rites सिर्फ एक नेता की विदाई नहीं, बल्कि एक पूरे युग के अंत का प्रतीक है। अयातुल्लाह खामेनेई 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे इस पद पर पहुंचने वाले दूसरे व्यक्ति थे — उनसे पहले यह जिम्मेदारी अयातुल्लाह रूहुल्लाह खुमेनी ने निभाई थी।
देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए खामेनेई के पास सेना, न्यायपालिका, मीडिया, शिक्षा व्यवस्था और विदेश नीति सहित तमाम अहम मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार था। वे ईरान की राजनीतिक और धार्मिक संरचना के केंद्रीय स्तंभ माने जाते थे।
‘कैसे हुई मौत: Trump ने पहले किया एलान’
Khamenei Last Rites की खबर उस घटनाक्रम के बाद आई जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। उनकी मृत्यु तब हुई जब अमेरिका और इजराइल ने तेहरान के मध्य स्थित एक उच्च सुरक्षा नेतृत्व परिसर को निशाना बनाकर हवाई हमला किया। शुरुआती खबरें वाशिंगटन और यरूशलम से सामने आईं जिनमें दावा किया गया कि हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा है।
उनकी मौत की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की। इसके बाद 1 मार्च को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने आधिकारिक तौर पर खामेनेई की मौत की पुष्टि की।
‘ईरान के भविष्य पर सवाल: अब कौन संभालेगा सत्ता?’
Khamenei Last Rites के साथ ईरान के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि 36 साल तक जो व्यक्ति सत्ता का केंद्र था, उसके जाने के बाद ईरान की दिशा क्या होगी? सर्वोच्च नेता का पद ईरान की इस्लामिक राजनीतिक व्यवस्था का सबसे ताकतवर पद है। इस पद पर कौन बैठेगा, यह सवाल अभी अनुत्तरित है।
ऐसे नाजुक वक्त में जब ईरान पर अमेरिकी और इजराइली हमले जारी हैं, IRGC ने मिसाइल और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। Strait of Hormuz बंद कर दिया गया है और पूरा मिडिल ईस्ट उबाल पर है — ऐसे में नया नेतृत्व तय करना ईरान के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
‘क्या है पूरी पृष्ठभूमि’
28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में तेहरान के उच्च सुरक्षा नेतृत्व परिसर को निशाना बनाया गया। 1 मार्च को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की। अब Khamenei Last Rites की तैयारी मशहद में हो रही है जो उनका जन्मस्थान और शिया मुस्लिमों का पवित्र शहर है। यह घटना मिडिल ईस्ट के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अयातुल्लाह खामेनेई को उनके जन्मस्थान पवित्र शहर मशहद में दफनाया जाएगा।
- तेहरान की इमाम खुमेनी मस्जिद में तीन दिन का शोक कार्यक्रम आयोजित होगा।
- खामेनेई 36 साल तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे दूसरे सुप्रीम लीडर थे।
- मौत की घोषणा पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर की, बाद में 1 मार्च को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की।








