Khamenei Death UP Protest: ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत का गुस्सा और दुख अब उत्तर प्रदेश की सड़कों पर दिख रहा है। लखनऊ, प्रयागराज, बाराबंकी, अलीगढ़, बरेली, कानपुर और अयोध्या समेत यूपी के दर्जनों शहरों में मुस्लिम समुदाय अमेरिका और इजराइल के खिलाफ सड़कों पर उतरा है। पुराने लखनऊ में तीन दिन का शोक घोषित किया गया है और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
‘पुराना लखनऊ: बंद दुकानें, इजराइल-US झंडे जमीन पर’
लखनऊ के पुराने इलाकों में खामेनेई के निधन पर व्यापक असर दिखा। चौक, नक्खास, अकबरी गेट, छोटा इमामबाड़ा और बड़ा इमामबाड़ा के आसपास अधिकांश दुकानें बंद रहीं। बाजारों में सन्नाटा छाया रहा।
छोटा इमामबाड़ा के बाहर इजराइल और अमेरिका के झंडे जमीन पर रखे गए जिन पर से लोग गुजरते दिखाई दिए। शहर में तीन दिन के शोक का यह दूसरा दिन था। बुधवार से बाजार सामान्य रूप से खुलने लगेंगे।
‘प्रयागराज: ट्रम्प का पुतला फूंका, महिलाएं-बच्चे भी सड़क पर’
प्रयागराज के दरियाबाद इलाके में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। लोगों ने जुलूस निकाला जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे। शिया समुदाय के लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला फूंका और चप्पलों से पीटकर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था: “खामेनेई ने अमेरिका की गुलामी स्वीकार नहीं की, इसलिए उन्हें धोखे से मारा गया।” युद्ध में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि भी दी गई।
‘बाराबंकी: कैंडल मार्च और मजलिस, शहादत की मान्यता’
बाराबंकी में शिया समुदाय ने खामेनेई की मौत को शहादत करार दिया। बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे हाथों में तस्वीरें लिए सड़कों पर उतरे। कैंडल मार्च निकालकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी गई और मजलिस का आयोजन कर गहरा दुख प्रकट किया गया।
‘AMU में नमाज़-ए-जनाज़ा और कैंडल मार्च’
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में खामेनेई की याद में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय की जामा मस्जिद से बाब-ए-सैयद गेट तक कैंडल मार्च निकाला गया। छात्रों और शिक्षकों ने उन्हें शांत माहौल में श्रद्धांजलि अर्पित की।
‘यूपी में विरोध का संदेश: आस्था और आक्रोश का संगम’
उत्तर प्रदेश में दिख रहे ये प्रदर्शन यह बताते हैं कि ईरान-इजराइल-अमेरिका का यह युद्ध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। खामेनेई करोड़ों शिया मुसलमानों के धार्मिक नेता थे। उनकी मौत एक गहरे धार्मिक आघात की तरह महसूस की जा रही है। बंद दुकानें, कैंडल मार्च, नमाज़-ए-जनाज़ा और पुतला दहन: यह आक्रोश और शोक दोनों की एक साथ अभिव्यक्ति है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का निधन हुआ। इसके बाद भारत में खासतौर पर उत्तर प्रदेश में व्यापक शोक और प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। लखनऊ, प्रयागराज, बाराबंकी और अलीगढ़ में प्रमुख विरोध प्रदर्शन सामने आए हैं।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- पुराने लखनऊ में तीन दिन का शोक, दुकानें बंद, इमामबाड़ों के पास इजराइल-US झंडे जमीन पर।
- प्रयागराज के दरियाबाद में जुलूस, ट्रम्प का पुतला फूंका, महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल।
- बाराबंकी में शिया समुदाय ने खामेनेई की मौत को शहादत बताया, कैंडल मार्च और मजलिस।
- AMU की जामा मस्जिद में नमाज़-ए-जनाज़ा, बाब-ए-सैयद गेट तक कैंडल मार्च।
- बरेली, कानपुर, अयोध्या समेत UP के कई शहरों में भी प्रदर्शन जारी।








