Waqf Act Hearing : वक्फ संशोधन अधिनियम (Waqf Amendment Act) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आज से दोबारा सुनवाई शुरू हुई। यह मामला पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय खन्ना (Sanjiv Khanna) की निगरानी में था, जिन्होंने रिटायरमेंट से पहले इसे मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई (B.R. Gavai) की बेंच को सौंप दिया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह कानून वक्फ की संपत्तियों को ‘संरक्षित’ करने के नाम पर उन्हें अपने अधिकार में लेने का जरिया बन गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ का मतलब होता है अल्लाह के प्रति समर्पण। एक बार कोई संपत्ति वक्फ घोषित हो गई तो वह हमेशा के लिए वक्फ मानी जाती है और उसे ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
सिब्बल ने बताई कानूनी खामियां
कपिल सिब्बल ने कहा कि इस कानून के अंतर्गत बिना उचित प्रक्रिया के भी संपत्ति को वक्फ घोषित किया जा सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि इस कानून के तहत एक सरकारी अधिकारी को यह अधिकार दे दिया गया है कि वह किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दे। यदि वह निर्णय एकतरफा लेता है तो उस संपत्ति पर विवाद उत्पन्न हो सकता है, जिससे नागरिकों के धार्मिक अधिकार भी प्रभावित होंगे।
खजुराहो मंदिर (Khajuraho Temple) का उठा मुद्दा
सुनवाई के दौरान जब कपिल सिब्बल ने ऐतिहासिक स्मारकों (historical monuments) के संदर्भ में अपने तर्क दिए, तो उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि कोई वक्फ संपत्ति को स्मारक घोषित कर दिया जाए, तो क्या उसका धार्मिक स्वरूप समाप्त हो जाएगा? क्या वहां पर उपासना का अधिकार भी खत्म हो जाएगा? इस पर चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि स्मारक घोषित होने से पूजा-अर्चना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि खजुराहो (Khajuraho) एक संरक्षित स्मारक है, लेकिन वहां आज भी आम लोग मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता बनाम प्रशासनिक नियंत्रण
सुनवाई में धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक नियंत्रण के टकराव की झलक देखने को मिली। कपिल सिब्बल ने बार-बार इस ओर इशारा किया कि यह कानून धार्मिक संस्थाओं और नागरिकों की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। वहीं कोर्ट ने यह साफ किया कि वक्फ संपत्तियों पर निर्णय लेते समय संवैधानिक मूल्यों और धार्मिक अधिकारों का पूरा ध्यान रखना होगा।
सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला लाखों वक्फ संपत्तियों के भविष्य और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों को तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।








