Karnataka CM Tussle को लेकर सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कुर्सी की इस लड़ाई में अब एक नया और भावनात्मक मोड़ आ गया है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सोनिया गांधी के ‘त्याग’ का उदाहरण देकर अपनी मंशा और मौजूदा हालात पर एक बड़ा बयान दिया है, जिसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही यह चर्चा जोरों पर थी कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अब डीके शिवकुमार ने सोनिया गांधी का जिक्र करते हुए कहा है कि “जब सोनिया गांधी बलिदान दे सकती हैं, तो वो क्यों नहीं?” उनके इस बयान को सीधे तौर पर सीएम पद की दावेदारी और पार्टी के फैसलों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सोनिया गांधी के ‘त्याग’ की दिलाई याद
डीके शिवकुमार ने अपने बयान में 2004 के उस ऐतिहासिक वाकये का जिक्र किया जब सोनिया गांधी के पास प्रधानमंत्री बनने का पूरा मौका था, लेकिन उन्होंने ‘त्याग’ करते हुए मनमोहन सिंह को पीएम की कुर्सी सौंपी थी। शिवकुमार ने कहा कि जब सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बन सकती थीं और उन्होंने बलिदान दिया, तो आज के दौर में यह उनके लिए भी एक उदाहरण है।
इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या डीके शिवकुमार ने मौजूदा स्थिति से समझौता कर लिया है, या फिर यह आलाकमान पर नैतिक दबाव बनाने की एक रणनीति है?
ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सस्पेंस
वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया में लगातार यह चर्चा है कि कर्नाटक में ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला तय हुआ था, जिसके तहत आधे कार्यकाल के बाद सीएम बदला जाना था। हालांकि, कांग्रेस ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इस फॉर्मूले की पुष्टि नहीं की है।
अब जब सिद्धारमैया का खेमा अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, तो डीके शिवकुमार का यह बयान उनके समर्थकों के लिए एक संदेश भी हो सकता है। उनके समर्थक लगातार उन पर दबाव बना रहे हैं कि वे सीएम पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करें और समझौते का सम्मान करवाएं।
आलाकमान के पाले में गेंद
डीके शिवकुमार ने यह भी साफ किया है कि पार्टी आलाकमान जो भी फैसला लेगा, वह उन्हें स्वीकार होगा। हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी यही कहा है कि आखिरी फैसला हाईकमान का ही होगा। फिलहाल राहुल गांधी और शीर्ष नेतृत्व ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधी हुई है।
जानकारों का मानना है कि अगर डीके शिवकुमार को सीएम नहीं बनाया गया, तो उनके समर्थक और विधायक बगावत कर सकते हैं। कांग्रेस, जो देश भर में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, कर्नाटक जैसे अहम राज्य में किसी भी तरह की अस्थिरता का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।
जानें पूरा मामला
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री चुनने की थी। उस समय सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही इस पद के प्रबल दावेदार थे। कई दिनों की माथापच्ची के बाद सिद्धारमैया को सीएम और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाया गया। तब से ही यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि एक तय समय के बाद सत्ता का हस्तांतरण होगा, जिसे लेकर अब दोनों गुटों में खींचतान तेज हो गई है।
मुख्य बातें (Key Points)
डीके शिवकुमार ने सोनिया गांधी के 2004 के बलिदान का उदाहरण दिया है।
कर्नाटक में सीएम पद और ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को लेकर खींचतान जारी है।
डीके शिवकुमार के समर्थक उन पर सीएम बनने के लिए दबाव बना रहे हैं।
कांग्रेस आलाकमान ने अभी तक सत्ता परिवर्तन पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।








