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The News Air - Breaking News - Kallanai Dam: 2000 साल पुराना भारत का यह डैम आज भी करता है काम

Kallanai Dam: 2000 साल पुराना भारत का यह डैम आज भी करता है काम

चोला राजा करिकलन ने बनवाया था यह इंजीनियरिंग चमत्कार, पीएम मोदी ने किया कैनाल सिस्टम के आधुनिकीकरण का शिलान्यास

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 29 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Kallanai Dam
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Kallanai Dam: फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रैंड एनिकट कैनाल सिस्टम के आधुनिकीकरण और विस्तार परियोजना का शिलान्यास किया था। यह कैनाल सिस्टम कावेरी डेल्टा जिलों में सिंचाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसका आधुनिकीकरण करीब ₹640 करोड़ की लागत से किया जाएगा। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि यह कैनाल सिस्टम किस डैम से जुड़ा है और वह डैम आखिर कितना पुराना है?

दोस्तों, भारत पिछले सैकड़ों सालों से हर क्षेत्र में समृद्ध रहा है। अगर गौर करें तो भारतीय उपमहाद्वीप में आर्थिक, वास्तुकला, सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक हर तरह की समृद्धि देखने को मिलती है। यदि हम इतिहास पढ़ें तो हड़प्पा सभ्यता से लेकर चोला, विजयनगर और आधुनिक इतिहास तक भारतीय प्रायद्वीप के अत्यंत समृद्ध होने के सैकड़ों प्रमाण मिलते रहेंगे।

सोने की चिड़िया के इंजीनियरिंग चमत्कार

आपने सुना ही होगा कि भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। आज 21वीं सदी में हम जो इंजीनियरिंग के नमूने देखते हैं, भारत में ऐसे कई अद्भुत संरचनाएं हजारों साल पहले बनाई जा चुकी हैं। इनमें यूं तो कई उदाहरण आते हैं लेकिन आज हम भारत के सबसे पुराने डैम को समझेंगे।

करीब 2000 साल पहले बनाए गए कलानाई डैम (Kallanai Dam) की कहानी भारत के प्राचीन वास्तुकला उपलब्धियों को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है। यह डैम तिरुचिरापल्ली जिले, तमिलनाडु में कावेरी नदी पर बनाया गया था।

देखा जाए तो आश्चर्यजनक बात यह है कि आज भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। यह आज भी उत्कृष्ट स्थिति में मौजूद है जो सिंचाई में मदद करता है। यही नहीं, यह डैम कई आधुनिक डैमों के लिए प्रेरणा भी रहा है।

दुनिया के सबसे पुराने डैमों में से एक

कलानाई डैम जिसे ग्रैंड एनिकट डैम भी कहा जाता है, दुनिया में सबसे पुराने सिंचाई डैमों में से एक है। कुछ रिपोर्ट्स इसे दुनिया के सबसे पुराने सिंचाई डैमों में से एक बताती हैं और कुछ इसे दुनिया का सबसे पुराना डैम बताती हैं।

हालांकि यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लेकिन एक बात साफ है कि यह भारत का सबसे पुराना डैम है। दुनिया के सबसे पुराने डैमों में प्रोसरपिना डैम (स्पेन), लेक होम्स डैम (सीरिया) और सद्दे को डैम (ईरान) जैसे सिंचाई डैम मौजूद हैं।

चोला राजा करिकलन का दूरदर्शी सपना

कलानाई डैम मूल रूप से चोला राजवंश के राजा करिकलन द्वारा दूसरी शताब्दी ईस्वी में बनवाया गया था। जिसका आज भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बनने के पीछे यह विचार था कि कावेरी डेल्टा के क्षेत्र में सिंचाई को बढ़ावा दिया जा सके।

जिस समय यह बनवाया गया था तब यह करीब 69,000 एकड़ भूमि को सिंचित करता था। समझने वाली बात यह है कि इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2000 साल पहले चोला राजवंश सिंचाई को लेकर काफी प्रगति कर चुकी थी।

यह डैम अटूट तरह से बना रहा। हालांकि डैम को 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने फिर से तैयार किया था।

ब्रिटिश इंजीनियरों ने की पुनर्निर्माण की पहल

1840 में कावेरी नदी की अध्ययन करने के लिए एक सैन्य इंजीनियर कैप्टन कार्लवेल नियुक्त किए गए। उन्हें डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई को बढ़ावा देते हुए डैम को फिर से तैयार करना था ताकि बाढ़ को मोड़ा जा सके।

अगर गौर करें तो जहां यह डैम बना हुआ है, उसके ऊपर की ओर करीब 20 मील की दूरी पर कावेरी नदी दो धाराओं में बंट जाती है और एक नदी द्वीप बनाती है जिसे श्रीरंगम कहा जाता है। दो धाराओं में एक न्यू कावेरी कहलाती है और दूसरी कोल्लिदम नदी कहलाती है।

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जिस जगह पर कलानाई डैम मौजूद है, वहां न्यू कावेरी धारा कोल्लिदम नदी से मिलती है। इस डैम की स्थिति श्रीरंगम द्वीप के एक कोने पर मौजूद है। डैम को फिर से तैयार कर कावेरी से पानी को मोड़ा जाना था।

कार्लवेल के सुझावों के बाद डैम को 69 मीटर ऊंचा किया गया और इससे डैम की क्षमता भी बढ़ गई।

अद्भुत वास्तुकला और संरचना

यह डैम एक शानदार तरीके से तैयार किया गया है ताकि इसका दृश्य किसी भी दिशा में खड़े होकर लिया जा सके। यह 329 मीटर लंबा और 20 मीटर चौड़ा है। इसकी ऊंचाई 5.4 मीटर है।

दिलचस्प बात यह है कि इस डैम को बनाने में असमान भारी पत्थरों का इस्तेमाल हुआ था। नदी के प्रवाह को रोकने के लिए बड़े और भारी पत्थरों को नदी में डाला गया ताकि गुरुत्वाकर्षण और द्रव्यमान से नदी का प्रवाह रुक जाए।

इसके बाद उनके ऊपर छोटे-छोटे पत्थरों से चरण तैयार कर चिनाई का काम किया गया। यह बहुत बड़ा डैम नहीं है। इसे चेक डैम कहा जा सकता है। इसका महत्वपूर्ण विशेषता प्राचीन होते हुए प्रभावी होना है।

चार धाराओं में बंटती है कावेरी

इस डैम से कावेरी धारा चार अन्य धाराओं में बंट जाती है। जिन्हें कोल्लिदम अरु, कावेरी, विनारू और पुथुअ नाम दिए गए हैं। सिंचाई एक प्राचीन सिंचाई नेटवर्क से की जाती थी जिसके केंद्र में यह डैम मौजूद था। जो शुरुआत में 69,000 एकड़ भूमि को सिंचित करता था।

वहीं डैम कुछ सुधारों के बाद 20वीं शताब्दी में करीब 10 लाख एकड़ भूमि को सिंचित करना शुरू कर चुका है। इस डैम का डिजाइन इतना अनूठा था और कार्यप्रणाली सैकड़ों सालों बाद भी प्रभावी थी तो अंग्रेज काफी आश्चर्यचकित थे।

आर्थर कॉटन ने बनाया रेप्लिका

19वीं शताब्दी के मध्य में आर्थर कॉटन ने कावेरी की प्रमुख सहायक नदी पर द लोअर एनिकट डैम बनाया। यह मूल डैम की प्रतिकृति था। आज पर्यटक लोअर एनिकट डैम पर जमा होते हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मूल कलानाई डैम आज भी मजबूती से उसी प्रभावशीलता के साथ खड़ा है जैसे वह 20 शताब्दियों पहले खड़ा था।

श्रीलंकाई युद्धबंदियों की कहानी

कुछ किंवदंतियों में कहा जाता है कि चोला राजवंश के राजा करिकलन दक्षिणी क्षेत्र के एकमात्र राजा थे जिन्होंने सिलोन यानी श्रीलंका को जीता था। इस जीत के बाद सिंहल साम्राज्य में बंदी बनाए गए सैनिकों को युद्धबंदियों के रूप में रखा गया।

कहा जाता है कि कलानाई डैम को इन्हीं युद्धबंदियों ने निर्माण किया था। यहां करिकलन चोला मणिमंडपम में राजा करिकलन की शानदार हाथी पर बैठी हुई जीवन से बड़ी मूर्ति भी मौजूद है।

आधुनिक भारत में भी प्रासंगिक

देखा जाए तो यह थी कहानी कलानाई डैम की जो भारत का सबसे पुराना डैम है। यह डैम न केवल इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है बल्कि यह भारत की प्राचीन तकनीकी क्षमता का भी प्रमाण है।

आज जब पीएम मोदी ने इससे जुड़े कैनाल सिस्टम के आधुनिकीकरण का शिलान्यास किया है, तो यह साबित करता है कि 2000 साल बाद भी यह संरचना प्रासंगिक और उपयोगी है।

मुख्य बातें (Key Points):
  • कलानाई डैम भारत का सबसे पुराना डैम है, 2000 साल पुराना
  • चोला राजा करिकलन ने दूसरी शताब्दी में बनवाया था
  • 329 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और 5.4 मीटर ऊंचा
  • आज भी 10 लाख एकड़ जमीन को सिंचित करता है
  • PM मोदी ने ₹640 करोड़ के आधुनिकीकरण का शिलान्यास किया

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कलानाई डैम कितना पुराना है?

उत्तर: कलानाई डैम करीब 2000 साल पुराना है। इसे चोला राजा करिकलन ने दूसरी शताब्दी ईस्वी में बनवाया था।

प्रश्न 2: कलानाई डैम कहां स्थित है?

उत्तर: यह डैम तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले में कावेरी नदी पर स्थित है।

प्रश्न 3: क्या कलानाई डैम आज भी काम करता है?

उत्तर: हां, आज भी यह डैम सक्रिय है और करीब 10 लाख एकड़ भूमि को सिंचित करता है।

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