Jalandhar AAP Leader Murder पंजाब के जालंधर में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक नेता की दिनदहाड़े हुई हत्या ने राज्य की कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सत्ताधारी पार्टी के नेता की हत्या के बाद सियासी भूचाल आ गया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया (Bikram Singh Majithia) ने इस घटना को लेकर भगवंत मान (Bhagwant Mann) सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है और पंजाब को एक ‘रोग स्टेट’ (Rogue State) करार दिया है।
‘सीएम के करीबी ही सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी का क्या होगा?’
बिक्रम मजीठिया ने इस हत्याकांड को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि पंजाब के मौजूदा हालातों की डरावनी तस्वीर है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस नेता की हत्या हुई है, उसकी तस्वीरें सीएम और केजरीवाल के साथ हैं। मजीठिया ने सवाल उठाया कि जब सत्ताधारी पार्टी के मुख्यमंत्री के करीबी लोग ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता और विपक्ष के लोगों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पंजाब अब एक ‘पुलिस स्टेट’ बन चुका है जहां कानून का राज पूरी तरह खत्म (Collapse) हो चुका है।
‘हाईकोर्ट की फटकार और डीजीपी की कार्यशैली पर सवाल’
मजीठिया ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पंजाब में परमानेंट डीजीपी नहीं है और मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह राजनीतिक हो गई है। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज अनुपेंद्र गरेवाल का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास में पहली बार कोर्ट को डीजीपी गौरव यादव को तलब करके कानून-व्यवस्था पर जवाब मांगना पड़ रहा है। मजीठिया ने मोहाली में कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान राणा बलाचौरिया की हत्या और एसएसपी ऑफिस के बाहर हुए मर्डर का हवाला देते हुए पुलिस की नाकामी को उजागर किया।
‘गैंगस्टरों का राज और पलायन को मजबूर व्यापारी’
पंजाब के सामाजिक और आर्थिक माहौल पर चिंता जताते हुए अकाली नेता ने कहा कि राज्य में डर का माहौल इतना गहरा गया है कि कोई नया बिजनेस नहीं आ रहा और पुराने व्यापारी भाग रहे हैं। लोग नई गाड़ी खरीदने या पार्टी करने से भी डरते हैं कि कहीं शाम को उन्हें फिरौती (Extortion) का फोन न आ जाए। मजीठिया ने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान जग्गू भगवानपुरिया जैसे गैंगस्टरों को पंजाब लाया गया और थाने में बैठाकर उनसे फोन करवाए गए। जब पुलिस अधिकारी ही गैंगस्टरों के साथ मिलीभगत करेंगे, तो कानून-व्यवस्था कैसे बचेगी?
‘मजबूत विश्लेषण: नेतृत्व की विफलता और जनता का डर’
जालंधर की यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि यह पंजाब सरकार के उस दावे पर सीधा प्रहार है जिसमें ‘रंगला पंजाब’ की बात की जाती है। जब सत्ता पक्ष के नेता ही गोलियों का शिकार हो रहे हों, तो यह स्पष्ट संकेत है कि अपराधी बेखौफ हो चुके हैं। बिक्रम मजीठिया द्वारा उठाया गया ‘परमानेंट डीजीपी’ का मुद्दा तकनीकी रूप से बेहद अहम है, क्योंकि तदर्थ (Ad-hoc) नियुक्तियां अक्सर पुलिस बल के मनोबल और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर करती हैं। सिद्धू मूसेवाला से लेकर अब आप नेता की हत्या तक, यह सिलसिला बता रहा है कि पंजाब में पुलिसिंग को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करना अब वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
जालंधर में आप नेता की हत्या के बाद बिक्रम मजीठिया ने पंजाब को ‘रोग स्टेट’ करार दिया।
मजीठिया ने आरोप लगाया कि सीएम मान के करीबी सुरक्षित नहीं हैं, तो जनता का भगवान ही मालिक है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद परमानेंट डीजीपी की नियुक्ति न होने पर सवाल उठाए गए।
हाईकोर्ट द्वारा डीजीपी को तलब करने और गैंगस्टरों के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई गई।
व्यापारियों में डर का माहौल है और लोग पंजाब से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।








