उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में हो रहे उपचुनाव में बीजेपी ने पूर्व विधायक बहोरनलाल मौर्य को उम्मीदवार बनाया है। इस चुनाव में सपा अपना उम्मीदवार नहीं उतारी है, जिससे बीजेपी की रणनीति और राजनीतिक जीत पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। यहां हमने इस घटना के कुछ मुख्य बिंदुओं को विस्तार से समझाया है।
- बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की विधान परिषद की खाली सीट पर बहोरनलाल मौर्य को उम्मीदवार बनाया है।
- विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद खाली हुई यह सीट उपचुनाव के लिए थी।
- सपा ने इस सीट पर उम्मीदवार उतारने से इनकार किया है।
- बीजेपी की यह चुनौती है कि वह ओबीसी वोटों को साधने के लिए मौर्य समाज से आए बहोरनलाल मौर्य को चुना है।
- बहोरनलाल मौर्य बीजेपी के पूर्व नेता हैं और विधानसभा में पहली बार साल 1996 में चुने गए थे।
- वे 1997 में राजस्व राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
- बीजेपी ने बहोरनलाल मौर्य को इस सीट पर उम्मीदवार बनाकर उत्तर प्रदेश में अपने सवर्ण वोटबैंक के साथ गैर-ओबीसी जातियों और गैर-जाटव दलितों को साथ लेने की रणनीति बनाई है।
- सपा के PDA फॉर्मूले के तहत अखिलेश यादव ने विभिन्न जातियों को एकजुट करने का प्रयास किया है।
- बीजेपी को यूपी में वोट शेयर में गिरावट का सामना करना पड़ा है, जिसके बादले वह सवर्ण वोटबैंक को पुनः संगठित करने की कोशिश कर रही है।
- इस उपचुनाव से पहले यह समझने योग्य है कि क्या बीजेपी की यह रणनीति सफल रहेगी और क्या सपा के PDA फॉर्मूले की सेंधमारी होगी।








