Iran Protest Crisis : ईरान इस वक्त गहरे संकट से गुजर रहा है। 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब देशभर में फैल चुके हैं, जिनमें सड़कों पर लाशें पड़ी हैं, जेलें भर चुकी हैं और सरकार विरोधी आवाजों को दबाने के लिए ताकत का खुला इस्तेमाल हो रहा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि यह संकट अब ईरान की सीमाओं से निकलकर अमेरिका के व्हाइट हाउस तक पहुंच गया है।

सड़कों से संसद तक फैला आक्रोश
शुरुआत में यह प्रदर्शन महंगाई, बेरोजगारी और बदहाल अर्थव्यवस्था के खिलाफ थे, लेकिन धीरे-धीरे यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से सत्ता में बैठे धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत में बदल गए। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक मरने वालों में करीब 490 आम नागरिक शामिल हैं, जबकि हिंसा में सुरक्षा बलों के 48 जवानों की भी मौत हुई है। दूसरी ओर, ईरान सरकार का दावा है कि मृतकों की संख्या 114 है।
सरकार का सख्त रुख और दमन
स्थिति को काबू में करने के लिए सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया है, सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां जारी हैं। ईरान के पुलिस प्रमुख अहमद रेजा आदन ने साफ कहा है कि उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। हालांकि, दुनिया के कई हिस्सों में इसे दंगा नहीं बल्कि प्रदर्शनकारियों का कत्लेआम बताया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सियासत में भूचाल
ईरान की आग अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा रही है। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक Donald Trump ने White House में एक सीक्रेट मीटिंग बुलाई है, जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई, साइबर अटैक, परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने और नई कड़ी पाबंदियों जैसे विकल्पों पर चर्चा हो रही है। ट्रंप ने बयान दिया है कि ईरान आज़ादी की ओर देख रहा है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है।

इजराइल की खुली चेतावनी
इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि ईरान के “वीरों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा।” वहीं, ईरान का आरोप है कि इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजराइल की साजिश है।
आम लोगों पर असर और वैश्विक खतरा
ईरान अब सिर्फ आंतरिक संकट से नहीं जूझ रहा, बल्कि एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक छोटी सी चिंगारी पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की आग में झोंक सकती है। अगर अमेरिका ने दखल दिया तो इसका असर तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक पड़ेगा। ईरान की सड़कों से उठती चीखें अब दुनिया की महाशक्तियों के फैसलों से टकरा रही हैं।
क्या है पृष्ठभूमि
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन पहले आर्थिक मुद्दों तक सीमित थे, लेकिन बढ़ते दमन और मौतों के बाद यह आंदोलन सत्ता के खिलाफ व्यापक विद्रोह में बदल गया। लगातार मौतों, गिरफ्तारियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं ने इस संकट को वैश्विक मुद्दा बना दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान में 500 से ज्यादा मौतें, 10,000 से अधिक गिरफ्तारियां।
- 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन अब सत्ता के खिलाफ विद्रोह में बदले।
- व्हाइट हाउस में ईरान पर सीक्रेट मीटिंग, सैन्य विकल्पों पर चर्चा।
- इजराइल का खुला समर्थन, पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा।








