Iran New Supreme Leader Mojtaba Khamenei: ईरान की सत्ता में एक बड़ा बदलाव आया है। पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। सबसे शक्तिशाली पद संभालते ही मोजतबा ने दुनिया को बता दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने पद संभालने के तुरंत बाद इजराइल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसा दीं। ईरान के राज्य प्रसारक IRIB ने अपने टेलीग्राम चैनल पर इस हमले की पुष्टि की है।
पद संभालते ही इजराइल पर ताबड़तोड़ हमला
Iran New Supreme Leader Mojtaba Khamenei ने अपने पिता की गद्दी संभालते ही जो पहला काम किया, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। IRIB के मुताबिक, ईरान ने अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में कब्जे वाले इलाकों की तरफ पहले ही मिसाइलें दाग दी थीं और उसके बाद भी ताबड़तोड़ हमले जारी रखे गए।
सोमवार को ईरान ने इजराइल की तरफ मिसाइलों की एक और बड़ी बौछार की। इससे साफ संदेश गया कि नए सुप्रीम लीडर पूरी तरह एक्शन मोड में हैं और ईरान का रुख पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है। इस हमले ने अमेरिका से लेकर इजराइल तक सभी को दो टूक जवाब दे दिया कि ईरान झुकने वाला नहीं है।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई: पावर ब्रोकर से सुप्रीम लीडर तक का सफर
Iran New Supreme Leader Mojtaba Khamenei को समझने के लिए उनकी पूरी पृष्ठभूमि जानना जरूरी है। मोजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इससे पहले कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला था। इसके बावजूद ईरान की सत्ता व्यवस्था के अंदर वे बेहद प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते रहे हैं। सर्वोच्च नेता के कार्यालय में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एक शक्तिशाली पावर ब्रोकर के रूप में उनकी पहचान बनी।
ईरान की राजनीतिक गलियारों में मोजतबा को “गेटकीपर” के रूप में भी देखा जाता रहा है। यानी उनके पिता अली खामेनेई तक पहुंचने का रास्ता मोजतबा से होकर गुजरता था। बिना किसी सरकारी पद के भी वे ईरान के सबसे ताकतवर लोगों में गिने जाते थे और अब सुप्रीम लीडर बनने के बाद उनकी शक्ति का दायरा और भी विशाल हो गया है।
17 साल की उम्र में युद्ध में उतरे, 1990 के दशक में मिली पहचान
मोजतबा खामेनेई का सफर बेहद संघर्षपूर्ण और साहसिक रहा है। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया था। इतनी कम उम्र में जंग के मैदान में उतरना उनकी कट्टरता और जुनून को दिखाता है। इसके बाद 1990 के दशक के आखिर में उन्हें सार्वजनिक पहचान मिलनी शुरू हुई, जब उनके पिता अली खामेनेई सर्वोच्च नेता के रूप में पूरी तरह स्थापित हो चुके थे।
इसी दौरान मोजतबा के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ बेहद करीबी संबंध बने। IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति है और मोजतबा की इस संस्था से नजदीकी ने उन्हें ईरान की सत्ता संरचना में एक अहम खिलाड़ी बना दिया। पश्चिमी देशों के प्रति उनका रुख हमेशा से बेहद कड़ा रहा है, जो अब सुप्रीम लीडर बनने के बाद उनकी नीतियों में साफ दिख रहा है।
कोम में की इस्लामिक थियोलॉजी की पढ़ाई
Iran New Supreme Leader Mojtaba Khamenei ने अपनी धार्मिक शिक्षा ईरान के पवित्र शहर कोम में हासिल की। कोम शिया इस्लाम में धार्मिक स्कॉलरशिप का सबसे अहम और प्रतिष्ठित केंद्र माना जाता है। यहां उन्होंने इस्लामिक थियोलॉजी की गहन पढ़ाई की और “हुज्जत अल-इस्लाम” का पादरी रैंक हासिल किया।
यह रैंक उनके पिता अली खामेनेई के “अयातुल्ला” रैंक से नीचे का एक मिड-लेवल टाइटल है। लेकिन उनके धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ उनके परिवार की एक और बड़ी पहचान ने उन्हें विशेष ऊंचाई दी। मोजतबा का परिवार “सैयद” है, यानी वे पैगंबर मोहम्मद के वंशज माने जाते हैं। ईरान के शिया पादरी वर्ग में यह वंशावली बेहद सम्मानित है और इसी धार्मिक साख ने उनकी स्थिति को और भी मजबूत किया।
पिता की विरासत और नई चुनौतियां
मोजतबा खामेनेई को ईरान का Iran New Supreme Leader बनाया जाना कोई साधारण बात नहीं है। उनके पिता अली खामेनेई दशकों तक ईरान पर राज करने वाले सबसे शक्तिशाली व्यक्ति थे। अब बेटे ने वही गद्दी संभाल ली है और पद संभालते ही इजराइल पर तगड़ा वार करके दुनिया को बता दिया है कि ईरान की नीतियों में कोई बदलाव नहीं आने वाला।
बल्कि मोजतबा के सत्ता में आने के बाद ईरान का रुख पहले से और भी आक्रामक होता दिख रहा है। उनके IRGC से गहरे संबंध और पश्चिमी देशों के प्रति कड़ा रुख साफ संकेत है कि ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव कम होने की जगह बढ़ने की ही संभावना है। अब देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच छिड़ी यह जंग कहां तक जाती है और इसका मध्य पूर्व की भू-राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
ईरान में नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति और इजराइल पर लगातार हमलों का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। अगर यह तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया के आम नागरिकों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता का विषय बन सकती है।
‘जानें पूरा मामला’
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है, जो सेना, न्यायपालिका और विदेश नीति सहित सभी अहम फैसलों पर अंतिम अधिकार रखता है। अली खामेनेई 1989 से इस पद पर थे और उनकी मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को Iran New Supreme Leader बनाया गया है। मोजतबा ने कभी कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन पर्दे के पीछे से ईरान की सत्ता में “पावर ब्रोकर” और “गेटकीपर” की भूमिका निभाते रहे। IRGC से उनकी गहरी नजदीकी और पश्चिमी देशों के प्रति कड़ा रुख उनकी पहचान रहे हैं। अब सुप्रीम लीडर बनते ही इजराइल पर मिसाइल हमले करके उन्होंने साफ कर दिया है कि ईरान की आक्रामक नीति जारी रहेगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को Iran New Supreme Leader बनाया गया है।
- पद संभालते ही मोजतबा ने इजराइल पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए, IRIB ने हमलों की पुष्टि की।
- मोजतबा ने 17 साल की उम्र में ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया था और IRGC से उनके गहरे संबंध हैं।
- कोम में इस्लामिक थियोलॉजी की पढ़ाई की, “हुज्जत अल-इस्लाम” का पादरी रैंक हासिल किया और सैयद (पैगंबर मोहम्मद के वंशज) परिवार से हैं।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








