Iran Israel War Oil Crisis में एक ऐसा ड्रामा सामने आया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित बाहर निकाला है। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट डिलीट कर दी गई और व्हाइट हाउस को सामने आकर सफाई देनी पड़ी कि ऐसा कोई मिशन चलाया ही नहीं गया है।
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है और आरोप लगाया है कि अमेरिका वैश्विक तेल बाजार को मैनिपुलेट करने के लिए फेक न्यूज़ फैला रहा है। Iran Israel War Oil Crisis के बीच यह पूरा घटनाक्रम डोनाल्ड ट्रंप सरकार के अंदर ही गहरे मतभेदों की ओर इशारा कर रहा है और दुनियाभर के तेल बाजार में अनिश्चितता का माहौल और गहरा हो गया है।
क्रिस राइट ने क्या पोस्ट किया और फिर क्यों डिलीट करना पड़ा
Iran Israel War Oil Crisis के बीच अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने तहलका मचा दिया। राइट ने सीधे तौर पर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की है, ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनी रहे।
यह पोस्ट अगर सच होती, तो यह एक बहुत बड़ी खबर थी। क्योंकि होर्मुज पर ईरान का दबदबा माना जा रहा था और अमेरिका ने वहां से तेल टैंकर निकालने का दावा करना मतलब ईरान की नाकाबंदी को तोड़ना था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह हुई कि कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट गायब हो गई। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गलती से किसी और शख्स ने यह पोस्ट कर दिया था और जब इसका एहसास हुआ, तो इसे डिलीट कर दिया गया।
व्हाइट हाउस ने दी सफाई: ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा
Iran Israel War Oil Crisis के बीच व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में सामने आकर सफाई दी। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करना एक विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा है।
इस सफाई ने सवालों की बाढ़ ला दी। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री जैसे वरिष्ठ पद पर बैठा व्यक्ति इतना बड़ा दावा करता है, सोशल मीडिया पर पोस्ट करता है और फिर उसे डिलीट कर दिया जाता है। इतनी बड़ी गलती कैसे हुई? क्या यह सच में एक गलती थी, या फिर यह वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित करने की एक सोची-समझी चाल थी जो उल्टी पड़ गई?
ईरान ने कहा: अमेरिका फेक न्यूज़ फैला रहा, बाजार को मैनिपुलेट कर रहा
Iran Israel War Oil Crisis में ईरान ने अमेरिकी दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने बयान दिया कि तेल टैंकर को एस्कॉर्ट किए जाने की बातें बिल्कुल भी सच नहीं हैं। नैनी ने सीधी चेतावनी दी: “अमेरिकी फ्लीट और उसके पार्टनर की किसी भी मूवमेंट को हमारी मिसाइलें और ड्रोन से रोक दिया जाएगा।” उन्होंने दावा किया कि कोई भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज होर्मुज के आसपास आने की हिम्मत तक नहीं कर पाया है।
ईरानी संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ ने तो अमेरिका की मजाक उड़ाते हुए एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट किया: “अमेरिकी नेवी के जहाजों के साथ एक तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया… शायद प्ले स्टेशन पर।” यानी गालिबाफ ने अमेरिका के दावे को वीडियो गेम जैसी कल्पना बताकर खारिज कर दिया।
ईरान के विदेश मंत्री बोले: अमेरिकी अधिकारी फेक न्यूज़ पोस्ट कर रहे
Iran Israel War Oil Crisis में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्षी ने सबसे तीखा हमला किया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अमेरिका वैश्विक तेल बाजार को मैनिपुलेट करने की कोशिश कर रहा है। अराक्षी ने कहा: “अमेरिकी अधिकारी फेक न्यूज़ पोस्ट कर रहे हैं। इससे वे अमेरिकियों पर जो महंगाई की सुनामी थोपी गई है, उससे नहीं बच पाएंगे।”
ईरान का यह आरोप गंभीर है। अगर अमेरिका के ऊर्जा मंत्री सच में जानबूझकर गलत जानकारी पोस्ट कर रहे थे ताकि तेल बाजार में कृत्रिम स्थिरता का भ्रम पैदा हो, तो यह न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का उल्लंघन है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में हेरफेर का गंभीर मामला बन सकता है। ईरान का कहना है कि होर्मुज पर पूरा कंट्रोल उसका है और वह एक लीटर भी तेल वहां से ले जाने नहीं देगा।
क्या ट्रंप सरकार के अंदर ही बगावत शुरू हो गई
Iran Israel War Oil Crisis के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप सरकार के अंदर ही अब आपसी मतभेद सामने आने लगे हैं। ऊर्जा मंत्री कुछ और पोस्ट करते हैं, प्रेस सेक्रेटरी कुछ और बयान देती हैं, और फिर विभाग के अधिकारी कहते हैं कि यह गलती से हो गया। यह स्थिति बताती है कि ट्रंप प्रशासन के भीतर ईरान युद्ध और तेल संकट को लेकर कोई एक स्पष्ट रणनीति नहीं है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने पहले ही ईरान के साथ जारी युद्ध पर सवाल उठाए थे। अब जब ट्रंप के अपने मंत्री ही ऐसे विवादित दावे करके पोस्ट डिलीट कर रहे हैं, तो ट्रंप के खिलाफ बगावत के सुर और बुलंद हो सकते हैं। जिस तरह से इस युद्ध में अमेरिका फंसता हुआ नजर आ रहा है, उससे ट्रंप की घरेलू राजनीति पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
भारत पर क्या असर: 50-60% कच्चा तेल और 85% LPG होर्मुज से आता है
Iran Israel War Oil Crisis का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ रहा है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 50% से 60% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि भारत की 80-85% LPG भी इसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेल संकट पर एक बड़ी बैठक की है। इस बैठक में मिडिल ईस्ट संकट के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव और उससे निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेतहाशा बढ़ सकती हैं, रसोई गैस का संकट और गहरा हो सकता है और महंगाई पूरी अर्थव्यवस्था को हिला सकती है।
अमेरिका ने चीन को भी दिया था ऑफर
Iran Israel War Oil Crisis के बीच एक और दिलचस्प बात सामने आई है। अमेरिका ने चीन को भी ऑफर दिया था कि अगर चीन होर्मुज मुद्दे पर अमेरिका के साथ आ जाता है, तो यह युद्ध खत्म हो सकता है। लेकिन चीन ने इस ऑफर पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। चीन खुद ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है और उसकी अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए होर्मुज बेहद अहम है। ऐसे में चीन का अमेरिका के साथ आना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।
होर्मुज को लेकर तनातनी और तेल बाजार का भविष्य
Iran Israel War Oil Crisis में होर्मुज जलडमरूमध्य अब इस पूरे संकट की जड़ बन चुका है। एक तरफ ईरान का कहना है कि होर्मुज पर पूरा कंट्रोल उसका है और वह यहां से एक लीटर भी तेल ले जाने नहीं देगा। दूसरी तरफ अमेरिका दावा करता है कि वह तेल सप्लाई को लेकर लगातार एक्टिव है, लेकिन उसके अपने मंत्री का पोस्ट डिलीट होना और व्हाइट हाउस की सफाई यह बताती है कि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ हो गई है कि तेल बाजार में अनिश्चितता अपने चरम पर है। जब अमेरिका जैसा देश अपने ही बयानों पर यू-टर्न ले रहा है, तो दुनिया किस पर भरोसा करे? ईरान अगर सच में होर्मुज को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में जो तबाही आएगी, उसकी कल्पना भी डरावनी है। भारत जैसे देशों के लिए यह सबसे बड़ी चिंता है, क्योंकि हमारी ऊर्जा जरूरतों का बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से पूरा होता है। सरकार को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, रणनीतिक तेल भंडार और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर अभी से गंभीरता से काम करना होगा, क्योंकि यह संकट जल्दी खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया कि नौसेना ने होर्मुज से तेल टैंकर निकाला, फिर पोस्ट डिलीट कर दी, व्हाइट हाउस ने कहा ऐसा कोई मिशन नहीं चला।
- ईरान के IRGC प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अमेरिकी फ्लीट की किसी भी मूवमेंट को मिसाइलों और ड्रोन से रोक दिया जाएगा।
- ईरान के विदेश मंत्री अराक्षी ने अमेरिका पर फेक न्यूज़ फैलाने और तेल बाजार मैनिपुलेट करने का आरोप लगाया।
- भारत अपने 50-60% कच्चे तेल और 80-85% LPG का आयात होर्मुज से करता है, PM मोदी ने तेल संकट पर बड़ी बैठक की।








