Iran Israel War और Middle East में बढ़ते संघर्ष के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बड़ा और कड़ा बयान दिया है। नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नए दफ्तर की नींव रखने के बाद आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया में चल रहे युद्धों की असली वजह कुछ लोगों का स्वार्थ और वर्चस्व की चाहत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस जंग को खत्म करने की ताकत सिर्फ और सिर्फ भारत के पास है।
“दुनिया विनाश की कगार पर, स्वार्थ है मूल कारण”: Mohan Bhagwat
Iran Israel War और Middle East में जारी तनाव पर बोलते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि दुनिया इस वक्त विनाश की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जो संघर्ष आज विश्व में दिख रहे हैं, उनकी जड़ में स्वार्थी हित और वर्चस्व की कलह है। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछले 2000 सालों से दुनिया ने संघर्षों को सुलझाने के लिए कई विचारों पर प्रयोग किया है, लेकिन सफलता बेहद कम मिली है।
मोहन भागवत की यह बात ऐसे समय में आई है जब Iran Israel War ने पूरे Middle East को अस्थिर कर दिया है और दुनिया के कई देश इस जंग से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। आम लोगों के लिए यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि ऐसे वैश्विक संघर्ष तेल की कीमतों, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करते हैं।
“भारत ही इस युद्ध को समाप्त कर सकता है”: RSS प्रमुख
Iran Israel War पर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि युद्ध के बीच बार-बार दुनिया के कई देशों से आवाज उठ रही है कि भारत ही अब इस जंग को समाप्त कर सकता है, क्योंकि भारत की प्रवृत्ति और उसके मूल्यों का ज्ञान अब पूरी दुनिया को है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत के पास ही वो तत्व है जो सबको जोड़कर रख सकता है। लड़ाई नहीं, मेल-मिलाप और शांति की जरूरत है। भारत मानवता में विश्वास रखता है, जबकि दुनिया के अन्य देश अस्तित्व के संघर्ष और योग्यतम की उत्तरजीविता में विश्वास रखते हैं।
धार्मिक असहिष्णुता और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन पर कड़ा प्रहार
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Iran Israel War के संदर्भ में सिर्फ वैश्विक राजनीति पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक बुराइयों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती धर्म परिवर्तन, धार्मिक असहिष्णुता और ऊंच-नीच की भावनाएं आज भी समाज में मौजूद हैं। विश्व इस वक्त लड़खड़ा रहा है और सारी परिस्थितियां हमारे सामने हैं।
उन्होंने साफ कहा कि युद्ध होने के पीछे की असली वजह स्वार्थ है। वर्चस्व की कलह के मूल में स्वार्थ प्रवृत्ति है। यह बयान ऐसे समय में बेहद अहम हो जाता है जब Middle East में Iran Israel War ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा हुआ है।
“भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है एकता का पाठ”
मोहन भागवत ने नागपुर की इस सभा में भारत के प्राचीन ज्ञान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि सभी आपस में जुड़े हुए हैं और एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।
Iran Israel War जैसे संघर्षों के बीच भारत की यह सोच दुनिया के लिए एक रास्ता दिखा सकती है। जब दुनिया के ताकतवर देश हथियारों और वर्चस्व की भाषा बोल रहे हैं, तब भारत शांति और सद्भाव का संदेश दे रहा है।
“धर्म सिर्फ शास्त्रों तक सीमित न रहे, व्यवहार में दिखे”
आचरण के महत्व पर जोर देते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लोगों के व्यवहार में झलकना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थाई शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है।
उनका यह बयान सिर्फ Iran Israel War या Middle East की जंग तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरी दुनिया को एक संदेश दिया कि जब तक स्वार्थ और वर्चस्व की चाहत खत्म नहीं होगी, तब तक दुनिया में शांति स्थापित नहीं हो सकती।
Middle East जंग के बीच भारत की भूमिका पर दुनिया की नजर
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब Iran Israel War ने पूरे Middle East को दहला कर रख दिया है। दुनिया के कई देश इस जंग में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। ऐसे में भारत की भूमिका बेहद अहम हो गई है। भारत ने हमेशा से शांति और संवाद का रास्ता अपनाया है और RSS प्रमुख का यह बयान उसी सोच को और मजबूत करता है।
आम भारतीय नागरिकों के लिए भी यह मायने रखता है क्योंकि वैश्विक संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर सीधा पड़ता है। ऐसे में मोहन भागवत का यह बयान न सिर्फ एक राजनीतिक संदेश है, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक चेतावनी भी है कि अगर समय रहते शांति की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो दुनिया विनाश की कगार पर पहुंच सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Iran Israel War और Middle East जंग पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि युद्ध की असली वजह स्वार्थ और वर्चस्व की चाहत है।
- मोहन भागवत ने नागपुर में VHP दफ्तर की नींव रखने के बाद सभा में कहा कि भारत ही इस जंग को खत्म कर सकता है।
- उन्होंने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन, धार्मिक असहिष्णुता और ऊंच-नीच की भावना पर कड़ा प्रहार किया।
- RSS प्रमुख ने कहा कि दुनिया को सद्भाव की जरूरत है, संघर्ष की नहीं, और भारत का प्राचीन ज्ञान ही शांति का रास्ता दिखा सकता है।








