Iran India Talks एक बार फिर सुर्खियों में हैं। ईरान–अमेरिका–इजराइल के बीच 28 फरवरी से जारी युद्ध के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चौथी बार भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से फोन पर बातचीत की है। अराघची ने जयशंकर को ईरान के ताजा हालात की जानकारी दी और BRICS देशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। जयशंकर ने भी X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस बातचीत की जानकारी साझा की और लिखा कि “कल रात ईरानी विदेश मंत्री अराघची के साथ एक और बातचीत हुई। द्विपक्षीय मामलों के साथ-साथ BRICS से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।”
28 फरवरी से जारी युद्ध के बाद चौथी बार हुई बातचीत
Iran India Talks का यह दौर इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री के बीच चौथी बातचीत है। इतने कम समय में चार बार फोन पर बात करना दर्शाता है कि ईरान इस युद्ध के दौरान भारत के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने और मजबूत करने को लेकर बेहद गंभीर है।
ईरान भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार मानता है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं के संदर्भ में। वहीं भारत के लिए भी ईरान के साथ संबंध मध्य-पूर्व में अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी हैं। यही वजह है कि युद्ध के बीच दोनों देशों के बीच संवाद का सिलसिला लगातार जारी है।
ईरान ने जयशंकर को ताजा हालात से किया अवगत
Iran India Talks के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर को ताजा हालात के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी X पर एक विस्तृत पोस्ट करते हुए इस बातचीत का ब्यौरा दिया।
ईरान के बयान के मुताबिक अराघची ने जयशंकर को बताया कि अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ की गई सैन्य आक्रमकता के परिणामस्वरूप उत्पन्न नवीनतम स्थिति क्या है और इसका क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। ईरान ने इन हमलों को अपने देश के खिलाफ अत्याचार बताया और कहा कि इनका असर पूरे क्षेत्र की शांति पर पड़ रहा है।
ईरान बोला: आत्मरक्षा का वैध अधिकार इस्तेमाल करेंगे
Iran India Talks में ईरान ने एक बार फिर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। अराघची ने जयशंकर से बातचीत में जोर देकर कहा कि ईरानी सरकार, उसका राष्ट्र और सशस्त्र बल आक्रमणकारियों के खिलाफ अपने आत्मरक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए पूरी तरह दृढ़संकल्प हैं।
यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान न तो झुकने के मूड में है और न ही युद्ध से पीछे हटने का कोई इरादा रखता है। ईरान लगातार अपने हमलों को “आत्मरक्षा” के रूप में पेश कर रहा है, जबकि अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमलों को “सुरक्षा ऑपरेशन” बता रहे हैं। इस बातचीत में ईरान ने भारत से यह उम्मीद जताई कि भारत क्षेत्रीय शांति के लिए अपनी भूमिका निभाए।
BRICS पर बड़ी अपील: ईरान ने मांगा वैश्विक संगठनों का साथ
Iran India Talks में सबसे अहम बात यह रही कि ईरान ने इस बातचीत को सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच को भी बातचीत में शामिल किया। ईरान, जो अब BRICS का सदस्य बन चुका है, ने वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए BRICS देशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया।
अराघची ने बहुपक्षीय सहयोग विकसित करने के लिए एक मंच के रूप में BRICS के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि वर्तमान समय में क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा का समर्थन करने में इस संस्था की रचनात्मक भूमिका बेहद आवश्यक है। ईरान का यह कदम स्पष्ट रूप से पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के खिलाफ BRICS देशों को एकजुट करने की कोशिश है।
इसके अलावा ईरान ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों से भी अपील की कि वे अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य आक्रमकता की निंदा करें। ईरान चाहता है कि BRICS, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन इस मामले में खुलकर बोलें और अमेरिका-इजराइल पर दबाव बनाएं।
भारत ने जताई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग की तत्परता
Iran India Talks में भारत की तरफ से भी एक अहम संदेश दिया गया। ईरान के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार जयशंकर ने बातचीत के दौरान क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग का विस्तार करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की।
जयशंकर ने इस क्षेत्र में सतत स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने का मार्ग खोजने के महत्व पर जोर दिया और इसे एक सामूहिक आवश्यकता बताया। भारत ने अपना पारंपरिक संतुलित रुख बनाए रखा, जिसमें वह किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं कर रहा लेकिन शांति और स्थिरता के लिए अपनी भूमिका निभाने को तैयार है।
ईरान और भारत दोनों ने X पर दी जानकारी
Iran India Talks की दिलचस्प बात यह रही कि इस बातचीत के बाद दोनों ही पक्षों ने X (ट्विटर) पर अपने-अपने पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। एक तरफ जयशंकर ने X पर अंग्रेजी में संक्षिप्त पोस्ट लिखा, तो दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय “Islamic Republic of Iran” के आधिकारिक X अकाउंट से एक विस्तृत बयान जारी किया गया।
जयशंकर ने लिखा: “Had another conversation with Iranian FM Araghchi yesterday night. Discussed bilateral matters as also BRICS related issues.” वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में बातचीत का विस्तृत ब्यौरा दिया, जिसमें आत्मरक्षा के अधिकार, BRICS की भूमिका और सैन्य आक्रमकता की निंदा जैसे सभी बिंदुओं का जिक्र किया गया।
भारत का संतुलित रुख: न अमेरिका से दूरी, न ईरान से
Iran India Talks का यह सिलसिला भारत की कूटनीतिक चतुराई का प्रमाण है। 28 फरवरी से जारी इस युद्ध में भारत ने न तो अमेरिका-इजराइल के पक्ष में कोई खुला बयान दिया है और न ही ईरान से दूरी बनाई है। भारत दोनों पक्षों से बातचीत जारी रखे हुए है और “शांति और स्थिरता” का संदेश दे रहा है। ईरान के साथ चार बार फोन पर बातचीत होना यह दर्शाता है कि ईरान भारत को इस संकट में एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में देखता है। वहीं भारत के लिए ईरान से संबंध बनाए रखना ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह और अफगानिस्तान तक पहुंच के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है। लेकिन साथ ही भारत अमेरिका के साथ अपने मजबूत रिश्तों को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता। ऐसे में भारत का यह संतुलित कूटनीतिक रुख आने वाले दिनों में और ज्यादा परीक्षा की कसौटी पर खड़ा होगा, क्योंकि जैसे-जैसे युद्ध लंबा होगा, दोनों पक्षों का दबाव भारत पर बढ़ेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चौथी बार भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बात की, 28 फरवरी से जारी युद्ध पर चर्चा हुई।
- ईरान ने BRICS देशों से वैश्विक स्थिरता के लिए अधिक सहयोग और अमेरिका-इजराइल की सैन्य आक्रमकता की निंदा की अपील की।
- ईरान ने कहा कि वह आत्मरक्षा के वैध अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए दृढ़संकल्प है।
- जयशंकर ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग की तत्परता जताई, क्षेत्रीय स्थिरता को सामूहिक आवश्यकता बताया।













