India US Trade Deal zero tariff को लेकर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक ऐसा संकेत दिया है जिससे भारतीय कपड़ा उद्योग में खुशी की लहर दौड़ गई है। खबर है कि अमेरिका, भारतीय कपड़ों पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) को घटाकर ‘शून्य’ यानी जीरो करने की तैयारी में है। गोयल के मुताबिक, भारत-अमेरिका के बीच हो रही ट्रेड डील में टेक्सटाइल सेक्टर को बंपर राहत मिलेगी और जल्द ही यह ऐतिहासिक समझौता हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सियासत गर्म कर दी है।
बांग्लादेश वाली डील अब भारत को, टैरिफ होगा जीरो?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका ने बांग्लादेश को जिस तरह की रियायतें दे रखी हैं, ठीक उसी तरह की सुविधा अब भारत को भी मिलने वाली है। उन्होंने बताया कि अगर भारतीय कंपनियां अमेरिका से कच्चा कपास (कॉटन) मंगाकर उससे कपड़े तैयार करती हैं और फिर उसे वापस अमेरिका निर्यात करती हैं, तो उन पर रेसिप्रोकल जीरो टैरिफ लगेगा। यानी अब अमेरिका को माल बेचने पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।
यह भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए उस समय बड़ी राहत है, जब तक बांग्लादेश और वियतनाम को अमेरिका में कम शुल्क का फायदा मिल रहा था, जिससे भारतीय उत्पाद महंगे पड़ रहे थे। गोयल के इस बयान के बाद अब उम्मीद जगी है कि भारत भी इस मुकाबले में पीछे नहीं रहेगा।
ट्रंप प्रशासन की नरमी, 50% से 18% और फिर जीरो की तैयारी
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पहले ही भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, जिसे भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा था। अब पीयूष गोयल के ताजा बयान से साफ है कि फाइनल एग्रीमेंट में इसे शून्य करने की तैयारी है।
यही वह मोड़ है जहां कहा जा रहा है कि अमेरिका अब भारत के सामने झुकता नजर आ रहा है। भारत के कुल कपड़ा निर्यात का 30% हिस्सा अकेले अमेरिका को जाता है। ऐसे में अगर टैरिफ शून्य होता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।
जब सियासत में ‘डील’ और ‘ड्रामा’ का चोली-दाना का साथ
इस व्यापार समझौते पर राजनीति भी अपने चरम पर है। जहां एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘समर्पण’ करार दे रहा है। असल में देखा जाए तो यह समझौता बताता है कि भारत ने अपनी ‘रेड लाइन’ पार नहीं की है और बराबरी की शर्तों पर व्यापार कर रहा है। लेकिन राजनीति में इसके मायने अलग-अलग निकाले जा रहे हैं। आम आदमी के लिए, खासकर उस बुनकर और मजदूर के लिए जो सूरत, लुधियाना या तिरुपुर की फैक्ट्रियों में दिन-रात काम करता है, यह डील सीधे उसकी जेब और रोजगार से जुड़ी है। लाखों परिवारों की आजीविका इस एक फैसले पर टिकी है।
राहुल गांधी बोले- ‘आत्मसमर्पण’, पीयूष गोयल ने संसद में दिया करारा जवाब
इस डील को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ‘पूरी तरह आत्मसमर्पण’ है। उनके इस बयान से संसद में हंगामा बढ़ गया।
लेकिन वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बिना देर किए पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद में जानबूझकर झूठ फैला रहे हैं। गोयल ने साफ किया कि यह समझौता ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति पर बना है। उन्होंने कहा, “इससे भारत के किसानों, बुनकरों और एमएसएमई सेक्टर को सीधा फायदा होगा, न कि कोई नुकसान।” गोयल ने यह भी दोहराया कि भारत ने बातचीत में अपनी ‘रेड लाइन’ का उल्लंघन नहीं होने दिया।
लाखों नौकरियों का सवाल, ‘मेड इन इंडिया’ की दुनिया में धूम
अगर टेक्सटाइल सेक्टर पर जीरो टैरिफ की मोहर लग जाती है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से देश में लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कपड़ा उद्योग भारत के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है, और अमेरिका जैसे बड़े बाजार में बिना टैक्स के एंट्री मिलने से ‘मेड इन इंडिया’ कपड़ों की गूंज दुनिया भर में सुनाई देगी।
यह सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत का प्रतीक भी माना जा रहा है।
‘जानें पूरा मामला’
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कई मुद्दों पर अनबन चल रही थी। अमेरिका ने भारत पर स्टील और एल्युमीनियम समेत कई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगा रखा था, जवाब में भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिया था। लेकिन अब दोनों देश आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर कर रहे हैं। बांग्लादेश और वियतनाम को मिल रही रियायतों के मुकाबले भारत को अब तक अमेरिकी बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था। पीयूष गोयल के ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि अब सरकार इस असंतुलन को खत्म करने में जुटी है।
मुख्य बातें (Key Points)
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के संकेत- अमेरिका भारतीय कपड़ों पर टैरिफ घटाकर ‘जीरो’ कर सकता है।
भारत को बांग्लादेश की तर्ज पर रियायतें मिलेंगी; अमेरिका से कॉटन लाकर कपड़ा निर्यात पर कोई टैक्स नहीं।
राहुल गांधी ने डील को ‘आत्मसमर्पण’ बताया, पीयूष गोयल ने संसद में झूठ फैलाने का लगाया आरोप।
भारत के कुल कपड़ा निर्यात का 30% अमेरिका जाता है, डील से लाखों रोजगार के अवसर।
ट्रंप प्रशासन पहले ही टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर चुका, अब जीरो की तैयारी।








