India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बड़ी ट्रेड डील पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। वाशिंगटन में 23 फरवरी से होने वाली चीफ नेगोशिएटर्स की अहम बैठक टाल दी गई है, जिसके पीछे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान को वजह बताया जा रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी से वाशिंगटन में तीन दिन की बैठक होने वाली थी। भारतीय टीम का नेतृत्व कॉमर्स मिनिस्ट्री में जॉइंट सेक्रेटरी दर्पण जैन करने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर दोनों देशों ने इस मीटिंग को रीशेड्यूल करने का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बढ़ाई मुश्किलें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के घटनाक्रम, खासतौर पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के असर को समझने के लिए दोनों पक्षों को थोड़ा समय चाहिए। दरअसल अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर जो बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे, वो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे।
इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन के रेसिप्रोकल टैरिफ फ्रेमवर्क को बड़ा झटका दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने नई चाल चली। पहले उन्होंने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया और फिर 24 घंटे के भीतर इसे बढ़ाकर 15% कर दिया।
भारत पर 15% या 18%? क्या है कन्फ्यूजन?
यहीं से शुरू होता है असली कन्फ्यूजन। पहले अमेरिका ने भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर 25% अतिरिक्त ड्यूटी भी लगाई गई, यानी कुल टैरिफ पहुंच गया था 50% पर।
बाद में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क बना, जिसके तहत 25% सजा वाला टैरिफ हटाया गया और कुल प्रभावी टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमति बनी। लेकिन अब ट्रंप का नया 15% ग्लोबल टैरिफ सामने है।
वाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों के साथ अमेरिका ट्रेड समझौते कर चुका है, जैसे ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ, उन्हें अब धारा 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ का सामना करना होगा। 22 फरवरी के ऐलान को जोड़ें तो यह 15% हो जाता है। यानी कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत पर कुल टैरिफ 18% से घटकर 15% हो सकता है।
ट्रंप और भारत सरकार ने क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कहा है कि भारत के साथ डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है। वहीं भारत सरकार ने कहा है कि वह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद के सभी घटनाक्रम का गहराई से अध्ययन कर रही है।
कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने साफ किया है कि हर डेवलपमेंट पर नजर रखी जा रही है। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल पहले ही बता चुके हैं कि भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात होंगे, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है।
क्या होगा आगे?
फ्रेमवर्क के मुताबिक यह अंतरिम समझौता फरवरी के अंत तक फाइनल होना था। मार्च में साइनिंग और अप्रैल से इसे लागू करने की योजना थी, लेकिन अब बैठक टलने से इस पूरी टाइमलाइन में देरी संभव है।
अगर 15% टैरिफ लागू होता है तो यह 18% से कम होगा, यानी भारतीय एक्सपोर्टर्स को थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन अगर 18% ही कायम रहता है तो भारत को तय शर्तों के मुताबिक आगे बढ़ना होगा। एक और अहम बात यह कि यह टैरिफ मौजूदा एमएफएन ड्यूटी के अलावा होगा। यानी अगर किसी प्रोडक्ट पर पहले 5% ड्यूटी थी, तो 15% जुड़ने पर वह 20% हो जाएगी।
मुख्य बातें (Key Points)
भारत-अमेरिका के बीच 23 फरवरी से वाशिंगटन में होने वाली अहम ट्रेड बैठच टल गई है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए 15% ग्लोबल टैरिफ से स्थिति साफ नहीं है।
अब कन्फ्यूजन है कि भारत पर 18% टैरिफ लगेगा या 15%? ट्रंप का कहना है डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत सरकार पूरे घटनाक्रम का अध्ययन कर रही है, नई बैठक की तारीख जल्द तय होगी।








