India US Trade Deal – भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता लगभग अंतिम दौर में पहुंच गया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया है कि इस डील से जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और मरीन सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत ने कृषि और डेरी सेक्टर के हितों में कोई समझौता नहीं किया है। भारतीय उत्पादों पर लगने वाला अमेरिकी टैरिफ 50% से घटकर 18% हो जाएगा, जिससे निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों ने इस ऐतिहासिक समझौते को संभव बनाया है। यह डील भारत के उद्योग जगत, खासकर एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़े निर्यात अवसर खोलेगी। पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता सिर्फ उद्योगों के लिए नहीं, बल्कि गरीबों, किसानों, मछुआरों और युवाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा।
भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटकर 18% हुआ
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इस डील के तहत भारतीय उत्पादों पर लगने वाला जवाबी शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) 50% से घटकर 18% किया जाएगा। यह भारत के लिए बड़ी जीत है। अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल आयात के कारण 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था।
अब इस टैरिफ को घटाकर 18% करना भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत है। यह अमेरिका द्वारा प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के लिए घोषित सबसे कम टैरिफ में से एक माना जा रहा है। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता अमेरिकी बाजार में बढ़ेगी और निर्यात में जबरदस्त उछाल आएगा।
जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा
पीयूष गोयल के मुताबिक, इस डील से इंजीनियरिंग गुड्स बनाने वाली कंपनियों, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, जेम्स एंड ज्वेलरी कारोबार, लेदर, फुटवेयर सेक्टर और मरीन प्रोडक्ट एक्सपोर्ट को अमेरिकी बाजार में नए अवसर मिलेंगे। ये सभी श्रम-गहन (लेबर-इंटेंसिव) सेक्टर हैं, जो लाखों लोगों को रोजगार देते हैं।
भारत के लिए $40 बिलियन से अधिक मूल्य के उत्पादों को जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने की उम्मीद है। इसमें टेक्सटाइल, लेदर गुड्स, मरीन प्रोडक्ट्स, केमिकल्स और कुछ प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं। यह भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरा मौका है।
एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
पीयूष गोयल ने विशेष रूप से कहा कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर को इस डील का सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। भारत में एमएसएमई सेक्टर करोड़ों लोगों को रोजगार देता है और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। टैरिफ में कमी से छोटे और मध्यम उद्यमों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर मौका मिलेगा।
यह समझौता विशेष रूप से उन एमएसएमई के लिए फायदेमंद होगा जो टेक्सटाइल, हस्तशिल्प, जेम्स-ज्वेलरी, लेदर उत्पाद और इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाते हैं। अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच से इन उद्यमों का कारोबार बढ़ेगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
कृषि और डेरी सेक्टर के हितों में कोई समझौता नहीं
पीयूष गोयल ने साफ तौर पर कहा है कि भारत ने कृषि और डेरी सेक्टर के हितों में कोई समझौता नहीं किया है। भारत सरकार ने “संवेदनशील” कृषि और डेरी उत्पादों को टैरिफ रियायतों से छूट दी है। इसमें डेरी उत्पाद, पोल्ट्री, अनाज, जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थ, सोया, मक्का और अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद शामिल हैं।
यह सुरक्षात्मक उपाय इसलिए किया गया है ताकि भारतीय किसानों और डेरी उत्पादकों को अमेरिकी आयात से नुकसान न हो। भारत में लाखों छोटे किसान और डेरी फार्मर हैं, जिनकी आजीविका इन उत्पादों पर निर्भर है। सरकार ने उनके हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
किसानों, मछुआरों और युवाओं के लिए नए अवसर
पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता सिर्फ उद्योगों के लिए नहीं है, बल्कि गरीबों, किसानों, मछुआरों और युवाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा। मरीन प्रोडक्ट्स के निर्यात में बढ़ोतरी से मछुआरों को सीधा फायदा होगा। भारत समुद्री उत्पादों का बड़ा निर्यातक है और अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच से यह सेक्टर और मजबूत होगा।
युवाओं के लिए भी यह डील नए रोजगार के अवसर लेकर आएगी। निर्यात बढ़ने से उत्पादन बढ़ेगा और अधिक लोगों को काम मिलेगा। सरकार इसे भारत के उज्जवल भविष्य की मजबूत नींव मान रही है।
मोदी-ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों ने बनाया संभव
पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों ने इस समझौते को संभव बनाने में काफी हद तक मदद की है। दोनों नेताओं के बीच मजबूत तालमेल और आपसी विश्वास ने लगभग एक साल की बातचीत के बाद इस ऐतिहासिक डील को साकार किया।
यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों में एक रणनीतिक रीसेट माना जा रहा है। इससे न केवल आर्थिक अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी। यह समझौता भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया अध्याय खोलता है।
टेक्नोलॉजी उत्पाद भी हो सकते हैं सस्ते
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डील से लैपटॉप, मोबाइल गैजेट्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टेक हार्डवेयर और उनके पार्ट्स की कीमतें भी कम हो सकती हैं। अगर अमेरिकी टेक उत्पादों पर भारत भी टैरिफ कम करता है, तो भारतीय उपभोक्ताओं को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किन अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करेगी। लेकिन उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी, एनर्जी और कुछ कृषि उत्पादों पर धीरे-धीरे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी आएगी।
संयुक्त बयान जल्द होगा जारी
पीयूष गोयल ने समझौते की पूरी डिटेल साझा नहीं की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान जल्द ही जारी होगा, जिससे डील की रूपरेखा साफ की जाएगी। अभी तक समझौते का पूरा कानूनी टेक्स्ट सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे कुछ अस्पष्टता बनी हुई है।
विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने अधिक पारदर्शिता की मांग की है। वे चाहते हैं कि सरकार डील की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन सेक्टरों को फायदा होगा और किन पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका की अपेक्षाएं
अमेरिकी पक्ष ने संकेत दिया है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा या काफी कम करेगा और $500 बिलियन तक के अमेरिकी सामान खरीदने के लिए प्रतिबद्ध होगा। इसमें ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इन विशिष्ट प्रतिबद्धताओं की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
अमेरिकी कृषि सचिव ने संकेत दिया है कि यह व्यापार समझौता अधिक अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में निर्यात करने की सुविधा प्रदान करेगा। इससे भारत के साथ अमेरिका के कृषि व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।
किसान संगठनों की चिंताएं
हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि कृषि और डेरी सेक्टर के हितों की रक्षा की गई है, लेकिन कुछ किसान संगठनों ने चिंता जताई है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस डील की कड़ी निंदा की है। उनका आरोप है कि सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों से भारतीय बाजार भर जाने से “पूरे किसान समुदाय को तबाह” कर दिया जाएगा।
गुजरात के डेरी फार्मर लीडर दयाभाई गजेरा ने कहा कि डेरी आयात में वृद्धि पशुपालकों के लिए “बहुत बड़ा झटका” होगा, खासकर जब वे पहले से ही इनपुट लागत और अपने उत्पादों के लिए अपर्याप्त मूल्य से जूझ रहे हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि संवेदनशील उत्पादों को पूरी तरह से संरक्षित किया गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में, भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटकर 18% हुआ
- जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, लेदर और मरीन सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
- एमएसएमई सेक्टर के लिए अमेरिकी बाजार में नए निर्यात अवसर खुलेंगे
- कृषि और डेरी सेक्टर के संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ रियायतों से छूट
- $40 बिलियन से अधिक के भारतीय उत्पादों को जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने की उम्मीद
- मोदी-ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों ने समझौते को संभव बनाया








