India US Trade Deal Bangladesh: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत को सबक सिखाने का एक नया तरीका खोज लिया है। पहले नरेंद्र मोदी के साथ trade deal का फ्रेमवर्क बनाया, जिसमें भारत के textile पर 18% tariff तय हुआ। फिर कुछ दिनों बाद Bangladesh को 19% tariff दिया, लेकिन साथ में एक ऐसी शर्त जोड़ दी जो भारत के textile sector को बर्बाद कर सकती है – अगर बांग्लादेश अमेरिका से cotton और man-made fiber खरीदकर कपड़े बनाएगा और उसे अमेरिका भेजेगा, तो zero tariff मिलेगा।
इस खबर के आते ही भारत की textile क्षेत्र की कंपनियों जैसे Gokaldas Exports और KPR Mills के stock 5% तक गिर गए। सूरत, तिरुपुर, पानीपत, कोयंबटूर – देश के textile हब में हाहाकार मच गया है। क्योंकि अब बांग्लादेश भारत से cotton और yarn खरीदना बंद कर देगा और सीधे अमेरिका से खरीदकर zero tariff पर कपड़े America भेजेगा। भारत के किसान और textile कंपनियां दोनों तरफ से फंस गई हैं।
बांग्लादेश को मिला Golden Deal
9 फरवरी 2026 को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार Mohammad Yunus ने ऐलान किया कि अमेरिका के साथ 9 महीने की बातचीत के बाद trade deal पूरी हो गई है। बांग्लादेश पर tariff 37% से घटाकर पहले 20% किया गया था, अब 19% हो गया है। लेकिन असली झटका कहीं और है – अमेरिका ने कहा है कि अगर बांग्लादेश US-produced cotton और man-made fiber का इस्तेमाल करके textile और ready-made garments बनाएगा, तो उस पर zero reciprocal tariff लगेगा।
Bangladesh के Commerce Secretary Mahbubur Rahman ने साफ किया कि cotton और synthetic fibers से बने ready-made garments को अमेरिका में zero duty मिलेगी। यह बांग्लादेश के लिए game-changer है। क्योंकि Bangladesh की 80% export earnings textile sector से आती हैं और इस sector में 40 लाख लोग काम करते हैं। 2024 में बांग्लादेश ने अमेरिका को करीब $7.5 billion का apparel निर्यात किया था।
भारत के लिए दोहरा झटका
यह खबर भारत के लिए दो स्तर पर बुरी है। पहला, भारत की cotton और yarn industry का सबसे बड़ा बाजार बांग्लादेश है। बांग्लादेश 80% cotton का आयात भारत से करता है – करीब $3 billion सालाना। अगर बांग्लादेश अब अमेरिका से cotton खरीदेगा (क्योंकि zero tariff का फायदा लेने के लिए), तो महाराष्ट्र और गुजरात के cotton किसान बर्बाद हो जाएंगे।
दूसरा, भारत के textile exporters को अमेरिका में 18% tariff देना होगा, जबकि बांग्लादेश 0% पर सामान भेजेगा। कीमत में इतना बड़ा अंतर होने पर international market में भारत compete कैसे करेगा? Shiv Sena (UBT) की राज्यसभा सांसद Priyanka Chaturvedi ने कहा – “India’s Commerce Minister will now tell us the benefit Indian textile exporters will get with 18% tariff over Bangladesh’s 0%.”
पहले से चल रही थी साजिश?
अप्रैल 2025 में बांग्लादेश ने जमीन के रास्ते cotton के आयात पर रोक लगा दी थी। उस समय कहा गया कि बांग्लादेश के किसानों को नुकसान हो रहा है। फिर जनवरी 2026 में बांग्लादेश की textile industry ने मांग की कि भारत से आयात होने वाले cotton yarn, blended yarn और grey fabric पर 20% tariff लगाया जाए।
क्या यह सब अमेरिका के इशारे पर हो रहा था? अब तो साफ दिख रहा है कि अमेरिका ने पहले भारत को deal में फंसाया, फिर बांग्लादेश को बेहतर शर्तें देकर भारत के textile sector को दो बड़े बाजारों में घेर लिया – अमेरिका का बाजार और बांग्लादेश का कच्चे माल का बाजार।
कपड़ा मंत्री की चुप्पी
भारत के कपड़ा मंत्री Giriraj Singh जो अपने विरोधियों को Pakistan भेजने वाले बयानों के लिए मशहूर हैं, धर्म के नाम पर जिनकी मुखरता किसी से कम नहीं रहती, क्या वे भारत के textile sector के हितों के लिए अमेरिका-बांग्लादेश deal पर सवाल उठाएंगे? या फिर कह देंगे कि वाणिज्य मंत्री से जाकर पूछिए, textile minister बात नहीं कर रहे थे?
Commerce Minister Piyush Goyal ने 4 दिन पहले press conference में कहा था कि बांग्लादेश के textile पर 20% tariff है और भारत पर 18%, यानी भारत को बड़ी deal मिली है। लेकिन 4 दिन में ही उनके दावे पुराने हो गए। बांग्लादेश को 19% मिला, लेकिन साथ में zero tariff की सुविधा भी।
White House Fact Sheet का नया झटका
6 फरवरी को India-US के बीच joint statement जारी हुआ था। उसमें कुछ चीजों का जिक्र था। लेकिन 9 फरवरी को White House ने अपनी fact sheet जारी की, जिसमें “certain pulses” का जिक्र पहली बार सामने आया।
Joint statement में दालों का कोई जिक्र नहीं था। लेकिन White House की fact sheet में लिखा है – “India will eliminate or reduce tariffs on all US industrial goods and a wide range of US food and agricultural products, including dried distillers’ grains (DDGs), red sorghum, tree nuts, fresh and processed fruit, certain pulses, soybean oil, wine and spirits, and additional products.”
यानी 3 दिन के भीतर अमेरिका के दस्तावेज में दालों का प्रवेश हो गया। तो क्या पीयूष गोयल ने press conference में जो बताया, वह न तो अंतिम था, न विस्तृत। ऐसा लग रहा है कि list अभी बन रही है – कई चीजें हटाई जाएंगी, कई जोड़ी जाएंगी।
दालों पर नया संकट
पिछले साल अक्टूबर में भारत ने अमेरिका से आने वाली दालों पर 30% का tariff लगा दिया था। इसे लेकर अमेरिका के दो senators ने Trump को पत्र भी लिखा कि वे अमेरिका के किसानों के हितों को देखते हुए कदम उठाएं। और Trump ने उठा भी दिए।
अमेरिका में lentils और yellow peas का उत्पादन मुख्य रूप से North Dakota और Montana में होता है। ये दोनों states अमेरिका के 80% dry pea और lentil production के लिए जिम्मेदार हैं। भारत अभी Canada, Russia, Australia और Myanmar से दालें आयात करता है। अमेरिका से बहुत कम आयात होता है – 2024 में सिर्फ $74-76 million का।
लेकिन अगर अमेरिका के दबाव में भारत ने American pulses पर tariff कम कर दिया या zero कर दिया, तो Madhya Pradesh जैसे राज्यों के किसान जो soybean और दालों का उत्पादन करते हैं, उन पर संकट आ सकता है।
रूस से तेल खरीदने की “गारंटी”
White House की fact sheet में साफ लिखा है – “President Trump agreed to remove the additional 25% tariff on imports from India in recognition of India’s commitment to stop purchasing Russian Federation oil.”
यानी भारत ने रूस से तेल नहीं खरीदने की commitment दी है। लेकिन भारत सरकार के किसी भी मंत्री ने यह स्वीकार नहीं किया। विदेश सचिव Vikram Misri से जब सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि हम किसी single source पर निर्भर नहीं हैं, हमारे multiple sources हैं, market conditions के अनुसार खरीदारी होती है। लेकिन सीधा जवाब नहीं दिया कि रूस से तेल खरीदना बंद करने की गारंटी दी है या नहीं।
पिछले 40 महीनों में रूस से सस्ता तेल खरीदकर भारत सरकार ने ₹1,53,000 करोड़ की बचत की है। क्या यह बचत अब बंद हो जाएगी? और अगर बंद होगी, तो petrol-diesel की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
निगरानी का अपमान
Trump के Executive Order में लिखा है कि अमेरिका का वित्त मंत्री, गृह मंत्री, और विदेश मंत्री भारत के ऊपर निगरानी रखेगा। अगर भारत रूस से तेल खरीदते हुए पकड़ा गया, तो फिर से tariff 25% हो जाएगा।
यह कौन सी trade deal है जिसमें एक देश दूसरे देश पर “निगरानी” रखेगा? White House की fact sheet की भाषा भी अपमानजनक है। उसमें लिखा है – “Liberating America From Unfair Trade Practices” – यानी अमेरिका को अन्यायपूर्ण व्यापार नियमों से आजाद कराने के लिए यह deal है।
Fact sheet में यह भी लिखा है कि “India has maintained some of the highest tariffs on the United States of any major world economy, with tariffs as high as an average of 37% for agricultural goods and more than 100% on certain autos.” यानी अमेरिका के public documents में भारत को एक “ऐतिहासिक बाधा” बताया जा रहा है।
संप्रभुता पर सवाल
Trump के पहले कार्यकाल में जब उन्होंने कहा था कि वे भारत और Pakistan के बीच Kashmir के मुद्दे पर mediation कर सकते हैं, तो भारत ने तुरंत जवाब दिया – “हम अपने आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं करते।”
लेकिन रूस के मामले में अमेरिका भारत को dictate कर रहा है कि किस देश से तेल खरीदना है और किससे नहीं। और भारत सरकार चुप है। यह India की sovereignty के लिए बड़ा सवाल है। Russia भी कह रहा है कि अमेरिका दबाव डालकर भारत को रूस से छीनने की कोशिश कर रहा है। BRICS देशों में भारत की क्या स्थिति रह जाएगी?
कांग्रेस का हमला
Congress अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा है कि पहले कहा गया कि joint statement में Russia की बात नहीं, लेकिन अब fact sheet में Russia की बात लिख दी गई है। भारत के किसानों के साथ धोखा हुआ है। इतिहास में पहली बार भारत के कृषि sector को अमेरिका के लिए खोला जा रहा है।
कांग्रेस ने poster जारी किया है – “Narendra Surrender, Trump Surrender.” Kharge कहते हैं कि Dhaka को zero tariff देकर Trump ने Surat और Tiruppur के textile market की बर्बादी का ऐलान कर दिया है।
Congress के media प्रमुख Pawan Khera ने कहा है कि joint statement में red sorghum “for animal feed” के लिए था, लेकिन fact sheet में यह qualification गायब हो गई है। दालों का भी पहली बार जिक्र आया है। क्या अगले दस्तावेज में dairy और poultry का भी अचानक प्रवेश हो जाएगा?
$500 Billion की खरीदारी
White House के अनुसार, India ने $500 billion से अधिक की US energy, ICT, agricultural, coal और अन्य products खरीदने की commitment दी है। यह बहुत बड़ी रकम है। लेकिन भारत सरकार ने यह नहीं बताया कि यह खरीदारी कितने सालों में होगी, किस timeline पर होगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति अपनी जनता को सब बता रहे हैं – हमने India से यह लिया, वह लिया। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री अपनी जनता को क्या बता रहे हैं? Deal की भाषा बता रही है कि dealer कौन है, master कौन है।
आम आदमी पर असर
इस deal का आम आदमी के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा:
- Cotton किसान: महाराष्ट्र और गुजरात के cotton किसानों का Bangladesh market खत्म हो सकता है।
- Textile workers: सूरत, तिरुपुर, पानीपत, कोयंबटूर में लाखों textile workers की नौकरियां खतरे में हैं।
- Dal किसान: Madhya Pradesh जैसे राज्यों में dal उत्पादन करने वाले किसानों को American lentils से competition होगा।
- Petrol-Diesel prices: अगर Russia से सस्ता तेल खरीदना बंद हुआ, तो fuel की कीमतें बढ़ेंगी।
- Apple किसान: Piyush Goyal ने कहा कि American apple से competition नहीं होगा, लेकिन premium apple market भारतीय किसानों से चला जाएगा।
विपक्ष की चेतावनी
Rajya Sabha में Congress के leader ने कहा – “अभी कितने देश और बचे हैं जिससे आप free trade agreement नहीं कर पाए हैं? अगर यही deal होनी थी तो 11 महीने इंतजार क्यों कराया?”
उन्होंने यह भी कहा कि budget से पहले deal होनी चाहिए थी या budget के बाद? ऐसा लग रहा है कि भारत इस deal को लेकर कुछ नहीं कर रहा। जो भी कर रहा है, अमेरिका की तरफ से किया जा रहा है। अमेरिका ही joint statement जारी करता है, अमेरिका ही fact sheet जारी करता है।
आगे क्या होगा?
अभी तो India-US के बीच सिर्फ framework बना है। Actual implementation आने वाले हफ्तों में होगा। और comprehensive Bilateral Trade Agreement (BTA) के लिए बातचीत जारी रहेगी। तब पता चलेगा कि Modi सरकार के मंत्री भारत की जनता से कितना सच बोल रहे थे।
आने वाले महीनों में इस deal का असर भारत के अलग-अलग इलाकों में, किसानों पर, textile workers पर, और आम लोगों की जेब पर दिखने लगेगा। तभी पता चलेगा कि यह “historic deal” था या “historic blunder”।
मुख्य बातें (Key Points):
-बांग्लादेश को 19% tariff + zero tariff मिला (US cotton/fiber use करने पर), भारत को सिर्फ 18% tariff मिला
-भारत का $3 billion का Bangladesh cotton market खतरे में, क्योंकि Bangladesh अब US से cotton खरीदेगा
-White House fact sheet में पहली बार “certain pulses” का जिक्र, जो joint statement में नहीं था
-भारत ने Russia से तेल नहीं खरीदने की “commitment” दी (White House के अनुसार), लेकिन भारत सरकार ने confirm नहीं किया
-Trump के Executive Order में अमेरिका के मंत्री भारत पर “निगरानी” रखेंगे, Russia oil खरीदने पर फिर से 25% tariff
-Gokaldas Exports, KPR Mills जैसी textile कंपनियों के stock 5% तक गिरे
-भारत ने $500 billion से अधिक की US products खरीदने की commitment दी
-सूरत, तिरुपुर, पानीपत, कोयंबटूर के textile hubs में हाहाकार, लाखों workers की नौकरियां खतरे में








