India-US Trade Deal Breaking News में बड़ा मोड़ आया है। अंतरिम व्यापार समझौते के बाद जारी फैक्ट शीट में The White House ने अहम बदलाव किए हैं। दाल पर टैरिफ घटाने की बाध्यता हट गई है, $500 अरब की खरीद को “कमिटेड” से “इंटेंड” किया गया है और डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने का जिक्र भी गायब है। यह बदलाव किसानों, कृषि क्षेत्र और डिजिटल सेक्टर के लिए राहत की खबर है।
पिछले हफ्ते समझौते की घोषणा के बाद उठे सवालों—क्या भारत पर कृषि उत्पादों का दबाव है? क्या $500 अरब की कानूनी बाध्यता है? क्या डिजिटल टैक्स हटाना पड़ेगा?—का जवाब अब बदली हुई भाषा में मिलता दिख रहा है।
दाल पर टैरिफ: ‘Certain Pulses’ शब्द हटाया गया
पहली फैक्ट शीट में लिखा था कि भारत अमेरिकी “Certain Pulses” पर टैरिफ कम या खत्म करेगा। इससे आशंका बनी कि अमेरिकी दालें सस्ती होकर बड़े पैमाने पर आएंगी और घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ेगा।
अपडेटेड फैक्ट शीट में “Certain Pulses” शब्द पूरी तरह हटा दिया गया है। साफ संकेत है कि भारत पर अमेरिकी दालों के टैरिफ घटाने की बाध्यता नहीं है। यह भारतीय किसानों और दाल उत्पादकों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि दाल सिर्फ फसल नहीं, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
आंकड़े बताते हैं कि एफवाई 2024-25 में भारत ने कुल 5.48 अरब डॉलर की दालों का आयात किया, जो एफवाई 24 के 3.75 अरब डॉलर से करीब 46% ज्यादा है। दिलचस्प यह कि इस आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी सिर्फ 8.96 करोड़ डॉलर रही। आयात में अरहर 128.54 करोड़ डॉलर, बंगाल चना 111.66 करोड़, पीली मटर 96.05 करोड़ और मसूर 91.60 करोड़ डॉलर के साथ प्रमुख रहे। ऐसे में टैरिफ कटौती घरेलू बाजार के लिए संवेदनशील मुद्दा बन सकती थी।
$500 अरब खरीद: ‘Committed’ से ‘Intend’
पहली फैक्ट शीट में लिखा था कि भारत अमेरिका से $500 अरब की खरीद के लिए “Committed” है। अब इसे “Intend” कर दिया गया है। दो शब्दों का फर्क बड़ा है।
“Committed” कानूनी-नीतिगत बाध्यता का संकेत देता है, जबकि “Intend” परिस्थितियों के अनुसार निर्णय की गुंजाइश छोड़ता है। इस बदलाव से भारत पर सख्त कानूनी दबाव नहीं रहेगा और खरीद के फैसले आर्थिक जरूरतों व रणनीतिक हितों के अनुसार लिए जा सकेंगे।
साथ ही खरीद की सूची से कृषि उत्पादों को हटाकर ऊर्जा, सूचना एवं संचार तकनीक, कोयला और अन्य उत्पादों का जिक्र रखा गया है। इससे कृषि क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव की आशंका कम हुई है।
डिजिटल सर्विस टैक्स: तत्काल बाध्यता नहीं
पहले कहा गया था कि भारत डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा और डिजिटल ट्रेड में कथित भेदभावपूर्ण या बोझिल नियम खत्म करेगा। अपडेटेड दस्तावेज में डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने की बात पूरी तरह गायब है।
अब केवल इतना कहा गया है कि डिजिटल ट्रेड के नियमों पर बातचीत होगी। यानी तत्काल कोई बाध्यता नहीं, बल्कि भविष्य में चर्चा की गुंजाइश। यह भारत की डिजिटल संप्रभुता और कर नीति के लिहाज से अहम बदलाव है।
टैरिफ पर स्थिति और पृष्ठभूमि
फिलहाल भारत पर 18% टैरिफ लागू है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से कम बताया गया है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 18% किया गया।
फरवरी 2025 से करीब एक साल चली बातचीत के बाद अंतरिम समझौता सामने आया। अब फैक्ट शीट की भाषा में नरमी यह संकेत देती है कि वार्ता के दौरान भारत ने अपने हितों—किसानों, डिजिटल सेक्टर और आर्थिक नीति—को प्राथमिकता दी।
आम लोगों पर असर
दाल पर टैरिफ न घटने से घरेलू बाजार में कीमतों पर अचानक दबाव की आशंका कम हुई है, जिससे किसानों की आय पर नकारात्मक असर टला है।
डिजिटल सर्विस टैक्स पर तत्काल बाध्यता न होने से टेक कंपनियों और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नीति स्थिरता का संदेश मिलता है। वहीं $500 अरब खरीद को “इंटेंड” करने से सरकारी वित्तीय लचीलापन बना रहेगा।
भाषा बदली, संदेश बदला
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बदलाव “भाषा” का है। व्यापार समझौतों में शब्द ही नीति का अर्थ तय करते हैं। “Certain Pulses” हटना, “Committed” से “Intend” होना और डिजिटल टैक्स का उल्लेख गायब होना—ये तीन संकेत बताते हैं कि वार्ता में भारत ने सख्त बिंदुओं को नरम कराया।
अंतिम और विस्तृत समझौता आने पर तस्वीर और साफ होगी, लेकिन फिलहाल के बदलाव भारत के हित में माने जा रहे हैं। संदेश स्पष्ट है—राष्ट्रीय हित सर्वोपरि।
मुख्य बातें (Key Points)
- फैक्ट शीट से “Certain Pulses” हटाया गया, दाल पर टैरिफ घटाने की बाध्यता नहीं।
- $500 अरब खरीद “Committed” से “Intend” हुई, कानूनी दबाव कम।
- डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने का जिक्र गायब, केवल बातचीत की बात।
- 18% टैरिफ लागू; फरवरी 2025 से चली वार्ता के बाद अंतरिम समझौता।








