India on Russian Oil को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच भारत सरकार ने आखिरकार अपना रुख साफ कर दिया है। 9 फरवरी को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए बयान में कहा गया कि भारत के लिए 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी आधार पर भारत जरूरत के मुताबिक किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने का फैसला करता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील के बाद रूसी तेल को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और अमेरिका व वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट संदेश
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार बाजार की परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत अपनी जरूरतों के अनुसार दुनिया के किसी भी देश से तेल खरीद सकता है और यह फैसला पूरी तरह राष्ट्रीय हित में लिया जाता है।
रणधीर जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के सभी ऊर्जा संबंधी फैसले इसी सोच के तहत लिए गए हैं और भविष्य में भी इसी नीति पर काम किया जाएगा।
वेनेजुएला के तेल पर भी भारत का रुख
रूसी तेल के साथ-साथ वेनेजुएला को लेकर भी भारत ने स्थिति साफ की। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत 2019-20 तक वेनेजुएला से ऊर्जा और कच्चा तेल आयात करता था, लेकिन इसके बाद इसे रोकना पड़ा। फिर 2023-24 में भारत ने दोबारा वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया, लेकिन प्रतिबंध दोबारा लगने के कारण यह आयात फिर बंद करना पड़ा।
भारत ने कहा कि वेनेजुएला लंबे समय तक ऊर्जा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भारत का साझेदार रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते फैसले बदलने पड़े।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील और बढ़ता दबाव
इस पूरे बयान का सीधा संबंध भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भी जुड़ता है। इस डील के बाद भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर चुके थे कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदेगा और तेल खरीद की दिशा भी बदलेगा।
हालांकि इस मुद्दे पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि इस पर जवाब विदेश मंत्रालय देगा। अब विदेश मंत्रालय के बयान ने स्थिति साफ कर दी है।
रिफाइनिंग कंपनियों के फैसले
इसी बीच भारत की कुछ रिफाइनिंग कंपनियों ने भी अपने स्तर पर बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। रिफाइनिंग और ट्रेड से जुड़े सूत्रों के मुताबिक भारतीय रिफाइनर अप्रैल में डिलीवरी के लिए रूसी तेल खरीदने से बच रहे हैं।
बताया गया है कि Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Reliance Industries ने मार्च और अप्रैल की रूसी तेल लोडिंग के लिए ट्रेडरों से आए ऑफर स्वीकार नहीं किए हैं।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि मार्च के लिए कुछ डिलीवरी पहले ही तय की जा चुकी थी। इसके अलावा कई अन्य रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की नई खरीद रोक दी है। इन कंपनियों और तेल मंत्रालय ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पुरानी पृष्ठभूमि
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बड़े पैमाने पर बढ़ाया था। इसी वजह से भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव भी देखने को मिला था। उस समय अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगाए थे।
अब जबकि भारत और अमेरिका के बीच नए व्यापारिक रिश्तों की शुरुआत हुई है, तो कंपनियां भी सावधानी से कदम उठा रही हैं। इसी कड़ी में नायरा एनर्जी ने भी अप्रैल में रूसी कच्चे तेल का आयात न करने का फैसला किया है, क्योंकि उसकी रिफाइनरी एक महीने के लिए रखरखाव के चलते बंद रहेगी।
राजनीतिक और आर्थिक असर
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। विदेश मंत्रालय का बयान यह संकेत देता है कि भारत दबाव में नहीं, बल्कि अपनी जरूरत और राष्ट्रीय हित के हिसाब से फैसले करता रहेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- भारत ने कहा, 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि
- रूस से तेल खरीद पर भारत ने स्वतंत्र नीति दोहराई
- वेनेजुएला से तेल आयात पर प्रतिबंधों का असर
- कुछ भारतीय रिफाइनर अप्रैल में रूसी तेल से दूरी बना रहे








