India Iran Hormuz Deal को लेकर पिछले कुछ दिनों से तमाम तरह के दावे और खंडन सामने आ रहे हैं। ईरान–इजराइल युद्ध के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों देशों के बीच Strait of Hormuz से भारतीय जहाजों को गुजरने की सहमति बन गई है। लेकिन बाद में ईरान ने ऐसे किसी भी दावे का खंडन कर दिया। फिलहाल भारत के 28 जहाज होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं, जिन पर 778 नाविक सवार हैं और यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर बना हुआ है।
28 भारतीय जहाज फंसे, 778 नाविक खतरे में
India Iran Hormuz Deal की चर्चाओं के बीच जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। शिपिंग मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश सिन्हा ने जानकारी दी कि होर्मुज के आसपास कुल 28 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में और 4 जहाज पूर्वी हिस्से में मौजूद हैं।
इन 28 जहाजों पर कुल 778 नाविक सवार हैं। पश्चिमी भाग में फंसे 24 जहाजों पर 677 नाविक मौजूद हैं, जबकि पूर्वी भाग में फंसे चार जहाजों पर 101 नाविक हैं। ये सभी नाविक ईरान की चेतावनी और युद्ध के माहौल के बीच खतरे में फंसे हुए हैं। बुधवार को भारत आ रहे थाईलैंड के एक जहाज पर ईरान ने मिसाइल से हमला किया, जो इस बात का सबूत है कि होर्मुज से गुजरना कितना खतरनाक हो चुका है।
जयशंकर-आराघची बातचीत हुई, लेकिन ईरान ने किया डील का खंडन
India Iran Hormuz Deal को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जयशंकर और आराघची के बीच बातचीत में क्या हुआ? भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची से फोन पर बातचीत की। इसके बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है और अब होर्मुज से भारतीय जहाज भी गुजर सकेंगे।
लेकिन इन दावों के कुछ ही समय बाद ईरान की तरफ से खंडन आ गया। ईरान ने ऐसी किसी भी डील या सहमति से इनकार किया। ईरान का रुख अब तक यही रहा है कि Strait of Hormuz से सिर्फ चीन के जहाजों को गुजरने की इजाजत दी जाएगी। बाकी किसी भी देश के जहाज अगर इस मार्ग से गुजरने की कोशिश करेंगे तो उन्हें मार गिराया जाएगा।
एक जहाज ने चकमा देकर पार किया होर्मुज, मुंबई पहुंचा
India Iran Hormuz Deal भले ही अभी तक पुष्ट नहीं हुई हो, लेकिन इसी बीच एक भारतीय जहाज ने होर्मुज को चकमा देकर पार करने में सफलता हासिल कर ली। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर चला लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर अपना रडार (AIS सिस्टम) बंद करके होर्मुज के खतरनाक इलाके से गुजरा और सुरक्षित मुंबई पोर्ट पहुंच गया।
यह जहाज ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज से गुजरकर भारत पहुंचने वाला पहला तेल टैंकर था। हालांकि एक जहाज के सुरक्षित पहुंचने से पूरा संकट नहीं टला है, क्योंकि अभी भी 28 भारतीय जहाज वहां फंसे हुए हैं।
होर्मुज भारत की ऊर्जा जीवन रेखा: 55% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है
India Iran Hormuz Deal इसलिए इतनी अहम है क्योंकि Strait of Hormuz भारत की ऊर्जा जीवन रेखा है। भारत अपनी कुल जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 46 से 70 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते ही भारत आता था।
हालांकि सरकार के मुताबिक एक समय यह आंकड़ा 70 प्रतिशत से ऊपर था, लेकिन अब यह गिरकर करीब 55 प्रतिशत के आसपास आ चुका है। इसके बावजूद आधे से ज्यादा कच्चा तेल होर्मुज से आना भारत की इस मार्ग पर भारी निर्भरता को दर्शाता है। भारत कुल मिलाकर 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है और होर्मुज इस व्यापार का सबसे अहम मार्ग है।
LPG का 90% होर्मुज से आता है: रसोई गैस पर सीधा संकट
India Iran Hormuz Deal की अहमियत सबसे ज्यादा एलपीजी गैस के मामले में समझ आती है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का 60 प्रतिशत अन्य देशों से आयात करता है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस आयातित एलपीजी का 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही भारत पहुंचता है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत हो सकती है। हम पहले से देख रहे हैं कि सरकार ने एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं, बुकिंग का समय 21 से 25 दिन कर दिया है और कई शहरों में लोग सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में लगे हुए हैं। यह सब होर्मुज से सप्लाई बाधित होने का ही नतीजा है।
किसानों पर भी पड़ रहा असर: 30% खाद होर्मुज से आती है
India Iran Hormuz Deal सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है। इसका असर भारत के किसानों पर भी पड़ रहा है। भारत जो भी खाद (Fertilizer) आयात करता है, उसका 30 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आता है।
अगर होर्मुज से खाद की आपूर्ति बाधित होती है तो किसानों को खाद की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा, जो अंततः खाद्य महंगाई बढ़ा सकता है। ऐसे में होर्मुज का संकट सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भारत की कृषि और खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित करता है।
होर्मुज से 5-7 दिन की होती है बचत: वैकल्पिक मार्ग महंगे और लंबे
India Iran Hormuz Deal इसलिए भी अहम है क्योंकि Strait of Hormuz अन्य वैकल्पिक मार्गों की तुलना में भारत को 5 से 7 दिनों की बचत देता है। अगर भारत दुनिया के अन्य रास्तों को अपनाता है तो जहाजों को पहुंचने में 5 से 7 दिन ज्यादा लगते हैं।
यह समय की बचत अपने आप में एक बड़ी आर्थिक बचत भी है। जितने ज्यादा दिन जहाज समुद्र में रहेगा, उतनी ज्यादा ईंधन लागत, इंश्योरेंस और फ्रेट चार्जेस बढ़ेंगे। इसके अलावा होर्मुज मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया के लिए प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत जैसे देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध स्थापित करने में होर्मुज की भूमिका अत्यंत अहम है।
होर्मुज बंद होने से भारत की अर्थव्यवस्था पर तिहरी मार
India Iran Hormuz Deal अगर सफल नहीं होती और होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर तिहरी मार पड़ने वाली है। पहला, कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, जिससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा और हर चीज की कीमत बढ़ जाएगी। दूसरा, एलपीजी की कमी से रसोई गैस का संकट गहराएगा और आम परिवारों की रसोई सीधे प्रभावित होगी। तीसरा, खाद की सप्लाई बाधित होने से किसानों को नुकसान होगा और फसल उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
यह तीनों असर मिलकर भारत में भारी महंगाई का कारण बन सकते हैं। इसीलिए होर्मुज का मामला सिर्फ भू-राजनीतिक नहीं बल्कि सीधे आम आदमी की जेब से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर इसीलिए इस मोर्चे पर इतने सक्रिय दिख रहे हैं क्योंकि होर्मुज का हर दिन बंद रहना भारत को अरबों रुपये का नुकसान पहुंचा रहा है।
भारत की कूटनीतिक कोशिशें जारी
India Iran Hormuz Deal भले ही अभी तक आधिकारिक रूप से पुष्ट न हुई हो, लेकिन भारत की कूटनीतिक कोशिशें पूरे जोर-शोर से जारी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार दुनिया के तमाम देशों और मध्य पूर्व के कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है। हालांकि ईरान ने फिलहाल किसी डील से इनकार किया है, लेकिन बातचीत का दरवाजा खुला हुआ है। भारत जानता है कि ईरान के साथ रिश्ते बिगाड़ना उसके हित में नहीं है और ईरान को भी भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार की जरूरत है। यही कूटनीतिक संतुलन आने वाले दिनों में भारत के लिए एक रास्ता खोल सकता है।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण Strait of Hormuz दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग बन गया है। ईरान ने चीन को छोड़कर बाकी सभी देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने पर पाबंदी लगा दी है। भारत के 28 जहाज होर्मुज के आसपास फंसे हैं, जिन पर 778 नाविक सवार हैं। भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री आराघची से बातचीत की, जिसके बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में डील की खबरें आईं, लेकिन ईरान ने इनका खंडन किया। इसी बीच एक तेल टैंकर ने रडार बंद कर होर्मुज को चकमा देकर पार किया और मुंबई पहुंचा। भारत का 55% कच्चा तेल, 90% आयातित एलपीजी और 30% खाद होर्मुज से आता है, जिससे यह मार्ग भारत की ऊर्जा जीवन रेखा माना जाता है। होर्मुज बंद रहने से पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और खाद तीनों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- India Iran Hormuz Deal: जयशंकर-आराघची बातचीत के बाद डील की खबरें आईं, लेकिन ईरान ने खंडन किया। ईरान सिर्फ चीन के जहाजों को इजाजत दे रहा है।
- होर्मुज के आसपास 28 भारतीय जहाज फंसे, जिन पर 778 नाविक सवार: 24 जहाज पश्चिमी और 4 जहाज पूर्वी हिस्से में।
- भारत का 55% कच्चा तेल, आयातित एलपीजी का 90% और 30% खाद होर्मुज के रास्ते ही आती है, यह भारत की ऊर्जा जीवन रेखा है।
- होर्मुज अन्य मार्गों से 5-7 दिन बचाता है, भारत 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है।








