LIVE | ...
सोमवार, 7 सितम्बर 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - India Fertilizer Crisis: होरमुज संकट से खरीफ सीजन पर खतरा, थाली तक पहुंचेगी जंग की आग

India Fertilizer Crisis: होरमुज संकट से खरीफ सीजन पर खतरा, थाली तक पहुंचेगी जंग की आग

मिडिल ईस्ट की जंग सिर्फ तेल का नहीं बल्कि खाद का भी संकट है: यूरिया प्लांट 60% क्षमता पर सिमटे, गैस सप्लाई अनिश्चित, जून में खरीफ बुवाई से पहले सिर्फ 2 महीने का वक्त बाकी

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
सोमवार, 23 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
A A
0
India Fertilizer Crisis
104
SHARES
695
VIEWS
ShareShareShareShareShare

India Fertilizer Crisis: पूरी दुनिया की नजरें ईरान–इजराइल युद्ध, गिरती मिसाइलों और तेल की बढ़ती कीमतों पर टिकी हुई हैं। लोग एलपीजी संकट और डॉलर-रुपये के उतार-चढ़ाव की बात कर रहे हैं। लेकिन असली संकट आपकी कार के टैंक में नहीं बल्कि आपके किचन की थाली में आने वाला है। स्ट्रेट ऑफ होरमुज की नाकेबंदी ने एक ऐसे साइलेंट क्राइसिस को जन्म दे दिया है जिस पर मेनस्ट्रीम मीडिया और बौद्धिक वर्ग लगभग पूरी तरह चुप है: फर्टिलाइजर क्राइसिस। भारत के बड़े यूरिया प्लांट आज अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे और कई प्लांट 60 प्रतिशत क्षमता तक सिमट चुके हैं। गैस सप्लायर्स ने सप्लाई में भारी कटौती कर दी है। जून में खरीफ की बुवाई शुरू होनी है और अगर होरमुज का रास्ता मई तक ठीक से नहीं खुला तो 2022 के रूस-यूक्रेन संकट से भी बड़ा ग्लोबल फूड शॉक पैदा हो सकता है।

आपकी रोटी असल में जमी हुई प्राकृतिक गैस है: समझिए खाद का विज्ञान

India Fertilizer Crisis को समझने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि आधुनिक खेती पूरी तरह हाइड्रोकार्बन पर निर्भर है। अगर कोई कहे कि आपकी रोटी या चावल असल में एक तरह की जमी हुई प्राकृतिक गैस (Solidified Natural Gas) है तो सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन यही सच है।

हर अनाज के दाने के पीछे एक जटिल रासायनिक श्रृंखला जुड़ी होती है। यूरिया, जो भारत के करोड़ों किसानों की जान है, उसका कच्चा माल प्राकृतिक गैस (Natural Gas) है। 20वीं सदी में फ्रिट्ज हैबर और कार्ल बॉश ने मिलकर हैबर-बॉश प्रक्रिया (Haber-Bosch Process) विकसित की थी, जिसमें हवा से नाइट्रोजन लेकर प्राकृतिक गैस की मदद से अमोनिया बनाई जाती है।

N₂ + 3H₂ → 2NH₃ — यह वो जादुई समीकरण है जिसने दुनिया की आबादी को 2 अरब से 8 अरब तक पहुंचाया। आज दुनिया के 50 प्रतिशत खाद्य उत्पादन इसी यूरिया पर निर्भर है। अगर गैस की सप्लाई रुकी तो अमोनिया का उत्पादन ठप हो जाएगा, यूरिया नहीं बनेगी, और खेती की पैदावार आधी से भी कम हो जाएगी। यह कोई थ्योरी नहीं बल्कि कच्ची रसायन शास्त्र (Raw Chemistry) की हकीकत है।

होरमुज: 21 मील चौड़ा वो गला जो पूरी दुनिया का पेट भरता है

स्ट्रेट ऑफ होरमुज महज 21 मील (34 किलोमीटर) चौड़ा है, लेकिन यह दुनिया का सबसे संवेदनशील चोक पॉइंट है। यहां से ग्लोबल इकॉनमी की “जुगुलर वेन” (गले की नस) गुजरती है। दुनिया के 20 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी (LNG) और फर्टिलाइजर का एक बड़ा हिस्सा इसी व्यापार मार्ग से होकर गुजरता है।

कतर, सऊदी अरब और ईरान — ये वो देश हैं जो दुनिया को खाद बनाने का कच्चा माल (Raw Material) उपलब्ध कराते हैं। अगर यहां एक भी चिंगारी भड़कती है तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह रुक जाती है। और अभी तो यहां महासंग्राम चल रहा है। यह सिर्फ तेल का खेल नहीं है, वास्तव में पूरी दुनिया के पेट का भी रास्ता स्ट्रेट ऑफ होरमुज से होकर गुजरता है।

समुद्री बीमा 400% बढ़ा, शिपिंग कंपनियां कतरा रहीं: खाद की कीमतें आसमान छूने को तैयार

India Fertilizer Crisis सिर्फ गैस की कमी तक सीमित नहीं है। युद्ध का आर्थिक डर भी एक बड़ा हथियार बन गया है। होरमुज में बढ़ते तनाव से समुद्री बीमा (Marine Insurance) का प्रीमियम 400 प्रतिशत तक बढ़ गया है। ट्रांसपोर्टेशन बेहद महंगा हो चुका है।

शिपिंग कंपनियां अब रेड सी या होरमुज से जहाज भेजने में कतरा रही हैं। जो जहाज आ भी रहे हैं उनका भाड़ा इतना बढ़ा हुआ है कि खाद की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। जब खाद महंगी होगी तो उसका इस्तेमाल कम होगा, और जब खाद कम लगेगी तो पैदावार सीधे प्रभावित होगी। यह एक ऐसा दुष्चक्र है जिसका अंत महंगाई और भोजन की अनुपलब्धता पर होगा।

सल्फर: वो साइलेंट किलर जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा

India Fertilizer Crisis का एक और पहलू है जिसे लोग पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं, और वो है सल्फर (गंधक)। सल्फर फॉस्फेट फर्टिलाइजर का आधार (Base) होता है। यहां एक बहुत महत्वपूर्ण बात समझने की है: सल्फर कच्चे तेल की रिफाइनिंग का बाय-प्रोडक्ट (उपोत्पाद) होता है।

अगर मिडिल ईस्ट की रिफाइनरियों पर हमला हो रहा है या वो बंद हो रही हैं तो सल्फर की सप्लाई रातोंरात खत्म हो जाएगी। सल्फर के बिना न खाद बनेगी, न दवाइयां बनेंगी, और न ही आपके स्मार्टफोन का सेमीकंडक्टर बन पाएगा। यह एक मल्टी-सेक्टर कोलैप्स की शुरुआत है जहां सल्फर एक साइलेंट किलर की तरह काम करता है।

जब क्रूड ऑयल की रिफाइनिंग बंद होगी तो सल्फर एक्सट्रैक्ट ही नहीं हो पाएगा। फार्मा, टेक्नोलॉजी और एग्रीकल्चर — तीनों इंडस्ट्रीज की सप्लाई चेन एक साथ ध्वस्त हो सकती है। आपकी पैरासिटामॉल से लेकर आपके स्मार्टफोन तक हर चीज की कीमत बढ़ेगी।

आत्मनिर्भर भारत का सबसे कमजोर पहलू: खाद बनाते हैं यहां, कच्चा माल आता है विदेश से

भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत यूरिया के उत्पादन में निश्चित रूप से उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी कच्चा माल (Raw Material) है। भारत खाद तो यहां बनाता है, इसमें कोई संदेह नहीं, लेकिन उसे बनाने के लिए जो प्राकृतिक गैस चाहिए वो विदेशों से आती है।

भारत की गैस पाइपलाइन और एलएनजी टर्मिनल सीधे गल्फ देशों से जुड़े हुए हैं। अगर होरमुज में हलचल हो रही है तो भारत के प्लांट्स के पास भी पर्याप्त गैस नहीं होगी। इसका सीधा मतलब है कि भारत की पूरी कृषि अर्थव्यवस्था एक विदेशी चोक पॉइंट के भरोसे टिकी हुई है और आत्मनिर्भर भारत का खाद वाला अध्याय खतरे में आ गया है।

ग्राउंड जीरो: यूरिया प्लांट 60% क्षमता पर, गैस सप्लायर्स ने हाथ खींचे

India Fertilizer Crisis की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। भारत के बड़े यूरिया प्लांट आज अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे। कई प्लांट 60 प्रतिशत कैपेसिटी तक सिमट चुके हैं। गैल (GAIL) जैसे बड़े सप्लायर्स ने गैस की सप्लाई में भारी कटौती कर दी है।

जब गैस की कमी होगी तो सबसे पहले खाद कारखानों का कोटा काटा जाएगा ताकि घरों और इंडस्ट्रीज को बिजली मिल सके। लेकिन यह भूलना बहुत खतरनाक है कि अगर खाद नहीं बनेगी तो बिजली का क्या करेंगे? जब रोटी ही नहीं होगी तो बाकी सुविधाओं का क्या मतलब?

यह भी पढे़ं 👇

September 6 History

इतिहास के पन्नों से: 6 सितंबर को घटी ये बड़ी घटनाएं, लंदन की महान आग से लेकर मैगलन की ऐतिहासिक यात्रा तक

रविवार, 6 सितम्बर 2026
IMD Alert

IMD Alert: East Rajasthan-MP में Very Heavy Rainfall, दिल्ली में भी भारी बारिश, 6 राज्यों में Orange Warning

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Breaking News Live Updates 6 September

Breaking News Live Updates 6 September 2026: Top Alerts, हर बड़ी खबर सबसे पहले

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Aaj Ka Rashifal 6 September 2026

आज का राशिफल 6 सितंबर 2026: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्यफल

रविवार, 6 सितम्बर 2026

एक बड़ी तकनीकी समस्या यह भी है कि यूरिया प्लांट को पंखे के स्विच की तरह ऑन-ऑफ नहीं किया जा सकता। इनमें कैटेलेटिक कन्वर्टर्स लगे होते हैं। अगर गैस की कमी के कारण कोई प्लांट बंद हो जाए तो उसे दोबारा पूरी तरह चालू करने में तीन से चार हफ्ते (लगभग एक महीना) लग जाएगा। इसे “प्रोडक्शन लैग” कहते हैं और यही इस संकट का सबसे खतरनाक हिस्सा है।

कई ग्लोबल एलएनजी सप्लायर्स ने “फोर्स मेजोरे” (Force Majeure) डिस्क्लेमर दे दिया है, जिसका मतलब है कि स्थितियां उनके नियंत्रण में नहीं हैं और वो कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद गैस सप्लाई नहीं कर पा रहे। पेट्रोनेट एलएनजी और गैस कंपनियां विदेशों से गैस लाने में संघर्ष कर रही हैं। कतर और कुवैत से आने वाली सप्लाई पूरी तरह अनिश्चित है।

सिर्फ 2 महीने बाकी: खरीफ बचाने का वक्त निकलता जा रहा है

India Fertilizer Crisis का सबसे बड़ा खतरा समय की कमी है। अभी मार्च-अप्रैल चल रहा है और जून में खरीफ की बुवाई शुरू होती है। किसान को बीज के साथ-साथ सबसे पहले जो चीज चाहिए वो है यूरिया और डीएपी (DAP)।

भारत अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत DAP आयात करता है, जो मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट और जॉर्डन से आता है। अगर होरमुज और रेड सी का रास्ता मई तक ठीक से नहीं खुलता तो खरीफ सीजन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। भारत की 50 प्रतिशत से ज्यादा खेती और जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर है।

और अगर गैस सप्लाई ठीक भी हो जाती है तो प्रोडक्शन लैग के कारण यूरिया उत्पादन शुरू होने में कम से कम एक महीना और लगेगा। यानी सप्लाई ठीक होने के बाद भी खाद बाजार में पहुंचने में करीब दो महीने लग सकते हैं, जो खरीफ बुवाई के लिए बहुत देर हो जाएगी।

सरकार के सामने दो ही रास्ते, दोनों मुश्किल

भारत सरकार की फर्टिलाइजर सब्सिडी लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये है। लेकिन यह आंकड़ा तब का है जब गैस की कीमतें सामान्य थीं। अगर युद्ध के कारण गैस महंगी हुई तो यह सब्सिडी 2.5 लाख करोड़ रुपये पार कर सकती है।

सरकार के सामने अब दो ही रास्ते बचे हैं और दोनों ही मुश्किल हैं। पहला, अपना राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ाए, जो इकॉनमी के लिए बड़ी समस्या खड़ी करेगा। दूसरा, खाद के दाम बढ़ाकर महंगाई का बोझ सीधे किसानों और आम आदमी पर डाल दे, जो सामाजिक और राजनीतिक रूप से विस्फोटक हो सकता है। दोनों ही स्थितियों से निकलना भारत सरकार के लिए बहुत कठिन होगा।

2022 से भी बड़ा फूड शॉक: याद कीजिए रूस-यूक्रेन युद्ध का सबक

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान फर्टिलाइजर की कीमतें 300 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं और दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट से जुड़े दंगे शुरू हो गए थे। इस बार संकट का केंद्र मिडिल ईस्ट है जो भारत के कहीं ज्यादा करीब है और भारत के लिए ज्यादा क्रिटिकल भी।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ईरान ने होरमुज को ब्लॉक रखा तो यह ग्लोबल हंगर (वैश्विक भूखमरी) का ट्रिगर बन सकता है। भारत को अब सिर्फ आत्मनिर्भरता की बातें नहीं करनी होंगी बल्कि इमरजेंसी गैस रिजर्व्स और खाद के वैकल्पिक स्रोतों को तेजी से तलाशना होगा।

सिर्फ खाद नहीं, दवाइयां और टेक्नोलॉजी भी खतरे में

India Fertilizer Crisis सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा। खाद बनाने में जो बाय-प्रोडक्ट्स निकलते हैं वो फार्मास्युटिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की रीढ़ हैं। भारत की विशाल जेनेरिक मेडिसिन इंडस्ट्री भी रॉ मटेरियल के लिए इसी केमिकल चेन पर निर्भर है। अगर गैस और सल्फर की सप्लाई रुकती है तो पैरासिटामॉल से लेकर स्मार्टफोन तक हर चीज महंगी हो जाएगी।

यह एक सिस्टमैटिक इकोनॉमिक लिटमस टेस्ट होगा कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को इस बहुआयामी संकट से कैसे बचाता है। आने वाले दो महीने तय करेंगे कि यह संकट कितना गहरा होता है और भारत इससे कैसे निपटता है।

आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर

यह संकट सिर्फ आंकड़ों और नीतियों का मामला नहीं है। इसका सीधा असर हर भारतीय परिवार की थाली पर पड़ेगा। अगर खरीफ की फसल प्रभावित हुई तो चावल, दालें, सब्जियां और तिलहन की कीमतें कई गुना बढ़ सकती हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो सकता है। किसानों की आय घटेगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था लड़खड़ाएगी और शहरों में महंगाई का बोझ असहनीय हो जाएगा। होरमुज की घेराबंदी भारत के लिए एक वेक-अप कॉल है कि हम अपनी खाद्य सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित करेंगे।


मुख्य बातें (Key Points)
  • India Fertilizer Crisis का मूल कारण यह है कि यूरिया का कच्चा माल प्राकृतिक गैस है जो गल्फ देशों से आती है। होरमुज की नाकेबंदी से गैस सप्लाई अनिश्चित हो गई है, भारत के यूरिया प्लांट 60% क्षमता तक सिमट चुके हैं और प्लांट बंद होने पर दोबारा चालू करने में एक महीना लगता है।
  • जून में खरीफ बुवाई से पहले सिर्फ 2 महीने बाकी हैं, भारत 60% DAP आयात करता है जो मिडिल ईस्ट और जॉर्डन से आता है। अगर मई तक होरमुज नहीं खुला तो खरीफ की फसल बर्बाद हो सकती है और 2022 से बड़ा फूड शॉक पैदा हो सकता है।
  • समुद्री बीमा प्रीमियम 400% बढ़ा है, फर्टिलाइजर सब्सिडी 1.7 लाख करोड़ से बढ़कर 2.5 लाख करोड़ पार कर सकती है, और सल्फर (तेल रिफाइनिंग का बाय-प्रोडक्ट) की कमी से खाद, दवाइयां और सेमीकंडक्टर तीनों संकट में आ सकते हैं।
  • विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर ईरान ने होरमुज ब्लॉक रखा तो यह ग्लोबल हंगर का ट्रिगर बन सकता है। भारत को इमरजेंसी गैस रिजर्व्स बनाने, खाद के वैकल्पिक स्रोत तलाशने और ऊर्जा विविधीकरण पर तत्काल काम करना होगा।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: यूरिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस क्यों जरूरी है?

A: यूरिया हैबर-बॉश प्रक्रिया (Haber-Bosch Process) से बनती है जिसमें हवा से नाइट्रोजन और प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन लेकर अमोनिया (NH₃) बनाई जाती है। इसी अमोनिया से यूरिया तैयार होती है। दुनिया के 50% खाद्य उत्पादन इसी यूरिया पर निर्भर है, इसलिए प्राकृतिक गैस की सप्लाई रुकने का मतलब है खाद्य संकट।

Q2: India Fertilizer Crisis का खरीफ फसल पर क्या असर पड़ेगा?

A: जून में खरीफ बुवाई शुरू होती है और किसानों को सबसे पहले यूरिया और DAP चाहिए। भारत 60% DAP आयात करता है जो मिडिल ईस्ट से आता है। अगर होरमुज मई तक नहीं खुला तो खाद की कमी से पैदावार आधी से कम हो सकती है, जिससे चावल, दालों और सब्जियों की कीमतें कई गुना बढ़ सकती हैं।

Q3: 2022 के रूस-यूक्रेन संकट और मौजूदा संकट में क्या फर्क है?

A: 2022 में फर्टिलाइजर कीमतें 300% बढ़ी थीं, लेकिन मिडिल ईस्ट सप्लाई चेन बरकरार थी। इस बार संकट का केंद्र खुद मिडिल ईस्ट है, जो भारत के ज्यादा करीब है। होरमुज से 20% से ज्यादा वैश्विक LNG और बड़ा हिस्सा फर्टिलाइजर कच्चे माल का गुजरता है। इसलिए यह संकट 2022 से कहीं ज्यादा गंभीर और भारत के लिए ज्यादा खतरनाक है।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Dr BR Ambedkar Legacy: शून्य से शिखर: डॉ. अंबेडकर की वो कहानी जो रोंगटे खड़े कर दे!

Next Post

Israel Samson Option: ईरान ने Dimona के पास मिसाइल गिराई, क्या इजराइल करेगा परमाणु हमला?

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

September 6 History

इतिहास के पन्नों से: 6 सितंबर को घटी ये बड़ी घटनाएं, लंदन की महान आग से लेकर मैगलन की ऐतिहासिक यात्रा तक

रविवार, 6 सितम्बर 2026
IMD Alert

IMD Alert: East Rajasthan-MP में Very Heavy Rainfall, दिल्ली में भी भारी बारिश, 6 राज्यों में Orange Warning

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Breaking News Live Updates 6 September

Breaking News Live Updates 6 September 2026: Top Alerts, हर बड़ी खबर सबसे पहले

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Aaj Ka Rashifal 6 September 2026

आज का राशिफल 6 सितंबर 2026: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्यफल

रविवार, 6 सितम्बर 2026
Sachin Pilot Punjab Congress Incharge

Congress Leadership Reshuffle: सचिन पायलट बने पंजाब के नए प्रभारी, भूपेश बघेल को मिली असम की जिम्मेदारी

शनिवार, 5 सितम्बर 2026
Sond

बिजली संकट: Punjab में 1,500 MW उत्पादन घटा, केंद्र पर कोयला कमी का आरोप

शनिवार, 5 सितम्बर 2026
Next Post
Israel Samson Option

Israel Samson Option: ईरान ने Dimona के पास मिसाइल गिराई, क्या इजराइल करेगा परमाणु हमला?

Navarna Mantra

Navarna Mantra: मां दुर्गा के 9 बीज मंत्रों से होती है नवग्रहों की शांति, जानें चमत्कारी फायदे

Best Health Insurance

Best Health Insurance For 60+ Parents: सीनियर सिटीजन के लिए सही पॉलिसी चुनने का पूरा फ्रेमवर्क

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।