कर्नाटक, 19 जून (The News Air) लोकसभा चुनाव में लंबी लड़ाई लड़ने के बाद, एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। इस बार विवाद की जड़ कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार की तरफ से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने को लेकर हैं। कर्नाटक में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कम से कम तीन रुपए का इजाफा हुआ है। अब इसे लेकर BJP तुरंत हमलावर हो गई। प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने फैसला वापिस लेने तक राज्यभर आंदोलन की घोषणा की। कांग्रेस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए तर्क दिया कि बढ़ोतरी के बावजूद, कर्नाटक में तेल की कीमत अभी भी दूसरे बीजेपी शासित राज्यों की तुलना में कम ही होगी।
दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस ने अपने तर्क में रेवेन्यू कलेक्शन पर केंद्र बनाम राज्य की लंबी बहस पर भी रोशनी डाली है। कर्नाटक के गृह मंत्री एमबी पाटिल ने तर्क दिया कि डेवलपमेंट प्रोग्राम और पांच गारंटियों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू की जरूरत है।
सिद्धारमैया ने सुझाव दिया कि केंद्र की GST नीति ने उनकी सरकार को ये निर्णय लेने के लिए मजबूर किया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र ने कर्नाटक को बकाया GST रेवेन्यू जारी नहीं किया है। इसके चलते परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के रेवेन्यू कलेक्शन को बढ़ाने का यही एक संभाव तरीका था।
GST पर बहस अचानक उभरने वाली बात नहीं है। फरवरी में, कर्नाटक कांग्रेस के सदस्य दिल्ली आए थे, जहां उन्होंने केंद्र से कर्नाटक पर बकाया GST रेवेन्यू को ‘जारी’ करने की अपील की थी।
इसे चुनावी मुद्दा बनाने की भी कोशिश की गई, जिसमें बताया गया कि केंद्र सरकार कर्नाटक के हितों के खिलाफ है। इस बार, सिद्धारमैया की ओर से GST को असल मुद्दे बनाने से, तेली की कीमतों में बढ़ोतरी केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई बन सकती है।
कीमतों में बढ़ोतरी कांग्रेस के लिए एक नाजुक मुद्दा है। जमीनी स्तर पर, ये कदम लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आया होगा और इसका पब्लिक ट्रांसपोर्ट की लागत पर बुरा असर पड़ सकता है।
राज्य कांग्रेस केंद्र सरकार पर दोष मढ़कर इसके असर को कम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस बढ़ोतरी को पार्टी की पांच गारंटी से भी जोड़ा है। कर्नाटक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की लोकप्रियता को देखते हुए, कांग्रेस उम्मीद कर रही होगी कि इससे कुछ नकारात्मक नतीजों पर रोक लगेगी।
दूसरी ओर, BJP इसे एक मौके की तरह देख रही है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी के दमदार प्रदर्शन के बावजूद राज्य इकाई को अभी भी एक मुश्किल चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य इकाई अभी भी 2023 विधानसभा चुनाव की हार से सदमे में है। इसे अभी भी कांग्रेस की लोकप्रिय पांच गारंटियों का जवाब देना होगा।
डीजल पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी ने BJP की राज्य इकाई को कांग्रेस पर पलटवार करने का एक अच्छा मौका दे दिया है। बीजेपी ने फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।
बीजेपी का हमला राज्य स्तर तक सीमित नहीं है। हरदीप सिंह पुरी जैसे केंद्रीय नेता भी इस बहस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस फैसले से ईंधन की कीमतें 8 रुपए तक बढ़ सकती हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कीमत की तुलना दूसरे बीजेपी शासित राज्यों से की और सुझाव दिया कि कर्नाटक में ईंधन की कीमतें देश में सबसे ज्यादा हैं।
पुरी ने इस बात पर जोर डाला कि कैसे केंद्र सरकार ने 2021 में कीमतों को कम करने के लिए ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। राष्ट्रीय स्तर पर, कर्नाटक कांग्रेस का ये निर्णय बीजेपी को बहुत जरूरी हथियार देता है। ऐसे चुनाव के बाद, जिसमें बेरोजगारी और महंगाई मतदाताओं के लिए प्रमुख चिंताएं थीं, BJP को एक नया मौका मिला है।








