IIT Baba Marriage: प्रयागराज महाकुंभ मेले में रातोंरात फेम हुए IIT बाबा अभय ने शादी कर ली है। हरियाणा के झज्जर जिले के सासरौली गांव के रहने वाले IIT बाबा ने 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर महादेव के मंदिर में विवाह के बंधन में बंधे। इसके बाद 19 फरवरी को उन्होंने कोर्ट मैरिज भी कर ली। आज सोमवार को वह अपनी पत्नी के साथ पहली बार अपने घर झज्जर पहुंचे, जहां उन्होंने माता-पिता का आशीर्वाद लिया।

दुल्हनिया ने बताई अपनी इच्छा: दोनों का ऐम सेम है
शादी के बाद जब IIT बाबा से पूछा गया कि उनकी पत्नी कैसी हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “हम दोनों का ऐम सेम ही है, इसीलिए शादी की।” IIT बाबा की पत्नी ने भी बताया कि उनका लक्ष्य भी आध्यात्मिकता और साधना ही है। दोनों का भगवान में ही रुझान है और दोनों साथ मिलकर साधना करेंगे।
IIT बाबा ने कहा कि शादी एक कर्म था जो पूरा करना जरूरी था। “वो एक पूरा जीवन का कर्म ही पूरा हो गया। वैसे तो हमको कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन ऑफिशियली भी हो गया,” उन्होंने कहा। उनका कहना है कि शादी के बाद भी उनके जीवन का मूल उद्देश्य नहीं बदला है: “कर्म पूरा करके साइकिल से पूर्ण तरीके से फ्री होना।”
‘श्री यूनिवर्सिटी’ बनाने की तैयारी, ऑनलाइन साधना शुरू
IIT बाबा ने बताया कि महाकुंभ के बाद वे गायब नहीं हुए थे, बल्कि पिछले कई महीनों से एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने तीन तरह की साधनाएं डिजाइन की हैं: पहली ज्ञान योग की साधना जिसमें विवेक और राइट लॉजिक सिखाया जाएगा, दूसरी भक्ति साधना और तीसरी एक ओरिएंटेशन टाइप की शुरुआती साधना जो उन लोगों के लिए है जिन्हें आध्यात्मिकता का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है।
IIT बाबा ने ‘श्री फाउंडेशन’ के नाम से ऑनलाइन क्रिया साधना शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि वे एक “स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी” बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं, जहां अलग-अलग डिपार्टमेंट होंगे। भक्ति साधना का अलग विभाग होगा जिसे भक्ति के गुरु लीड करेंगे, क्रिया साधना का अलग विभाग होगा। यह बिल्कुल यूनिवर्सिटी की तरह कंबाइंड तरीके से चलेगा।
‘मेरा मैसेज है: बस साधना करो’
युवाओं को संदेश देते हुए IIT बाबा ने कहा कि “साधना ही करना है, साधना करना ही मेरा मैसेज है।” उन्होंने कहा कि उनका काम सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी ह्यूमैनिटी के लिए है। “ह्यूमन बीइंग जो है वो तो सेम ही है हर जगह। ऐसा नहीं है कि यूरोपियन इंसान अलग तरीके से सांस लेता है और हम अलग तरीके से,” उन्होंने कहा।
जब उनसे मातृभूमि झज्जर के लिए कुछ विशेष करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे सबके लिए काम करेंगे, लेकिन किसी एक जगह को ज्यादा प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। उन्होंने अद्वैत का सिद्धांत बताते हुए कहा, “जैसे ही कोई ऊपर-नीचे होता है, इसका मतलब तुम आध्यात्मिक नहीं रहे। किसी भी चीज को ज्यादा या कम किया तो मतलब तुमने अंतर कर दिया। अंतर होते ही तुम फेल हो गए।”

ओशो पर भी रखी राय
IIT बाबा ने ओशो के बारे में अपनी राय भी रखी। उन्होंने कहा कि ओशो फिलॉसोफी के टीचर थे, इंटेलिजेंस के मामले में उन्होंने काफी किताबें पढ़ी थीं, लेकिन उनका जो प्रैक्टिकल वाला हिस्सा था, जो साधनाएं और तरीके उन्होंने दिए, वो समाज के अंदर इतने इफेक्टिव नहीं दिखे। हालांकि उन्होंने ओशो के डायनेमिक ध्यान की तारीफ भी की।
आश्रम बनाने की भी है योजना
IIT बाबा ने बताया कि आश्रम बनाने की भी योजना है, लेकिन अभी वो “बनाने वाले स्टेज” में है और इसमें काफी समय लगेगा। पिछले एक साल से वे ग्राउंडवर्क कर रहे हैं, करिकुलम डिजाइन कर रहे हैं कि क्या कोर्सेज होंगे और किस तरीके से सिखाए जाएंगे। जब भी कोई जगह मिलेगी, वे उसे फिजिकल रूप में मैनिफेस्ट करेंगे और जितना ज्यादा हो सके उसे फैलाएंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- IIT बाबा अभय ने 15 फरवरी महाशिवरात्रि पर शादी की, 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी हुई
- पत्नी ने बताया: दोनों का ऐम सेम है, साथ मिलकर साधना करेंगे
- ‘श्री फाउंडेशन’ के तहत ऑनलाइन साधना शुरू, स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी बनाने की योजना
- युवाओं को मैसेज: “साधना ही करना है, यही मेरा एकमात्र संदेश है”













