Indore Water Contamination Crisis: देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर अब एक भयावह त्रासदी का गवाह बन गया है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1400 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं और करीब 200 लोग अभी भी अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। यह कोई अचानक आई आपदा नहीं थी बल्कि स्थानीय लोग पिछले डेढ़ साल से पानी में बदबू और कड़वाहट की शिकायत प्रशासन से करते आ रहे थे। लेकिन उनकी आवाज अनसुनी रही और अब इसकी कीमत निर्दोष जिंदगियों ने चुकाई है।
कैसे शुरू हुई यह तबाही?
29 दिसंबर 2025 को भागीरथपुरा में लोगों को उल्टी और दस्त की समस्या शुरू हुई। शुरुआत में कुछ लोग अस्पताल पहुंचे, लेकिन धीरे-धीरे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। जब प्रशासन की नींद खुली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और जांच में जो सच सामने आया वह किसी को भी दहला देने वाला था।
पाइपलाइन के ऊपर बना था शौचालय
नर्मदा नदी से आने वाली पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज हो गया था। लेकिन असली समस्या यह थी कि जिस जगह लीकेज हुआ ठीक उसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ था और दोनों के बीच कोई सेफ्टी टैंक नहीं था। नतीजा यह हुआ कि सीवर का गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल गया। यह लापरवाही नहीं बल्कि यह आपराधिक उपेक्षा थी जिसने मासूम लोगों की जान ले ली।
मौतों के आंकड़ों पर सियासी खींचतान
मौतों के आंकड़ों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है लेकिन मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि दूषित पानी से सिर्फ चार मौतें हुई हैं। वहीं इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव इस संख्या को 10 बता रहे हैं। जब प्रशासन ही मौतों की सही गिनती नहीं बता पा रहा तो पीड़ित परिवारों को न्याय कैसे मिलेगा यह एक बड़ा सवाल है।
NHRC ने भी लिया संज्ञान
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि भागीरथपुरा में पूरी पाइपलाइन की जांच की जा रही है ताकि कहीं और लीकेज का पता लगाया जा सके और साथ ही एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
सीवेज के पानी में क्या-क्या होता है?
किम्स हॉस्पिटल, ठाणे के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉक्टर अनिकेत मुले ने इस मामले की चिकित्सीय गंभीरता समझाते हुए बताया कि सीवेज के पानी में इंसानों और जानवरों का मल-मूत्र, घरों का गंदा पानी और फैक्ट्रियों का रासायनिक कचरा मिला होता है। इसमें ई. कोलाई, साल्मोनेला, शिगेला और वाइब्रियो कोलेरी जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाते हैं जिनमें वाइब्रियो कोलेरी हैजा का कारण बनता है। इसके अलावा हेपेटाइटिस A और E, रोटा वायरस तथा नोरो वायरस जैसे वायरस भी मौजूद होते हैं।
सीवेज के पानी में पैरासाइट्स और कीड़ों के अंडे भी होते हैं। इसमें अमोनिया, नाइट्रेट्स, डिटर्जेंट, कीटनाशक और सीसा तथा आर्सेनिक जैसे भारी धातु भी पाए जाते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि इनमें से कई तत्व पानी में होने पर न स्वाद बदलते हैं और न ही कोई गंध आती है जिससे इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है।
दूषित पानी पीने के गंभीर परिणाम
डॉक्टर अनिकेत मुले ने बताया कि जब कोई ऐसा दूषित पानी पीता है तो उसे उल्टी और दस्त, टाइफाइड, हैजा तथा हेपेटाइटिस A या E इंफेक्शन हो सकता है। अगर ऐसा पानी लगातार कई दिनों तक पिया जाए तो शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है और इलेक्ट्रोलाइट्स यानी जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है। इससे थकान, सुस्ती और चक्कर आने जैसी समस्याएं होती हैं। साथ ही लिवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है।
बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा
लंबे समय तक दूषित पानी पीने से बच्चों का विकास रुक जाता है और कुपोषण होता है जबकि वयस्कों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। यानी शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता घट जाती है। अगर शरीर में बहुत ज्यादा पानी की कमी हो जाए, हैजा या टाइफाइड हो जाए और सही समय पर इलाज न मिले तो मौत भी हो सकती है। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग इस खतरे के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कमजोर होती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
पानी से फैलने वाली बीमारियों के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं इसलिए लोग इन्हें अक्सर अनदेखा कर देते हैं लेकिन यह बहुत खतरनाक हो सकता है। अगर आपको पानी गंदा लग रहा हो और हल्के दस्त लगें, पेट में दर्द या ऐंठन हो, उबकाई आ रही हो, बहुत कमजोरी महसूस हो, सिरदर्द हो, हल्का बुखार आ रहा हो या फिर मुंह सूख रहा हो और खूब प्यास लग रही हो तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इन लक्षणों को हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है।
दूषित पानी पी लिया तो क्या करें?
अगर किसी ने गलती से दूषित पानी पी लिया है और दस्त-उल्टी हो रही है तो सबसे पहले तुरंत ORS यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन पीना चाहिए क्योंकि यह शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी पूरी करता है। साथ ही हल्का और सादा खाना खाएं और लक्षणों पर लगातार नजर रखें। अगर दस्त या उल्टी जारी रहे, मल में खून आए, बुखार हो या कमजोरी और चक्कर आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है। देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है।
पानी को कैसे रखें सुरक्षित?
डॉक्टर अनिकेत मुले ने पानी को सुरक्षित रखने के उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि अगर पानी का स्वाद या रंग बदला हुआ लगे, बदबू आ रही हो या कोई कण दिखाई दे तो ऐसा पानी बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पीने, खाना पकाने, दांत साफ करने और फल-सब्जियां धोने के लिए हमेशा उबला और साफ पानी ही इस्तेमाल करें। घर की पानी की टंकी को नियमित रूप से साफ करना भी बेहद जरूरी है और अगर नल से गंदा पानी आए तो तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दें।
यह याद रखना जरूरी है कि कई बार साफ दिखने वाला पानी भी दूषित हो सकता है। अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां अक्सर दूषित पानी की समस्या आती है तो पानी को 10-15 मिनट तक उबालें और RO या UV टेक्निक वाला वाटर प्यूरीफायर लगवाएं। प्रशासन की सलाह पर क्लोरीन टेबलेट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। साफ पानी को हमेशा ढके हुए बर्तन में रखें ताकि वह दोबारा दूषित न हो पाए।
प्रशासनिक लापरवाही का भयावह नतीजा
यह त्रासदी पूरी तरह से टाली जा सकती थी क्योंकि स्थानीय लोग पिछले डेढ़ साल से पानी में गड़बड़ी की शिकायत कर रहे थे। दिसंबर के आखिरी हफ्तों में तो शिकायतें और भी तेज हो गई थीं। कायदे से पहली शिकायत मिलते ही प्रशासन को पानी की जांच करानी चाहिए थी और ठोस कदम उठाने चाहिए थे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह मामला सिर्फ इंदौर का नहीं है बल्कि देश के कई शहरों में पुरानी पाइपलाइनें हैं जिनकी कभी जांच नहीं होती। जब तक त्रासदी न हो प्रशासन जागता नहीं। इंदौर जैसे ‘स्वच्छ शहर’ में जब ऐसी हालत है तो दूसरे शहरों का क्या होगा यह सोचने वाली बात है। यह घटना पूरे देश के नगर निगमों और जल विभागों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 14 मौतें हुई हैं जबकि 1400 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं और 200 के करीब अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।
- पाइपलाइन लीकेज के ठीक ऊपर शौचालय होने से सीवेज का पानी सीधे पीने के पानी में मिल गया जो इस त्रासदी की मुख्य वजह बना।
- स्थानीय लोग पिछले डेढ़ साल से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर रहे थे लेकिन प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
- NHRC ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
- बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा होता है।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








