LIVE | ...
मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - NEWS-TICKER - गांजा, भांंग, चरस… एक ही पौधे से कैसे निकलते हैं तीन ‘नशे’, क्या है इनमें फर्क?

गांजा, भांंग, चरस… एक ही पौधे से कैसे निकलते हैं तीन ‘नशे’, क्या है इनमें फर्क?

The News Air Team by The News Air Team
शुक्रवार, 10 मई 2024
in NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
A A
0
गांजा, भांंग, चरस
104
SHARES
690
VIEWS
ShareShareShareShareShare

एक पौधा और कई तरह के नशे का साधन. कुछ एकदम सस्ता तो किसी की कीमत करोड़ों में. इस पौधे को हम सामान्य तौर पर भांग का पौधा या गांजा का पौधा यानी कैनबिस के नाम से जानते हैं. पाकिस्तान में चिकित्सा से जुड़ी जरूरतों के लिए इसे लीगल यानी कानूनी करार दिया गया है. इसी भांग के पौधे से खाने के लिए भांग, पीने के लिए गांजा और ज्यादा नशे के लिए चरस बनाई जाती है.

ऐसे में सवाल है कि आखिर एक पौधे से कैसे तीन तरह के नशे तैयार होते हैं. क्या होता है भांग, गांजा और चरस में अंतर?

भारत में पाई जाती है भांग की यह प्रजाति

भांग, गांजा और चरस जैसे तीन ड्रग्स देने वाले पौधे की भारत में पाई जाने वाली प्रजाति का साइंटिफिक नाम कैनबिस इंडिका है. इससे बनाए जाने वाले गांजे को ही मैरुआना या मर्जुआना, वीड, पॉट और हशीश के नाम से भी जाना जाता है. भांग बनाने के लिए आमतौर पर इसकी मादा प्रजाति के पौधे का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी पत्तियों और बीजों को पीस लिया जाता है और इससे बने पेस्ट को भांग कहते हैं.

यह भी पढे़ं 👇

Nepal Hydropower Disaster

Nepal Hydropower Disaster: 1300+ की मौत, हिमालय का वरदान बना अभिशाप, जलवायु परिवर्तन ने ली भारी कीमत

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Climate Crisis

Climate Crisis: 1.5°C की सीमा पार करना अब अनिवार्य, UN की चेतावनी – ग्लोबल वार्मिंग रोकना असंभव

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Eiffel Tower Controversy

Eiffel Tower Controversy: हिंदू समूह की विजिट पर महिला कर्मचारियों को हटाया, आइफल टावर बंद

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Bihar Flood Crisis

Bihar Flood Crisis: बाढ़ से 29.13 लाख लोग प्रभावित, मुख्यमंत्री ने लिया हालात का जायजा

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026

इसे लोग सीधे खाते हैं या फिर ठंडई में डाल कर पीते हैं. भांग के पकौड़े भी बनाए जाते हैं. कहते हैं कि भांग जितनी ज्यादा पीसी जाती है, उतनी ही नशा करती है.

कैनबिस यानी भांग के पौधों की कलियों को संस्कृत में गांजा कहा गया है. इसके फूलों और पत्तियों को सुखा लिया जाता है. फिर बारीक कर तंबाकू की तरह चिलम या फिर सिगरेट में भरकर उसका धुआं पीया जाता है.

फूलों को रगड़-रगड़कर बनाई जाती है चरस

भांग के पौधे में पाए जाने वाले चिपचिपे पदार्थ को (resin) या राल कहते हैं. इसी से चरस तैयार की जाती है. इसके लिए भांग के फूलों को हाथ पर रगड़ा जाता है, जिससे काली परत जमती है. इस काली परत का इस्तेमाल चरस के रूप में किया जाता है. भारत, नेपाल, पाकिस्तान और लेबनान जैसे कई देशों में चरस को हाथों से रगड़ने का बाकायदा ढका-छिपा उद्योग चलता है.

भांग फूलों को तोड़कर घंटों रगड़ा जाता है. कहते हैं कि इसे रगड़ने की गति जितनी कम होती है, चरस की गुणवत्ता उतनी ही बेहतर होती है. भांग की कीमत सबसे कम होती है, जबकि चरस की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपए तक पहुंच जाती है.

भांग की बिक्री के लिए लाइसेंस भी मिलता है

भारत के कई राज्यों में भी भांग की खेती को कानूनी रूप देने की मांग उठती रहती है. सामान्यतौर पर एनडीपीएस अधिनियम 1985 के अंतर्गत प्रतिबंधित माना जाता है पर औद्योगिक, शोध और चिकित्सीय इस्तेमाल के लिए इसकी छूट है. वहीं, उत्तर प्रदेश में लाइसेंस के जरिए भांग की बिक्री होती है. इसके लिए बाकायदा ठेके उठते हैं. कई राज्यों में कोई भी भांग खरीद सकता है और खुलेआम भांग की लस्सी बिकती है.

बिहार और पश्चिम बंगाल में भांग के उत्पादन की अनुमति है. वहीं, राजस्थान जैसे राज्य में भांग के उत्पादन की अनुमति नहीं है. उत्तराखंड में तो भांग की बाकायदा खेती की जाती है तो कुछ स्थानों पर यह बिना खेती के भी उगता है. हिमालय की तहलटी में जम्मू कश्मीर और पूर्व में असम में पाए जाने वाले भांग के पौधों से अच्छी गुणवत्ता की चरस बनती है.

अमेरिका में होता है कैंसर का इलाज

भले ही भांग, गांजा और चरस को हम ड्रग्स यानी नशे के साधन के रूप में जानते हैं पर इसका चिकित्सीय इस्तेमाल भी होता है. भांग के बीजों में भरपूर फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, अमीनो एसिड भी होता है. अमेरिका तक में हुए शोधों में यह सिद्ध हो चुका है कि इसके औषधीय गुण ब्लड शुगर कंट्रोल करने से लेकर अग्नाशय के कैंसर और आर्थराइटिस से लेकर दिल की बीमारी को ठीक करने में सक्षम हैं. हालांकि, इसके लिए भांग का इस्तेमाल नियंत्रित तरीके से दवा के रूप में चिकित्सक की सलाह पर ही होना चाहिए.

कीमोथैरेपी के साइडइफेक्ट यानी भूख न लगना, उल्टी या नाक बहने की शिकायत को दूर करने के लिए भांग का इस्तेमाल किया जा सकता है. अमेरिका में कैंसर का इलाज कर रहे मरीजों को ऐसी दवा देने की मंजूरी है.

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में विशेष अदालत ने 2 शूटर्स दोषी, सचिन आंदुरे,

Next Post

बैतूल निर्वाचन क्षेत्र के चार मतदान केंद्रों पर फिर से मतदान जारी

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Nepal Hydropower Disaster

Nepal Hydropower Disaster: 1300+ की मौत, हिमालय का वरदान बना अभिशाप, जलवायु परिवर्तन ने ली भारी कीमत

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Climate Crisis

Climate Crisis: 1.5°C की सीमा पार करना अब अनिवार्य, UN की चेतावनी – ग्लोबल वार्मिंग रोकना असंभव

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Eiffel Tower Controversy

Eiffel Tower Controversy: हिंदू समूह की विजिट पर महिला कर्मचारियों को हटाया, आइफल टावर बंद

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Bihar Flood Crisis

Bihar Flood Crisis: बाढ़ से 29.13 लाख लोग प्रभावित, मुख्यमंत्री ने लिया हालात का जायजा

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Captain Amrinder

Captain Amrinder: BJP में ही रहेंगे कैप्टन, बेटी ने खारिज की कांग्रेस वापसी की अफवाहें

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Punjab Employees Strike

Punjab Employees Strike: सरकारी कर्मचारियों की आज दूसरे चरण की हड़ताल, दफ्तरी काम ठप रहेगा

मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
Next Post
बैतूल निर्वाचन

बैतूल निर्वाचन क्षेत्र के चार मतदान केंद्रों पर फिर से मतदान जारी

बैतूल निर्वाचन

हरियाणा में प्रॉपर्टी डीलर की सरेआम हत्या, उसी के ऑफिस में घुस कर दागी गोलियां,

बैतूल निर्वाचन

अब एक्स पर पोस्ट कर सकते हैं फिल्म, Elon Musk का बड़ा ऐलान

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।